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आंधी-बारिश से कई पेड़ और खंभे धराशाई
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नगर के बीएसएनएल टॉवर के पास आंधी से सड़क में टूटा पड़ा पेड़।
- फोटो : HAMIRPUR
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हमीरपुर। कई दिनों से हो रही झमाझम बारिश से आम जनजीवन अस्तव्यस्त है। वहीं रविवार शाम तेज आंधी के बीच जोरदार बारिश से बड़ी संख्या में पेड़ व बिजली के पोल धराशाई हो गए। जगह-जगह जलभराव की समस्या हो गई। कच्चे मकानों के गिरने का सिलसिला जारी है। आंधी व पानी के बीच बिजली व्यवस्था ध्वस्त होने पर करीब 20 घंटे शहरवासियों को बिजली और पानी नहीं मिला। जिससे लोगों को हैंडपंपों का सहारा लेना पड़ा।
बीते मंगलवार से लगातार बारिश का सिलसिला जारी है। रविवार को शाम करीब चार बजे तेज बारिश के साथ आंधी आने से बड़ी संख्या में पेड़ और बिजली के खंभे टूट गए। वहीं बीएसएनएल व प्राइवेट कंपनियों के केबल ध्वस्त होने से नेटवर्क भी गायब हो गया। बस स्टैंड से रानी लक्ष्मीबाई पार्क तक करीब चार बड़े पेड़ टूटकर सड़क में गिर गए। मार्ग अवरुद्ध होने के साथ बिजली की लाइन ध्वस्त हो गईं। नगर पालिका की जेसीबी मशीन से रात में ही टूटे पेड़ों को हटाकर आवागमन शुरू किया गया। रविवार शाम करीब चार बजे से गुल हुई बिजली सोमवार को करीब 12 बजे आ सकी। रविवार शाम से सोमवार सुबह पेयजल की आपूर्ति नहीं हुई। लोगों को हैंडपंपों का सहारा लेना पड़ा।
वहीं जलसंस्थान ऊंचाई के क्षेत्रों में चार टैंकर पानी ही उपलब्ध करा सका। पावर कारपोरेशन के एसडीओ हरिश्चंद्र ने बताया रात में बारिश व आंधी से बिजली आपूर्ति ठप होने पर रात में ही फाल्ट ढूंढने का काम शुरू हुआ। रात में कुंडौरा के पास मेन लाइन को ठीक किया गया। सुबह चार बजे जैसे ही पावर सबस्टेशन की लाइन चालू की तभी मुख्य ट्रांसफार्मर की केबल जलने से आपूर्ति ठप हो गई। कहा पेड़ों को गिरने से हुई क्षति का आंकलन कराया जा रहा है।
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तीनों जनरेटर कंडम
जल संस्थान विभाग के पास इमरजेंसी के लिए जनरेटर की व्यवस्था थी, लेकिन इनका उचित रखरखाव व ज्यादा जरूरत न पड़ने पर देखरेख नहीं हुई। ऐसे में यह जनरेटर कंडम हो गए हैं। अब बिजली न आने पर इमरजेंसी के लिए रखे जनरेटर नहीं चल सके। शहर में पेयजल का संकट खड़ा हो गया। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता बीके तिवारी ने बताया शहर में संस्थान के पास तीन जनरेटर हैं, लेकिन तीनों खराब पड़े हैं। यह वर्ष 1991-92 में खरीदे गए थे। बताया शहर में 14 नलकूप हैं। जिसमें 13 उनके उनके अधीन हैं। एक जल निगम से संचालित है। बिजली न रहने की दशा में कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है। उन्होंने टैंकरों के माध्यम से ऊंचाई वाले स्थानों में पेयजल की आपूर्ति की है।
अंडरग्राउंड केबल पालिका ने काटी
शहर को भरुआसुमेरपुर के 132 पावर हाउस से आपूर्ति की जा रही है। इस लाइन में आएदिन फाल्ट से आपूर्ति बाधित हो जाती थी। वर्ष 2013 में सितंबर माह में बेतवा नदी में आई बाढ़ के कारण नदी में 132 केवी लाइन के तार टावरों से टूटकर गिरे थे। तब 15 दिन लोगों को बिजली के दर्शन नहीं हुए थे। तब शहर को पर्याप्त बिजली मुहैया कराने के लिए पतारा गांव में 132 स्टेशन बनाया गया। वहां से शहर तक अंडर ग्राउंड लाइन डाली गई थी। इससे जजी परिसर के सबस्टेशन को बिजली दी जाने लगी, लेकिन शहर के सब स्टेशन को नहीं जोड़ा गया। पिछले साल अक्तूबर में रोहाइन नाले के पास अंडर ग्राउंड लाइन को नगर पालिका ने रपटा बनाने के लिए मिट्टी डाली है।
मशीन से हो रहे कार्य के दौरान केबल डैमेज हो गई है। इस लाइन की मरम्मत को पावर कारपोरेशन ने नगर पालिका पर करीब 20 लाख रुपये का हर्जाना ठोंका है। लेकिन अभी तक कारपोरेशन को धन नहीं मिला है। इस मामले में नगर पालिका में ईओ का काम देख रहे एसडीएम संजीव शाक्य ने बताया दिए गए एस्टीमेट में कारपोरेशन ने 33 प्रतिशत सर्विस चार्ज जोड़ा है जो मानक के अनुरूप नहीं है। फिर भी एस्टीमेट को लखनऊ हेड आफिस भेजा गया है। अनुमति मिलने पर धनराशि दी जाएगी। उधर कारपोरेशन के एसडीओ हरिश्चंद्र का कहना है कि नुकसान की भरपाई के लिए बनाया जाने वाला एस्टीमेट नियामक आयोग के दिए गए दिशा निर्देशों के तहत बनाया जाता है।
