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Hamirpur News: पांच वर्षों से नहीं रेडियोलॉजिस्ट, धूल फांक रही मशीनें
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हमीरपुर। करीब पांच सालों से जिला पुरुष अस्पताल व डेढ़ सालों से महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की मशीनें धूल फांक रही हैं।
गतवर्ष निकाय चुनाव के पहले जनपद आए डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने तत्कालीन सीएमओ को निर्देशित कर जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती कराने का आदेश दिया था, लेकिन आज तक इनकी तैनाती नहीं हो सकी। हालांकि महिला अस्पताल में महीने की चार तारीखों में गर्भवती महिलाओं की जांच प्राईवेट पैथोलॉजी सेंटरों से निशुल्क कराई जा रही है।
जिले में करीब 12 लाख की आबादी निवास करती है। सदर अस्पताल में जनपद सहित आसपास के जनपदों कानुपर, फतेहपुर, जालौन, महोबा व बांदा के भी मरीज इलाज के लिए यहां आते हैं। अस्पताल में समुचित इलाज न मिल पाने के कारण ज्यादातर मरीज मायूस लौट जाते हैं। चिकित्सकों की कमी के चलते भी मरीजों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। 29 मार्च 2023 को जनपद आए डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने तत्कालीन सीएमओ को हर हाल में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती के लिए निर्देशित किया था। तैनाती होने तक महिलाओं की जांचें निजी केंद्रों से कराकर उसका भुगतान शासन से कराए जाने के फरमान जारी किए थे। उनके फरमान को करीब एक साल गुजरने को हैं, लेकिन अभी तक जिला महिला व पुरुष अस्पतालों में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं हो सकी है।
जिला पुरुष अस्पताल में बीते चार सालों से रेडियोलॉजिस्ट का पद रिक्त है। वहीं, महिला अस्पताल में डेढ़ सालों से यह पद रिक्त है। जिसके चलते लाखों कीमत की मशीनें धूल फांक रही हैं। वहीं, स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल होने से मरीजों को आसपास के जनपदों में दौड़ लगानी पड़ती है।
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सुमेरपुर से आई गर्भवती मैना देवी ने बताया कि उन्होंने पिछली पांच जनवरी को प्राईवेट अल्ट्रासाउंड कराया था। तब 500 रुपये फीस देनी पड़ी थी। बताया कि इस बार निशुल्क जांच कराए जाने के लिए पंजीकरण कराया है। कहा कि अस्पताल में ही यह सुविधा मिलनी चाहिए।
कानपुर जनपद के मूसानगर से आई सुनीता पत्नी दिनेश ने पूछने पर बताया कि वह पांच महीने की गर्भवती हैं। पिछला अल्ट्रासाउंड पुखरायां में कराया था, जबकि इस बार यहां आईं हैं। कहा कि निशुल्क जांच के लिए पंजीकरण कराया है।
कानपुर जनपद के चितौली बरीपाल निवासी मरीज सदाप्यारी ने बताया कि करीब तीन माह से वह पेट की समस्या से परेशान हैं। दिसंबर 2023 में उसने कानपुर में अल्ट्रासाउंड कराया था। जिला अस्पताल में डॉ. प्रजापति का इलाज चल रहा है। कोई आराम नहीं मिल रहा, कहां कि दवा खाएं।
सुमेरपुर क्षेत्र निवासी कृष्ण कुमार ने बताया कि पेट की समस्या से वह परेशान हैं। अस्पताल दिखाने आए थे, लेकिन वही दवाएं देकर चलता कर दिया। चार साल से अल्ट्रासाउंड मशीन ठप है। कहा कि जांच न होने से बाहर महंगे दामों में जांच करानी पड़ती है।
सोनोलॉजिस्ट की तैनाती हुई थी। जिसे प्रशिक्षण के लिए भेजा गया था, लेकिन प्रशिक्षण में उसे अनफिट कर दिया गया है। जिसके चलते तैनाती नहीं हो सकी है। कहा कि गर्भवती महिलाओं की जांचें बाहर से कराकर उसका भुगतान कराया जाता है। जो महीने की चार तारीखों एक, नौ, 16 व 24 को कराई जाती है। कहा कि शुक्रवार को 26 महिलाओं के टोकन काटे गए हैं। पिछले माह 71 गर्भवती महिलाओं की निशुल्क जांचे कराई गईं थीं। - डॉ. फौजिया अंजुम नोमानी, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल
रेडियोलॉजिस्ट के लिए बराबर शासन से मांग की जा रही है। कहा कि 30 अप्रैल 2020 को रेडियोलॉजिस्ट का रिटायरमेंट होने के बाद से अब तक यह पद खाली है। तैनाती होते ही मशीनें चालू कराई जाएंगी। -डॉ. एसपी गुप्ता, सीएमएस, जिला पुरुष अस्पताल
जिले की राठ सीएचसी में तैनात एक डॉक्टर ने डिप्लोमा इन मेडिकल रेडियो डायग्नोसिस (डीएमआरडी) किया है। जहां पर वह सांठगांठ से लगातार तीन दिन यानी 72 घंटे ड्यूटी करता है और तीन दिन अवकाश पर रहता है। प्रशिक्षित चिकित्सक की तैनाती जिला अस्पताल में होनी चाहिए लेकिन उच्चाधिकारियों से सांठगांठ कर राठ में तैनाती ले रखी है। वहीं, तीन दिन वह झांसी में सेवाएं देेता है, जिससे रेडियोलॉजिस्ट होते हुए भी जिले की 12 लाख आबादी को इसके लिए भटकना पड़ रहा है। सीएमओ डॉ. गीतम सिंह का कहना है कि उन्हें जानकारी नहीं है कि उसने डीएमआरडी कर रखा है। कहा कि जिले में कुल पदों के सापेक्ष 33 फीसदी ही डॉक्टर हैं, जिनसेे काम चलाया जा रहा हैै।
