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अब चेक कैश कराने में मशक्कत
ब्यूरो/ अमर उजाला, हमीरपुर
Updated Wed, 15 Apr 2015 11:35 PM IST
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राशि की चेकें तो मिल गईं पर उनको कैश कराने के लिए किसानों को कड़ी मशक्कत
करनी पड़ रही है।
आलम यह है कि सुबह से ही बैंकों में भीड़ लग जाती है। बैंकों में स्टाफ कम होने के कारण घंटों लाइन में लगे रहने के बाद भी कई किसानों की चेकें कैश नहीं हो पातीं। मजबूरन उन्हें वापस लौटना पड़ता है।
कस्बे के कपसा मार्ग स्थित इलाहाबाद बैंक के बाहर बुधवार को हाथ में चेक लिए किसानों की लंबी लाइन लगी थी। बैंक में प्रबंधक सहित मात्र चार लोग ही कार्यरत हैं। स्टाफ की कमी के चलते किसानों के अलावा अन्य खाताधारकों का काम समय से नहीं हो पाया। शाम तक किसानों की लाइनें लगी रहीं।
कई किसानों की चेक कैश नहीं हो पाईं। यही हाल कस्बे की स्टेट बैंक का रहा। पूरा बैंक परिसर किसानों से भरा रहा। बैंक के बाहर भी भारी भीड़ रही। एक ओर जहां किसान लगातार हो रही बारिश से खेतों में कटी पड़ी फसलों को लेकर परेशान हैं, वहीं राहत राशि की चेकों को कैश कराने में मशक्कत कर रहा है।
किसी किसान के हाथ में 750 रुपये तो किसी के पास 1500 रुपये की चेकें हैं। किसानों को अधिकतम 4500 रुपये की चेकें मिलीं हैं।
आलम यह है कि सुबह से ही बैंकों में भीड़ लग जाती है। बैंकों में स्टाफ कम होने के कारण घंटों लाइन में लगे रहने के बाद भी कई किसानों की चेकें कैश नहीं हो पातीं। मजबूरन उन्हें वापस लौटना पड़ता है।
कस्बे के कपसा मार्ग स्थित इलाहाबाद बैंक के बाहर बुधवार को हाथ में चेक लिए किसानों की लंबी लाइन लगी थी। बैंक में प्रबंधक सहित मात्र चार लोग ही कार्यरत हैं। स्टाफ की कमी के चलते किसानों के अलावा अन्य खाताधारकों का काम समय से नहीं हो पाया। शाम तक किसानों की लाइनें लगी रहीं।
कई किसानों की चेक कैश नहीं हो पाईं। यही हाल कस्बे की स्टेट बैंक का रहा। पूरा बैंक परिसर किसानों से भरा रहा। बैंक के बाहर भी भारी भीड़ रही। एक ओर जहां किसान लगातार हो रही बारिश से खेतों में कटी पड़ी फसलों को लेकर परेशान हैं, वहीं राहत राशि की चेकों को कैश कराने में मशक्कत कर रहा है।
किसी किसान के हाथ में 750 रुपये तो किसी के पास 1500 रुपये की चेकें हैं। किसानों को अधिकतम 4500 रुपये की चेकें मिलीं हैं।