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बच्चों को नहीं लगा टीका, स्कूल भेजने में लगता डर
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हमीरपुर। कोरोना संक्रमण के कारण दो वर्ष बाद अब नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो गया है। ऐसे में 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की अभिभावकों को फिक्र है। उनका कहना है कि अभी तक हमारे लाडले को कोरोना का टीका नहीं लगा है। ऐसे में उसे स्कूल भेजने में डर लगा रहा है।
माताओं ने किशोरों की तरह बच्चों का भी टीकाकरण कराए जाने की अपील सरकार से की है। दो वर्ष कोरोना संक्रमण के खतरे के बीच गुजर गया। इसका सबसे ज्यादा असर पढ़ाई पर पड़ा था। दो वर्ष तक स्कूलों में पढ़ाई पूरी तरह चौपट रही। कोरोना संक्रमण से जंग जीतने के लिए सरकार ने टीकाकरण शुरू किया। बुजुर्गों से लेकर किशोरों तक का टीकाकरण कराया जा रहा है, पर अभी तक छोटे बच्चों के टीकाकरण की व्यवस्था नहीं हो सकी है। आलम यह है कि दो वर्ष बाद नया शिक्षा सत्र शुरू हो गया है। ऐसे में स्कूलों में प्रवेश कराने से पहले अभिभावकों को बच्चों के टीकाकरण न होने से चिंता सता रही हैं। अभिभावकों के मुताबिक उन्हें बच्चों को स्कूल भेजने में संकोच नहीं है। अगर टीकाकरण हो जाए तो वह निडर होकर बच्चों को स्कूल भेज सकेंगे।
धर्मेंद्र खरे का कहना है कि कोरोना से बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ा है। सरकार शिक्षा के साथ बच्चों का भी टीकाकरण करा दें तो सारी चिंताएं दूर हो जाएंगी। नीरज कश्यप ने कहा कि बच्चों का स्कूल जाना बहुत जरूरी है। नए शिक्षा सत्र के साथ वैक्सीन लग जाए तो बच्चों को स्कूल भेजने में कोई चिंता नहीं रही। सुफिया का कहना है कि यदि हमारी तरह बच्चों का भी वैक्सीनेशन हो जाए तो कोरोना का डर खत्म हो जाएगा। इसके बाद निडर होकर बच्चों को स्कूल भेज सकेंगे। रेनू धुरिया ने कहा कि नए शिक्षा सत्र में बच्चों को स्कूल भेजना चाहते हैं। यदि बड़ों व किशोरों के तहर छोटे बच्चों का भी वैक्सीनेशन हो जाए, तो अभिभावकों के मन से बच्चों के प्रति डर खत्म हो जाएगा।
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माताओं ने किशोरों की तरह बच्चों का भी टीकाकरण कराए जाने की अपील सरकार से की है। दो वर्ष कोरोना संक्रमण के खतरे के बीच गुजर गया। इसका सबसे ज्यादा असर पढ़ाई पर पड़ा था। दो वर्ष तक स्कूलों में पढ़ाई पूरी तरह चौपट रही। कोरोना संक्रमण से जंग जीतने के लिए सरकार ने टीकाकरण शुरू किया। बुजुर्गों से लेकर किशोरों तक का टीकाकरण कराया जा रहा है, पर अभी तक छोटे बच्चों के टीकाकरण की व्यवस्था नहीं हो सकी है। आलम यह है कि दो वर्ष बाद नया शिक्षा सत्र शुरू हो गया है। ऐसे में स्कूलों में प्रवेश कराने से पहले अभिभावकों को बच्चों के टीकाकरण न होने से चिंता सता रही हैं। अभिभावकों के मुताबिक उन्हें बच्चों को स्कूल भेजने में संकोच नहीं है। अगर टीकाकरण हो जाए तो वह निडर होकर बच्चों को स्कूल भेज सकेंगे।
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धर्मेंद्र खरे का कहना है कि कोरोना से बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ा है। सरकार शिक्षा के साथ बच्चों का भी टीकाकरण करा दें तो सारी चिंताएं दूर हो जाएंगी। नीरज कश्यप ने कहा कि बच्चों का स्कूल जाना बहुत जरूरी है। नए शिक्षा सत्र के साथ वैक्सीन लग जाए तो बच्चों को स्कूल भेजने में कोई चिंता नहीं रही। सुफिया का कहना है कि यदि हमारी तरह बच्चों का भी वैक्सीनेशन हो जाए तो कोरोना का डर खत्म हो जाएगा। इसके बाद निडर होकर बच्चों को स्कूल भेज सकेंगे। रेनू धुरिया ने कहा कि नए शिक्षा सत्र में बच्चों को स्कूल भेजना चाहते हैं। यदि बड़ों व किशोरों के तहर छोटे बच्चों का भी वैक्सीनेशन हो जाए, तो अभिभावकों के मन से बच्चों के प्रति डर खत्म हो जाएगा।
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