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सूखा दूर, लहलहाई उम्मीद की फसल
ब्यूरो अमर उजाला, हमीरपुर
Updated Tue, 09 Aug 2016 12:27 AM IST
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धान की पौध लगाते
- फोटो : अमर उजाला
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बीते कई वर्षों से बुंदेलखंड के किसान सूखा, ओला व अतिवृष्टि से जूझते रहे। लेकिन इस बार औसत से डेढ़ गुना अधिक बारिश हो जाने से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। जो फसलें बोई गई हैं। वह उनकी उम्मींदों की फसलें साबित हाेंगी। यह विश्वास जताते हुए इलाके के किसानों ने अपने अनुभव अमर उजाला प्रतिनिधि के साथ साझा किए।
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केस नंबर एकः रागौल गांव निवासी किसान महेश तिल की फसल बटाई पर बोए है। पूरे क्षेत्र में यह फसल हरियाली बनकर छाई हुई है। उसका कहना है कि बीते वर्ष इसी खेत में लाही की फसल बोई थी। जिसकी पैदावार बारिश नहीं होने से न के बराबर हुई थी। तब बीज, खाद और मजदूरी तक नहीं निकली थी। इससे पहले भी बीते दो वर्षों तक फसलें बर्बाद होने से परिवार चलाना मुश्किल हो गया था। उस पर सूखे की मार से आर्थिक स्थिति लड़खड़ा गई। इस वर्ष समय से अच्छी बारिश होने से बुआई भी अच्छी हुई। उसने अपने खेत की तरफ इशारा करते हुए कहा कि यह फसल जिस तरह लहलहा रही है। यह उनकी उम्मीदों पर खरी उतरी तो पुराने दु:खों को भूलकर वह सुख से परिवार चला सकेंगे।
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केस नंबर दोः मकरांव गांव निवासी किसान दिनेशचंद्र यादव का निजी नलकूप है। उसके बीस बीघा खेत हैं। बीते दो सालों से नलकूप से सही पानी भी नहीं निकला और बारिश ने भी दगा दिया। जिससे फसलें न के बराबर हुई। मजदूरी और खाद बीज भी वापस नहीं आ सका। यहां तक कि वह कर्जदार हो गया। उसने बताया कि वह अपने नलकूप के एक हिस्से में बाग लगाए है। जिसमें अमरूद के पेड़ दो साल के हो गए हैं। बांकी हिस्से में मूंग, अरहर की खेती किए है। यह फसलें उनकी नई उम्मीदों का सपना संजोकर आई हैं। यदि सही सलामत इन्हें घर ला सका तो उसके जीवन में नई उम्मीदें जागेंगी। परिवार भी ठीक चलेगा। बीते वर्ष के सूखे ने उन्हें बर्बाद कर दिया था। रबी की फसल में कुछ भी नहीं हुआ। उरद, मूंग सूख गई। गेहूं की कुछ फसल नलकूप के सहारे बोई, तो वह फसल में लगने वाली लागत भी नहीं निकाल पाया। इस बार बारिश के कारण नलकूप भी पानी दे रहा है।
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केस नंबर तीनः सहुरापुर गांव निवासी बाबूराम के पास 22 बीघे खेत हैं। पांच बेटियां, दो बेटे हैं। पति-पत्नी सहित नौ लोगों का परिवार है। चार सालों से ओला, सूखा व अतिवृष्टि से परेशान हैं। हमीरपुर स्थित यूनियन बैंक से तीन लाख रुपये कर्ज लिया जिसे अदा नहीं कर सके हैं। इस वर्ष अपने खेतों में तिल, मूंग व अरहर बोई है। पानी अधिक होने से एक खेत में तिल की फसल कमजोर हो गई है। लेकिन अन्य फसलों ने नया जीवन जीने की उम्मीदें जगा दी हैं। उसने भगवान का शुक्रिया अदा किया कि कई सालों बाद समय पर हुई यह वर्षा नई उम्मीद लेकर आई है। कुल मिलाकर पूरे क्षेत्र का किसान अपनी हरी भरी फसलें देखकर फूला नहीं समा रहा है।