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हमीरपुरः आज लगेगा जीजा-साली का मेला, लेते मां का आशीर्वाद
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मां श्यामलादेवी मंदिर में स्थापित माता रानी के एतिहासिक स्वरूप
- फोटो : HAMIRPUR
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राठ। मौजा स्थित पांच सौ वर्ष पुराने मां श्यामला देवी मंदिर में हर साल गुरु पूर्णिमा को जीजा-साली का मेला लगता है। मान्यता है कि मां श्यामला सुखी दांपत्य का आशीर्वाद देती हैं।
बताया जाता है कि पांच सौ वर्ष पूर्व राजस्थान धौलपुर के ग्राम बुधौल निवासी पं. श्यामलाल बुधौलिया अपनी ननिहाल बड़ा गांव में जाकर बस गए। गांव से पांच सौ मीटर दूर जंगल में उन्होंने त्रिमूर्ति वैष्णव देवी की स्थापना कराई। उस समय यह मंदिर श्यामले के नाम से जाना जाता था। बाद में इसका नाम मां श्यामला देवी मंदिर पड़ा। मां श्यामला देवी मंदिर में आषाढ़ मास की गुरु पूर्णिमा पर भव्य मेले का आयोजन किया जाता है।
सरसई गांव के प्रमोद मिश्रा, जगदीश त्रिपाठी, लालाराम मिश्रा ने बताया कि इस मेले के दिन गांव में दामादों को बुलाया जाता था। वह साली के साथ मेला जाते थे। इस कारण मेले को जीजा-साली का मेला कहा जाता था। मान्यता है कि माता श्यामला देवी से मन्नत मांगने पर लोगों की गृहस्थी बस जाती है। विवाह के बाद माता रानी का आशीर्वाद लेने से दांपत्य जीवन सुखी रहता है। मंदिर के पुजारी मनोज मिश्रा ने बताया कि मां श्यामला देवी पर पान बतासा विशेष रूप से चढ़ाया जाता हैं।
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बताया जाता है कि पांच सौ वर्ष पूर्व राजस्थान धौलपुर के ग्राम बुधौल निवासी पं. श्यामलाल बुधौलिया अपनी ननिहाल बड़ा गांव में जाकर बस गए। गांव से पांच सौ मीटर दूर जंगल में उन्होंने त्रिमूर्ति वैष्णव देवी की स्थापना कराई। उस समय यह मंदिर श्यामले के नाम से जाना जाता था। बाद में इसका नाम मां श्यामला देवी मंदिर पड़ा। मां श्यामला देवी मंदिर में आषाढ़ मास की गुरु पूर्णिमा पर भव्य मेले का आयोजन किया जाता है।
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सरसई गांव के प्रमोद मिश्रा, जगदीश त्रिपाठी, लालाराम मिश्रा ने बताया कि इस मेले के दिन गांव में दामादों को बुलाया जाता था। वह साली के साथ मेला जाते थे। इस कारण मेले को जीजा-साली का मेला कहा जाता था। मान्यता है कि माता श्यामला देवी से मन्नत मांगने पर लोगों की गृहस्थी बस जाती है। विवाह के बाद माता रानी का आशीर्वाद लेने से दांपत्य जीवन सुखी रहता है। मंदिर के पुजारी मनोज मिश्रा ने बताया कि मां श्यामला देवी पर पान बतासा विशेष रूप से चढ़ाया जाता हैं।
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