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चंदेलकालीन रामजानकी मंदिर का होगा कायाकल्प
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खंडेह गांव में चंदेलकालीन श्री राम जानकी मंदिर। संवाद
- फोटो : HAMIRPUR
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हमीरपुर। करीब एक एकड़ क्षेत्रफल में फैले सैकड़ों साल पुराने चंदेलकालीन शैली में निर्मित रामजानकी और महादेव मंदिर समेत अन्य धरोहरों का कायाकल्प होगा। शासन ने मंदिर को चमकाने के लिए फिलहाल 50 लाख की धनराशि अवमुक्त कर दी है।
मौदहा विकासखंड के करीब दस हजार की आबादी वाले खंडेह गांव के ऐतिहासिक रामजानकी मंदिर बुंदेलखंड सहित आसपास के क्षेत्रों में विख्यात है। ये मंदिर चंदेलकालीन शैली में निर्मित है। कानपुर-बांदा रेलमार्ग पर अकौना रेलवे स्टेशन खंडेह ग्राम का स्टेशन है। यहां से खंडेह गांव तक पक्का मार्ग भी बना है। स्टेशन से दर्शनीय स्थल करीब एक किलोमीटर दूर है। सैकड़ों साल पुराना मंदिर तत्कालीन जमींदार चंदीदीन दुबे ने बनवाया था। इसमें राम-लक्ष्मण और सीता की अष्टधातु की बहुमूल्य मूर्तियां विराजमान हैं। मंदिर निर्माण में कई कथानक भी जुड़े हैं। इनमें संपूर्ण महाभारत, रामायण व कृष्ण लीला के प्रसंग चित्रित देख लोग हतप्रभ हो जाते हैं।
पुरातत्व विभाग झांसी के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ.एसके दुबे ने बताया कि मंदिर के चारों ओर बाउंड्रीवाल बनवाई जाएगी। बांदा के कालिंजर किले से लेकर खंडेह तक साइन बोर्ड लगवाए जा चुके हैं। मंदिर के प्रद्युम्न कुमार उर्फ लालू दुबे ने बताया कि पर्यटन विभाग ने खंडेह के मंदिरों और तालाबों को विकसित करने के लिए पिछले साल कई करोड़ की कार्ययोजना शासन को भेजी थी। अभी मुख्यमंत्री पर्यटन संवर्धन योजना के तहत 50 लाख की धनराशि अवमुक्त हुई है। बताया कि मंदिरों से जुड़े तालाबों के सुंदरीकरण कराकर इसे पर्यटन स्थल बनाए जाने से लोगों को फायदा होगा। कहा कि चालू वित्तीय वर्ष में धनराशि मिलने की संभावना है।
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722.45 लाख की लागत से मंदिर में होंगे पर्यटन सबंधी कार्य
चंदेलकालीन शैली में बने रामजानकी मंदिर स्थल पर पर्यटन संबंधी विकास कार्यों के लिए पिछले साल 405.09 लाख रुपये की लागत से कार्य योजना पर्यटन विभाग ने तैयार की थी। वहीं, महादेव मंदिर के लिए 317.36 लाख रुपये की योजना तैयार हुई थी। ये कार्य योजनाएं उप्र कॉरपोरेशन लिमिटेड बांदा ने बनाई थी। उपनिदेशक पर्यटन झांसी आरके रावत ने बताया कि शासन से चालू वित्तीय वर्ष में बजट मिलने की संभावना है।
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मौदहा विकासखंड के करीब दस हजार की आबादी वाले खंडेह गांव के ऐतिहासिक रामजानकी मंदिर बुंदेलखंड सहित आसपास के क्षेत्रों में विख्यात है। ये मंदिर चंदेलकालीन शैली में निर्मित है। कानपुर-बांदा रेलमार्ग पर अकौना रेलवे स्टेशन खंडेह ग्राम का स्टेशन है। यहां से खंडेह गांव तक पक्का मार्ग भी बना है। स्टेशन से दर्शनीय स्थल करीब एक किलोमीटर दूर है। सैकड़ों साल पुराना मंदिर तत्कालीन जमींदार चंदीदीन दुबे ने बनवाया था। इसमें राम-लक्ष्मण और सीता की अष्टधातु की बहुमूल्य मूर्तियां विराजमान हैं। मंदिर निर्माण में कई कथानक भी जुड़े हैं। इनमें संपूर्ण महाभारत, रामायण व कृष्ण लीला के प्रसंग चित्रित देख लोग हतप्रभ हो जाते हैं।
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पुरातत्व विभाग झांसी के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ.एसके दुबे ने बताया कि मंदिर के चारों ओर बाउंड्रीवाल बनवाई जाएगी। बांदा के कालिंजर किले से लेकर खंडेह तक साइन बोर्ड लगवाए जा चुके हैं। मंदिर के प्रद्युम्न कुमार उर्फ लालू दुबे ने बताया कि पर्यटन विभाग ने खंडेह के मंदिरों और तालाबों को विकसित करने के लिए पिछले साल कई करोड़ की कार्ययोजना शासन को भेजी थी। अभी मुख्यमंत्री पर्यटन संवर्धन योजना के तहत 50 लाख की धनराशि अवमुक्त हुई है। बताया कि मंदिरों से जुड़े तालाबों के सुंदरीकरण कराकर इसे पर्यटन स्थल बनाए जाने से लोगों को फायदा होगा। कहा कि चालू वित्तीय वर्ष में धनराशि मिलने की संभावना है।
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722.45 लाख की लागत से मंदिर में होंगे पर्यटन सबंधी कार्य
चंदेलकालीन शैली में बने रामजानकी मंदिर स्थल पर पर्यटन संबंधी विकास कार्यों के लिए पिछले साल 405.09 लाख रुपये की लागत से कार्य योजना पर्यटन विभाग ने तैयार की थी। वहीं, महादेव मंदिर के लिए 317.36 लाख रुपये की योजना तैयार हुई थी। ये कार्य योजनाएं उप्र कॉरपोरेशन लिमिटेड बांदा ने बनाई थी। उपनिदेशक पर्यटन झांसी आरके रावत ने बताया कि शासन से चालू वित्तीय वर्ष में बजट मिलने की संभावना है।