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बीते मंगलवार से लगातार बारिश का सिलसिला जारी है। रविवार को शाम करीब चार बजे तेज बारिश के साथ आंधी आने से बड़ी संख्या में पेड़ और बिजली के खंभे टूट गए। वहीं बीएसएनएल व प्राइवेट कंपनियों के केबल ध्वस्त होने से नेटवर्क भी गायब हो गया। बस स्टैंड से रानी लक्ष्मीबाई पार्क तक करीब चार बड़े पेड़ टूटकर सड़क में गिर गए। मार्ग अवरुद्ध होने के साथ बिजली की लाइन ध्वस्त हो गईं। नगर पालिका की जेसीबी मशीन से रात में ही टूटे पेड़ों को हटाकर आवागमन शुरू किया गया। रविवार शाम करीब चार बजे से गुल हुई बिजली सोमवार को करीब 12 बजे आ सकी। रविवार शाम से सोमवार सुबह पेयजल की आपूर्ति नहीं हुई। लोगों को हैंडपंपों का सहारा लेना पड़ा।
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वहीं जलसंस्थान ऊंचाई के क्षेत्रों में चार टैंकर पानी ही उपलब्ध करा सका। पावर कारपोरेशन के एसडीओ हरिश्चंद्र ने बताया रात में बारिश व आंधी से बिजली आपूर्ति ठप होने पर रात में ही फाल्ट ढूंढने का काम शुरू हुआ। रात में कुंडौरा के पास मेन लाइन को ठीक किया गया। सुबह चार बजे जैसे ही पावर सबस्टेशन की लाइन चालू की तभी मुख्य ट्रांसफार्मर की केबल जलने से आपूर्ति ठप हो गई। कहा पेड़ों को गिरने से हुई क्षति का आंकलन कराया जा रहा है।
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तीनों जनरेटर कंडम
जल संस्थान विभाग के पास इमरजेंसी के लिए जनरेटर की व्यवस्था थी, लेकिन इनका उचित रखरखाव व ज्यादा जरूरत न पड़ने पर देखरेख नहीं हुई। ऐसे में यह जनरेटर कंडम हो गए हैं। अब बिजली न आने पर इमरजेंसी के लिए रखे जनरेटर नहीं चल सके। शहर में पेयजल का संकट खड़ा हो गया। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता बीके तिवारी ने बताया शहर में संस्थान के पास तीन जनरेटर हैं, लेकिन तीनों खराब पड़े हैं। यह वर्ष 1991-92 में खरीदे गए थे। बताया शहर में 14 नलकूप हैं। जिसमें 13 उनके उनके अधीन हैं। एक जल निगम से संचालित है। बिजली न रहने की दशा में कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है। उन्होंने टैंकरों के माध्यम से ऊंचाई वाले स्थानों में पेयजल की आपूर्ति की है।
अंडरग्राउंड केबल पालिका ने काटी
शहर को भरुआसुमेरपुर के 132 पावर हाउस से आपूर्ति की जा रही है। इस लाइन में आएदिन फाल्ट से आपूर्ति बाधित हो जाती थी। वर्ष 2013 में सितंबर माह में बेतवा नदी में आई बाढ़ के कारण नदी में 132 केवी लाइन के तार टावरों से टूटकर गिरे थे। तब 15 दिन लोगों को बिजली के दर्शन नहीं हुए थे। तब शहर को पर्याप्त बिजली मुहैया कराने के लिए पतारा गांव में 132 स्टेशन बनाया गया। वहां से शहर तक अंडर ग्राउंड लाइन डाली गई थी। इससे जजी परिसर के सबस्टेशन को बिजली दी जाने लगी, लेकिन शहर के सब स्टेशन को नहीं जोड़ा गया। पिछले साल अक्तूबर में रोहाइन नाले के पास अंडर ग्राउंड लाइन को नगर पालिका ने रपटा बनाने के लिए मिट्टी डाली है।
मशीन से हो रहे कार्य के दौरान केबल डैमेज हो गई है। इस लाइन की मरम्मत को पावर कारपोरेशन ने नगर पालिका पर करीब 20 लाख रुपये का हर्जाना ठोंका है। लेकिन अभी तक कारपोरेशन को धन नहीं मिला है। इस मामले में नगर पालिका में ईओ का काम देख रहे एसडीएम संजीव शाक्य ने बताया दिए गए एस्टीमेट में कारपोरेशन ने 33 प्रतिशत सर्विस चार्ज जोड़ा है जो मानक के अनुरूप नहीं है। फिर भी एस्टीमेट को लखनऊ हेड आफिस भेजा गया है। अनुमति मिलने पर धनराशि दी जाएगी। उधर कारपोरेशन के एसडीओ हरिश्चंद्र का कहना है कि नुकसान की भरपाई के लिए बनाया जाने वाला एस्टीमेट नियामक आयोग के दिए गए दिशा निर्देशों के तहत बनाया जाता है।

मुख्य पावर हाउस में ट्रांसफार्मर की फुंकी केबिल ठीक करते बिजली कर्मी।- फोटो : HAMIRPUR

मेड़ी मोहल्ले में खाली बरतन लेकर पानी आने का इंतजार करते लोग व बच्चें।- फोटो : HAMIRPUR