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उड़द व मूंग की फसल बारिश से फिर अंकुरित
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मुस्करा (हमीरपुर)। करीब एक सप्ताह से लगातार हो रही बारिश से उड़द, मूंग व तिल की फसल बर्बाद हो गई है। जिससे किसान मायूस हैं। किसानों के तमाम प्रयासों के बावजूद अब तैयार फसल को बारिश का ग्रहण लग गया है। खेतों में तैयार खड़ी उड़द और मूंग, तिल की फसल के दाने बारिश में फूलकर दोबारा उगने लगे हैं। यही नहीं उड़द व मूंग की फलियां पानी में फूलकर सड़ने भी लगी हैं। जिससे किसानों के चेहरे उतर गए हैं।
कस्बे के तीनों मौजे चिलहेटा, काबर व राकर में किसानों की सैकड़ों हेक्टेयर में उड़द और मूंग की फसलें खड़ी हैं। जिसे किसान अन्ना जानवरों से बचाने में कामयाब हुए, लेकिन प्रकृति की मार से अब नहीं बचा पा रहे हैं। कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश से अब खेतों में खड़ी तैयार फसल सड़ने लगी हैं। कस्बे के किसान इब्राहिम ने बताया तीन बीघे में खड़ी उड़द फसल बारिश में पूरी तरह से बर्बाद हो गई है।
अब आगे की खेती का खर्चा कहां से निकलेगा यही सोचकर परेशान हैं। किसान हुकुम सिंह ने कहा यह आफत की बारिश हुई है। फसल हाथ में आते-आते रह गई। रामकुमार साहू ने बताया चार बीघा जमीन में उड़द और मूंग की फसल बोई थी। उड़द की फलियां पौधे में लगे होने के बावजूद भी अंकुरित होकर सड़ने की कगार पर है।
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किसान केशव प्रसाद ने कहा उन्होंने 10 बीघा में उड़द और मूंग की फसल बोई थी जो कि पूरी तरह बर्बादी की कगार पर है। कहा उड़द के पके दाने पौधे की फलियां के अंदर ही अंकुरित होने लगे हैं। सड़ने भी लगे हैं। फसल के नुकसान को देखकर वह बहुत निराश है।
किसान चंद्रशेखर द्विवेदी ने कहा रबी फसल के लिए बारिश तो अच्छी है, लेकिन खरीफ फसलों के लिए नुकसान दायक हैं। सात बीघे की उड़द बर्बाद हुई है। फसल बहुत अच्छी तैयार हुई थी। उत्पादन भी अच्छा होना तय था, लेकिन प्रकृति से वह फसल नहीं बचा पाए।
जिन किसानों ने फसल बीमा करा लिया है। फसल नुकसान पर बीमा कंपनी को 72 घंटे के अंदर दावा करें। वहीं अगर खेत में बारिश का पानी भरा है तो उसे निकालने के लिए मेड़ को काटकर निकालें। - डा. सरस कुमार तिवारी, उप कृषि निदेशक
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कस्बे के तीनों मौजे चिलहेटा, काबर व राकर में किसानों की सैकड़ों हेक्टेयर में उड़द और मूंग की फसलें खड़ी हैं। जिसे किसान अन्ना जानवरों से बचाने में कामयाब हुए, लेकिन प्रकृति की मार से अब नहीं बचा पा रहे हैं। कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश से अब खेतों में खड़ी तैयार फसल सड़ने लगी हैं। कस्बे के किसान इब्राहिम ने बताया तीन बीघे में खड़ी उड़द फसल बारिश में पूरी तरह से बर्बाद हो गई है।
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अब आगे की खेती का खर्चा कहां से निकलेगा यही सोचकर परेशान हैं। किसान हुकुम सिंह ने कहा यह आफत की बारिश हुई है। फसल हाथ में आते-आते रह गई। रामकुमार साहू ने बताया चार बीघा जमीन में उड़द और मूंग की फसल बोई थी। उड़द की फलियां पौधे में लगे होने के बावजूद भी अंकुरित होकर सड़ने की कगार पर है।
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किसान केशव प्रसाद ने कहा उन्होंने 10 बीघा में उड़द और मूंग की फसल बोई थी जो कि पूरी तरह बर्बादी की कगार पर है। कहा उड़द के पके दाने पौधे की फलियां के अंदर ही अंकुरित होने लगे हैं। सड़ने भी लगे हैं। फसल के नुकसान को देखकर वह बहुत निराश है।
किसान चंद्रशेखर द्विवेदी ने कहा रबी फसल के लिए बारिश तो अच्छी है, लेकिन खरीफ फसलों के लिए नुकसान दायक हैं। सात बीघे की उड़द बर्बाद हुई है। फसल बहुत अच्छी तैयार हुई थी। उत्पादन भी अच्छा होना तय था, लेकिन प्रकृति से वह फसल नहीं बचा पाए।
जिन किसानों ने फसल बीमा करा लिया है। फसल नुकसान पर बीमा कंपनी को 72 घंटे के अंदर दावा करें। वहीं अगर खेत में बारिश का पानी भरा है तो उसे निकालने के लिए मेड़ को काटकर निकालें। - डा. सरस कुमार तिवारी, उप कृषि निदेशक