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समरसता के प्रणेता थे नानाजी देशमुख : कुलगुरु
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फोटो 10 सीकेटीपी 11 संगोष्ठी में बोलते वक्ता व मंचासीन अतिथि। स्रोत: शिक्षक
चित्रकूट। भारत रत्न राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख का जीवन सेवा, स्वावलंबन और ग्राम स्वराज के आदर्शों को समर्पित था। उन्होंने ग्राम विकास को राष्ट्र विकास का आधार माना। यह बात महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में शनिवार को आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने कही।
शिक्षा विभाग, कला संकाय और नानाजी देशमुख शोध संस्थान जबलपुर द्वारा भारत रत्न राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख का ग्रामोदय विषय पर संगोष्ठी हुई। अध्यक्षता कुलगुरु प्रो. आलोक चौबे ने की, मुख्य अतिथि राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय छिंदवाड़ा के कुलगुरु प्रो. आईपी त्रिपाठी रहे। शुभारंभ मां सरस्वती और नानाजी की प्रतिमा पर माल्यार्पण व दीप प्रज्जवलन से हुआ।
विषय स्थापना में कला संकाय अधिष्ठाता प्रो. कपिल देव मिश्रा ने कहा कि नानाजी ने शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वावलंबन को जोड़कर ग्राम विकास का मॉडल दिया। चित्रकूट में उनके प्रयास स्थानीय संसाधनों से आत्मनिर्भरता के उदाहरण हैं। मुख्य अतिथि प्रो. त्रिपाठी ने नानाजी के विचारों की प्रासंगिकता बताई। पूर्व कुलगुरु प्रो. भरत मिश्रा समेत कई शिक्षकों ने विचार रखे। विद्यार्थियों ने नानाजी के जीवन पर लघु नाटिका प्रस्तुत की। कुलगुरु प्रो. चौबे ने शिक्षा को गांवों से जोड़ने पर जोर दिया। संचालन प्रो. ललित कुमार सिंह ने किया।
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शिक्षा विभाग, कला संकाय और नानाजी देशमुख शोध संस्थान जबलपुर द्वारा भारत रत्न राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख का ग्रामोदय विषय पर संगोष्ठी हुई। अध्यक्षता कुलगुरु प्रो. आलोक चौबे ने की, मुख्य अतिथि राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय छिंदवाड़ा के कुलगुरु प्रो. आईपी त्रिपाठी रहे। शुभारंभ मां सरस्वती और नानाजी की प्रतिमा पर माल्यार्पण व दीप प्रज्जवलन से हुआ।
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विषय स्थापना में कला संकाय अधिष्ठाता प्रो. कपिल देव मिश्रा ने कहा कि नानाजी ने शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वावलंबन को जोड़कर ग्राम विकास का मॉडल दिया। चित्रकूट में उनके प्रयास स्थानीय संसाधनों से आत्मनिर्भरता के उदाहरण हैं। मुख्य अतिथि प्रो. त्रिपाठी ने नानाजी के विचारों की प्रासंगिकता बताई। पूर्व कुलगुरु प्रो. भरत मिश्रा समेत कई शिक्षकों ने विचार रखे। विद्यार्थियों ने नानाजी के जीवन पर लघु नाटिका प्रस्तुत की। कुलगुरु प्रो. चौबे ने शिक्षा को गांवों से जोड़ने पर जोर दिया। संचालन प्रो. ललित कुमार सिंह ने किया।
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