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संस्कृति और सभ्यता से ही देश का विकास सभ्यता
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कुछेछा के राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में बोलती अदिति गुप्ता।
- फोटो : HAMIRPUR
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हमीरपुर। संस्कृति और सभ्यता के पथ पर चलकर ही देश का विकास होता है। यह बात कौशांबी के महामाया राजकीय महाविद्यालय के प्राध्यापक डा. पवन कुमार ने भारतीय संस्कृति का पाश्चात्यीकरण विषय पर हुई संगोष्ठी के दौरान कही।
शुक्रवार को राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में भारतीय संस्कृति का पाश्चात्यीकरण युवा विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि जिलाधिकारी डा. चंद्रभूषण ने किया। उन्होंने छात्रों को भारतीय संस्कृति के बारे में विस्तार से जानकारी दी। प्राध्यापक डा .पवन कुमार यादव ने कहा कि कुछ लोग संस्कृति व सभ्यता को एक दूसरे का पूरक बताते हैं। जबकि ऐसा नहीं है। अगर संस्कृति साफ्टवेयर है तो सभ्यता हार्डवेयर है। कहा कि सभ्यता हमारे आदर्शों में निहित है। जबकि संस्कृति हमारे अंतकरण में निहित होती है।
पूर्व प्राचार्य डा. सत्येंद्र सिंह ने छात्रों से कहा कि परिश्रम ही सफलता की एक मात्र कुंजी है। प्राचार्या डा. वंदना कुमारी ने पाश्चात्यीकरण के सकारात्मक एवं नकारात्मक पक्षों पर प्रकाश डालते हुए शोधार्थियों, प्राध्यापकोें एवं छात्रों को अपने विचार व्यक्त कर आमंत्रित किया। राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य डा. राजकुमार ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम में डा. आनंद कुमार, डा.जय सिंह, डा. ज्ञानेंद्र सिंह, डा. स्वामी प्रसाद का योगदान रहा। डा. आलोक कुमार ने सभी का आभार प्रकट किया।
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शुक्रवार को राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में भारतीय संस्कृति का पाश्चात्यीकरण युवा विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि जिलाधिकारी डा. चंद्रभूषण ने किया। उन्होंने छात्रों को भारतीय संस्कृति के बारे में विस्तार से जानकारी दी। प्राध्यापक डा .पवन कुमार यादव ने कहा कि कुछ लोग संस्कृति व सभ्यता को एक दूसरे का पूरक बताते हैं। जबकि ऐसा नहीं है। अगर संस्कृति साफ्टवेयर है तो सभ्यता हार्डवेयर है। कहा कि सभ्यता हमारे आदर्शों में निहित है। जबकि संस्कृति हमारे अंतकरण में निहित होती है।
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पूर्व प्राचार्य डा. सत्येंद्र सिंह ने छात्रों से कहा कि परिश्रम ही सफलता की एक मात्र कुंजी है। प्राचार्या डा. वंदना कुमारी ने पाश्चात्यीकरण के सकारात्मक एवं नकारात्मक पक्षों पर प्रकाश डालते हुए शोधार्थियों, प्राध्यापकोें एवं छात्रों को अपने विचार व्यक्त कर आमंत्रित किया। राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य डा. राजकुमार ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम में डा. आनंद कुमार, डा.जय सिंह, डा. ज्ञानेंद्र सिंह, डा. स्वामी प्रसाद का योगदान रहा। डा. आलोक कुमार ने सभी का आभार प्रकट किया।
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