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बरसात के पानी से खेतों में खड़ीं फसलें जलमग्न
ब्यूरो, अमर उजाला/हमीरपुर
Updated Wed, 12 Aug 2015 12:15 AM IST
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होने से फसलों के मुरझाने पर किसानों में बेचैनी देखी गई, वहीं ज्वार के
जहरीली होने पर इसे खाने से मवेशी काल के गाल में समा रहे थे। बीती रात ऐसी
झमाझम बारिश हुई तो खेतों में खड़ी फसलें जलमग्न हो गईं। ऐसे में अब किसान
फसलों के सड़ने की संभावना बढने से चिंतित हो रहे हैं।
रात में हुई मूसलाधार बारिश ने लोगों को चौकन्ना कर दिया। नालों व नालियों से पानी की निकासी में बाधा पड़ी तो रास्तों से होकर पानी मकानों के अंदर घुस गया।
साथ ही खपरैल वाले मकानों में पानी टपकने लगा। ऐसे में लोग जहां खपरैल ठीक करते दिखे तो ज्यादातर लोगों ने बांस के सहारे नालों व नालियों की सफाई कर कचरा हटा पानी निकालने में जुटे रहे।
उधर भोर में ही तमाम किसानों ने खेतों की ओर रुख कर दिया। फिलहाल खेतों में चारों तरफ पानी ही पानी नजर आया। वहीं पौथिया के सुरेश सचान ने बताया कि उनके अमरूद के बाग में पानी दिख रहा है।
हालांकि खेत में खड़ी तिल का पानी सूखने को है। कहा कि फसल के लिए पानी संजीवनी की तरह है। स्वासा निवासी नत्थू का खेत भी डूबा है।
उसने बताया कि चार बीघे में तिल की फसल लहलहा रही थी, लेकिन अब इसके बचने की संभावना कम है। कहने लगा कि मेड़ होने से खेत का पानी बाहर निकालने की गुंजाइश नहीं है।
साथ ही अगल-बगल के खेतों में भी फसलें खड़ी होने से वह लोग पानी नहीं निकालने देंगे। इसी तरह छोटे प्रजापति ने बताया कि उसने दो बीघे में तिल बोई है जो पानी में डूब गई है।
रात में हुई मूसलाधार बारिश ने लोगों को चौकन्ना कर दिया। नालों व नालियों से पानी की निकासी में बाधा पड़ी तो रास्तों से होकर पानी मकानों के अंदर घुस गया।
साथ ही खपरैल वाले मकानों में पानी टपकने लगा। ऐसे में लोग जहां खपरैल ठीक करते दिखे तो ज्यादातर लोगों ने बांस के सहारे नालों व नालियों की सफाई कर कचरा हटा पानी निकालने में जुटे रहे।
उधर भोर में ही तमाम किसानों ने खेतों की ओर रुख कर दिया। फिलहाल खेतों में चारों तरफ पानी ही पानी नजर आया। वहीं पौथिया के सुरेश सचान ने बताया कि उनके अमरूद के बाग में पानी दिख रहा है।
हालांकि खेत में खड़ी तिल का पानी सूखने को है। कहा कि फसल के लिए पानी संजीवनी की तरह है। स्वासा निवासी नत्थू का खेत भी डूबा है।
उसने बताया कि चार बीघे में तिल की फसल लहलहा रही थी, लेकिन अब इसके बचने की संभावना कम है। कहने लगा कि मेड़ होने से खेत का पानी बाहर निकालने की गुंजाइश नहीं है।
साथ ही अगल-बगल के खेतों में भी फसलें खड़ी होने से वह लोग पानी नहीं निकालने देंगे। इसी तरह छोटे प्रजापति ने बताया कि उसने दो बीघे में तिल बोई है जो पानी में डूब गई है।