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ग्रामीणों में प्रधानी को लेकर उत्साह
ब्यूरो, अमर उजाला/हमीरपुर
Updated Fri, 15 May 2015 12:23 AM IST
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विकासखंड क्षेत्र में जिन छह ग्रामों को ग्राम पंचायत का दर्जा मिला है
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उनमें कस्बे से जुड़ा सिचौलीपुरवा भी शामिल हैं। अस्तित्व में आई इस ग्राम
पंचायत के लोग विकास कार्यों को लेकर बेहद उत्साहित हैं। प्रधान पद के लिए
तमाम इच्छुक लोग अभी से जुट गए हैं। वहीं आम आदमी भी बेहद उत्साहित है कि
अब उनके गांव में विकास की गंगा बहेगी और स्वयं वह अपने निर्णय ले सकेंगे।
ग्राम पंचायत सिचौलीपुरवा की पड़ताल की गई। जहां अब तक विकास के नाम पर चंद रास्ते ही बने हैं और यहां बने एक बड़े नाले की कभी सफाई नहीं कराई गई है जो गंदगी से बजबजा रहा है और इसके आसपास रहने वाले लोग परेशान हैं। हाइवे के पश्चिम की ओर इस गांव में तमाम बाहरी लोगों की आबादी बढ़ती जा रही है।
पंचायत सचिव प्रेमनारायन कहते है कि 1350 लोगों की आबादी वाले इस गांव में विधानसभा चुनाव की मतदाता सूची के अनुसार 800 मतदाता हैं। लेकिन आगामी पंचायत चुनाव के लिए मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण व इन्हें नए सिरे से बनाने का अभियान 15 मई से 15 अगस्त तक चलेगा। इसी दौरान इस गांव की अलग से मतदाता सूची तैयार की जाएगी।
कभी भेदभाव नहीं किया
रागौल से संबद्ध रहे सिचौलीपुरवा में अभी प्रधान नूर अली है। उन्होंने बताया कि सिचौलीपुरवा ने अब इससे अलग होकर ग्राम पंचायत का दर्जा प्राप्त कर लिया है। उनका कहना है कि उनके प्रधानी कार्यकाल में इस गांव में एक पुलिया का निर्माण सहित 300-400 मीटर खड़ंजे का निर्माण कराया जा चुका है। रागौल खुद एक बड़ा गांव है जहां के लिए विकास कार्यों के लिए ही धन नहीं मुहैया हो पाता है। अलग ग्राम पंचायत बनने से अब इस गांव का विकास होगा। गांव के साथ की सौतेलापन का व्यवहार नहीं किया है।
कभी नहीं हुई नाले की सफाई
गांव सिचौलीपुरवा निवासी फत्ते खां कहते हैं कि नई ग्रामसभा के अस्तित्व में आने से पूरे गांव में बेहद प्रसन्नता है और हालत यह है कि आगामी पंचायत चुनाव में प्रधान बनने के लिए कई लोग अभी से प्रयास में जुट गए हैं। उन्होंने गांव का दर्द बताते हुए कहा कि उनके मकान के सामने कई वर्षो पूर्व जिस नाले का निर्माण हुआ था। उसमें कभी सफाई ही नहीं हुई, नाला गंदगी व कीचड़ से बजबजा रहा है। यहां रहने वाले लोग इसकी बदबू व मच्छरों की भरमार से बेहाल हैं।
सिर्फ विद्यालय में ही हो रही सफाई
गांव सिचौलीपुरवा निवासी लल्लू दुबे का कहना है कि यहां की गलियां आज भी कच्ची हैं। बारिश होते ही निकलना मुश्किल हो जाता है। सफाई के नाम पर सिर्फ विद्यालय के आसपास का इलाका चकाचक रहता है। नालियों व गलियों की सफाई नहीं होती। नई ग्राम पंचायत के अस्तित्व में आने से यदि कोई गरीब व्यक्ति प्रधान बनता है तो गांव में विकास उम्मीद के मुताबिक होगा।
विकास का नए सिरे से खींचेंगे खाका
