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महिलाओं ने खुली दुकानें बंद कराईं
ब्यूरो, अमर उजाला/हमीरपुर
Updated Mon, 03 Aug 2015 12:15 AM IST
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कस्बे में 25 जुलाई को हुए बलवे के बाद लोगों के आक्रोश की आग ठंडी नहीं हो
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रही है। सपा नेताओं ने कस्बे की कुछ दुकानों को जबरन खुलवा दिया जिसकी
जानकारी धरने पर बैठीं महिलाओं को हुई तो वे भड़क गई और जबरन दुकानें बंद
करा दीं।
ज्ञात हो कि तीन दिन से ग्रामीणों पर दर्ज मुकदमा वापसी व गिरफ्तार लोगों को छोड़ने के मांग पर कस्बे के पाथादेवी मंदिर के पास महिलाएं धरने पर बैठी हैं।
रविवार शाम भाजपा की ममता अनुरागी, निशा शर्मा व फूलसिंह नेक्या धरने में शामिल हुईं। तभी धरने में बैठी महिलाओं को सूचना मिली कि सपा नेताओं ने कस्बे की कुछ दुकानों को जबरन खुलवा दिया है।
जिस पर धरने पर बैठी सभी महिलाएं भड़क गई। धरने में मौजूद महिलाएं हाथों में तख्तियां लेकर पुलिस प्रशासन मुर्दाबाद, हमें न्याय चाहिए के नारे लगाते हुए खुली दुकानों को बंद कराने निकल पड़ी।
सबसे पहले बस स्टैंड में खुली समोसा की दुकान बंद कराई। फिर थाना तिराहे होते हुए बाजार के पास खुली करीब 4-5 दुकानों को बंद कराया। महिलाओं को देखकर पुलिस हरकत में तो आई, लेकिन एक भी महिला पुलिस कर्मी न होने के कारण मूकदर्शक बनी रही।
इसके बाद महिलाओं को आता देख दुकानदारों ने पहले से ही अपनी दुकानें बंद कर दी और वहां से चले गए। इसके बाद सभी महिलाएं वापस अपने धरने में बैठ गई।
ज्ञात हो कि तीन दिन से ग्रामीणों पर दर्ज मुकदमा वापसी व गिरफ्तार लोगों को छोड़ने के मांग पर कस्बे के पाथादेवी मंदिर के पास महिलाएं धरने पर बैठी हैं।
रविवार शाम भाजपा की ममता अनुरागी, निशा शर्मा व फूलसिंह नेक्या धरने में शामिल हुईं। तभी धरने में बैठी महिलाओं को सूचना मिली कि सपा नेताओं ने कस्बे की कुछ दुकानों को जबरन खुलवा दिया है।
जिस पर धरने पर बैठी सभी महिलाएं भड़क गई। धरने में मौजूद महिलाएं हाथों में तख्तियां लेकर पुलिस प्रशासन मुर्दाबाद, हमें न्याय चाहिए के नारे लगाते हुए खुली दुकानों को बंद कराने निकल पड़ी।
सबसे पहले बस स्टैंड में खुली समोसा की दुकान बंद कराई। फिर थाना तिराहे होते हुए बाजार के पास खुली करीब 4-5 दुकानों को बंद कराया। महिलाओं को देखकर पुलिस हरकत में तो आई, लेकिन एक भी महिला पुलिस कर्मी न होने के कारण मूकदर्शक बनी रही।
इसके बाद महिलाओं को आता देख दुकानदारों ने पहले से ही अपनी दुकानें बंद कर दी और वहां से चले गए। इसके बाद सभी महिलाएं वापस अपने धरने में बैठ गई।