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गतवर्ष निकाय चुनाव के पहले जनपद आए डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने तत्कालीन सीएमओ को निर्देशित कर जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती कराने का आदेश दिया था, लेकिन आज तक इनकी तैनाती नहीं हो सकी। हालांकि महिला अस्पताल में महीने की चार तारीखों में गर्भवती महिलाओं की जांच प्राईवेट पैथोलॉजी सेंटरों से निशुल्क कराई जा रही है।
जिले में करीब 12 लाख की आबादी निवास करती है। सदर अस्पताल में जनपद सहित आसपास के जनपदों कानुपर, फतेहपुर, जालौन, महोबा व बांदा के भी मरीज इलाज के लिए यहां आते हैं। अस्पताल में समुचित इलाज न मिल पाने के कारण ज्यादातर मरीज मायूस लौट जाते हैं। चिकित्सकों की कमी के चलते भी मरीजों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। 29 मार्च 2023 को जनपद आए डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने तत्कालीन सीएमओ को हर हाल में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती के लिए निर्देशित किया था। तैनाती होने तक महिलाओं की जांचें निजी केंद्रों से कराकर उसका भुगतान शासन से कराए जाने के फरमान जारी किए थे। उनके फरमान को करीब एक साल गुजरने को हैं, लेकिन अभी तक जिला महिला व पुरुष अस्पतालों में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं हो सकी है।
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जिला पुरुष अस्पताल में बीते चार सालों से रेडियोलॉजिस्ट का पद रिक्त है। वहीं, महिला अस्पताल में डेढ़ सालों से यह पद रिक्त है। जिसके चलते लाखों कीमत की मशीनें धूल फांक रही हैं। वहीं, स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल होने से मरीजों को आसपास के जनपदों में दौड़ लगानी पड़ती है।
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सुमेरपुर से आई गर्भवती मैना देवी ने बताया कि उन्होंने पिछली पांच जनवरी को प्राईवेट अल्ट्रासाउंड कराया था। तब 500 रुपये फीस देनी पड़ी थी। बताया कि इस बार निशुल्क जांच कराए जाने के लिए पंजीकरण कराया है। कहा कि अस्पताल में ही यह सुविधा मिलनी चाहिए।
कानपुर जनपद के मूसानगर से आई सुनीता पत्नी दिनेश ने पूछने पर बताया कि वह पांच महीने की गर्भवती हैं। पिछला अल्ट्रासाउंड पुखरायां में कराया था, जबकि इस बार यहां आईं हैं। कहा कि निशुल्क जांच के लिए पंजीकरण कराया है।
कानपुर जनपद के चितौली बरीपाल निवासी मरीज सदाप्यारी ने बताया कि करीब तीन माह से वह पेट की समस्या से परेशान हैं। दिसंबर 2023 में उसने कानपुर में अल्ट्रासाउंड कराया था। जिला अस्पताल में डॉ. प्रजापति का इलाज चल रहा है। कोई आराम नहीं मिल रहा, कहां कि दवा खाएं।
सुमेरपुर क्षेत्र निवासी कृष्ण कुमार ने बताया कि पेट की समस्या से वह परेशान हैं। अस्पताल दिखाने आए थे, लेकिन वही दवाएं देकर चलता कर दिया। चार साल से अल्ट्रासाउंड मशीन ठप है। कहा कि जांच न होने से बाहर महंगे दामों में जांच करानी पड़ती है।
सोनोलॉजिस्ट की तैनाती हुई थी। जिसे प्रशिक्षण के लिए भेजा गया था, लेकिन प्रशिक्षण में उसे अनफिट कर दिया गया है। जिसके चलते तैनाती नहीं हो सकी है। कहा कि गर्भवती महिलाओं की जांचें बाहर से कराकर उसका भुगतान कराया जाता है। जो महीने की चार तारीखों एक, नौ, 16 व 24 को कराई जाती है। कहा कि शुक्रवार को 26 महिलाओं के टोकन काटे गए हैं। पिछले माह 71 गर्भवती महिलाओं की निशुल्क जांचे कराई गईं थीं। - डॉ. फौजिया अंजुम नोमानी, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल
रेडियोलॉजिस्ट के लिए बराबर शासन से मांग की जा रही है। कहा कि 30 अप्रैल 2020 को रेडियोलॉजिस्ट का रिटायरमेंट होने के बाद से अब तक यह पद खाली है। तैनाती होते ही मशीनें चालू कराई जाएंगी। -डॉ. एसपी गुप्ता, सीएमएस, जिला पुरुष अस्पताल
जिले की राठ सीएचसी में तैनात एक डॉक्टर ने डिप्लोमा इन मेडिकल रेडियो डायग्नोसिस (डीएमआरडी) किया है। जहां पर वह सांठगांठ से लगातार तीन दिन यानी 72 घंटे ड्यूटी करता है और तीन दिन अवकाश पर रहता है। प्रशिक्षित चिकित्सक की तैनाती जिला अस्पताल में होनी चाहिए लेकिन उच्चाधिकारियों से सांठगांठ कर राठ में तैनाती ले रखी है। वहीं, तीन दिन वह झांसी में सेवाएं देेता है, जिससे रेडियोलॉजिस्ट होते हुए भी जिले की 12 लाख आबादी को इसके लिए भटकना पड़ रहा है। सीएमओ डॉ. गीतम सिंह का कहना है कि उन्हें जानकारी नहीं है कि उसने डीएमआरडी कर रखा है। कहा कि जिले में कुल पदों के सापेक्ष 33 फीसदी ही डॉक्टर हैं, जिनसेे काम चलाया जा रहा हैै।