गांव के बबलू खान कहते हैं कि उनका गांव अब अपना प्रधान चुनेगा। लेकिन प्रधान के सामने कई समस्याएं खड़ी होंगी। फिर भी उम्मीद है कि इन समस्याओं के लिए अच्छा प्रधान चुने जाने पर विकास के लिए सक्षम हो जाएंगे। हालांकि इस समय गांव में बिजली के खंभे नहीं हैं। नलों से सुबह शाम तो कुछ पानी मिल जाता है। गांव में सफाई सहित बिजली व्यवस्था के लिए नए खंभे व ट्रांसफार्मर की आवश्यकता है। इस समय एक ही खंभे से 100 मीटर दूर तक लोगों के कनेक्शन के तार लटक रहे हैं। गलियां कच्ची है, जिनका निर्माण होना बेहद आवश्यक है।
ग्राम पंचायत सिचौलीपुरवा की पड़ताल की गई। जहां अब तक विकास के नाम पर चंद रास्ते ही बने हैं और यहां बने एक बड़े नाले की कभी सफाई नहीं कराई गई है जो गंदगी से बजबजा रहा है और इसके आसपास रहने वाले लोग परेशान हैं। हाइवे के पश्चिम की ओर इस गांव में तमाम बाहरी लोगों की आबादी बढ़ती जा रही है।
पंचायत सचिव प्रेमनारायन कहते है कि 1350 लोगों की आबादी वाले इस गांव में विधानसभा चुनाव की मतदाता सूची के अनुसार 800 मतदाता हैं। लेकिन आगामी पंचायत चुनाव के लिए मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण व इन्हें नए सिरे से बनाने का अभियान 15 मई से 15 अगस्त तक चलेगा। इसी दौरान इस गांव की अलग से मतदाता सूची तैयार की जाएगी।
कभी भेदभाव नहीं किया
रागौल से संबद्ध रहे सिचौलीपुरवा में अभी प्रधान नूर अली है। उन्होंने बताया कि सिचौलीपुरवा ने अब इससे अलग होकर ग्राम पंचायत का दर्जा प्राप्त कर लिया है। उनका कहना है कि उनके प्रधानी कार्यकाल में इस गांव में एक पुलिया का निर्माण सहित 300-400 मीटर खड़ंजे का निर्माण कराया जा चुका है। रागौल खुद एक बड़ा गांव है जहां के लिए विकास कार्यों के लिए ही धन नहीं मुहैया हो पाता है। अलग ग्राम पंचायत बनने से अब इस गांव का विकास होगा। गांव के साथ की सौतेलापन का व्यवहार नहीं किया है।
कभी नहीं हुई नाले की सफाई
गांव सिचौलीपुरवा निवासी फत्ते खां कहते हैं कि नई ग्रामसभा के अस्तित्व में आने से पूरे गांव में बेहद प्रसन्नता है और हालत यह है कि आगामी पंचायत चुनाव में प्रधान बनने के लिए कई लोग अभी से प्रयास में जुट गए हैं। उन्होंने गांव का दर्द बताते हुए कहा कि उनके मकान के सामने कई वर्षो पूर्व जिस नाले का निर्माण हुआ था। उसमें कभी सफाई ही नहीं हुई, नाला गंदगी व कीचड़ से बजबजा रहा है। यहां रहने वाले लोग इसकी बदबू व मच्छरों की भरमार से बेहाल हैं।
सिर्फ विद्यालय में ही हो रही सफाई
गांव सिचौलीपुरवा निवासी लल्लू दुबे का कहना है कि यहां की गलियां आज भी कच्ची हैं। बारिश होते ही निकलना मुश्किल हो जाता है। सफाई के नाम पर सिर्फ विद्यालय के आसपास का इलाका चकाचक रहता है। नालियों व गलियों की सफाई नहीं होती। नई ग्राम पंचायत के अस्तित्व में आने से यदि कोई गरीब व्यक्ति प्रधान बनता है तो गांव में विकास उम्मीद के मुताबिक होगा।
विकास का नए सिरे से खींचेंगे खाका
गांव के बबलू खान कहते हैं कि उनका गांव अब अपना प्रधान चुनेगा। लेकिन प्रधान के सामने कई समस्याएं खड़ी होंगी। फिर भी उम्मीद है कि इन समस्याओं के लिए अच्छा प्रधान चुने जाने पर विकास के लिए सक्षम हो जाएंगे। हालांकि इस समय गांव में बिजली के खंभे नहीं हैं। नलों से सुबह शाम तो कुछ पानी मिल जाता है। गांव में सफाई सहित बिजली व्यवस्था के लिए नए खंभे व ट्रांसफार्मर की आवश्यकता है। इस समय एक ही खंभे से 100 मीटर दूर तक लोगों के कनेक्शन के तार लटक रहे हैं। गलियां कच्ची है, जिनका निर्माण होना बेहद आवश्यक है।