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मौदहा बांध के फाटकों की होगी मरम्मत
ब्यूरो, अमर उजाला/हमीरपुर
Updated Tue, 02 Jun 2015 10:58 PM IST
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मौदहा बांध के फाटक मरम्मत योग्य हो गए हैं। केंद्र सरकार के निर्देश पर आईआईटी रुड़की से आई विशेषज्ञों की टीम ने फाटकों की मरम्मत कराने की रिपोर्ट शासन को सौंपी है। जिस पर उच्च स्तरीय अधिकारियों की बैठक में मरम्मत कराने का फैसला लिया गया है। डैम में 60 मिलियन क्यूसेक पानी है। जिसमें 40 मिलियन क्यूसिक पानी छोड़ा जाएगा। इसको लेकर विरमा नदी के निकटवर्ती 32 गांवों के लोगों को सतर्क कर दिया गया है।
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मौदहा बांध का निर्माण 1976-77 में शुरू किया गया और इसका लोकार्पण 1999 में जून माह में हुआ। इस बांध से निकली नहरों की लंबाई 380 किमी है। बांध से चरखारी महोबा के कुछ हिस्से में पानी दिया जाता है।
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जबकि जिले में 22 हजार 637 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जाती है। बांध में 200 मिलियन क्यूसेक पानी भरने की क्षमता है। फिलहाल इस बांध का नाम बदलकर ब्रह्मानंद बांध कर दिया गया है। वर्ष 2004 से नहरों पर बांध से पानी छोड़ना शुरू किया गया है। बांध में कुल 11 गेट हैं। जिसमें 12 वाई 8.40 मीटर का एक गेट है। जिनकी मरम्मत बीते दस वर्षों से नहीं हुई है।
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मौदहा बांध के अधिशाषी अभियंता एसके पांडेय ने बताया कि बीते चार दिन पूर्व आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों की टीम बांध का निरीक्षण कर चुकी है। टीम ने शासन को रिपोर्ट भेजी है। जिसमें कहा है कि बांध के गेट मरम्मत योग्य हैं।
यदि बाढ़ के दौरान गेट नहीं खुले तो भारी जनहानि की आशंका है। जिसको लेकर बीते सोमवार लखनऊ में हुई उच्चाधिकारियों की बैठक में बांध के फाटकों की मरम्मत का फैसला लिया गया है। बताया कि इस कार्य को 15 जून तक पूरा किया जाना है।
बांध में मौजूद 60 मिलियन क्यूसेक पानी मौजूद है। जिसमें 40 मिलियन क्यूसिक पानी धीरे-धीरे नहरों और विरमा नदी में छोड़ा जाएगा। बताया कि नदी के किनारे के गांवों के लोगों को सतर्क करने के लिए मुनादी कर दी गई है। बताया कि कानपुर की मैकेनिकल डिवीजन की टीम गेटों की मरम्मत का कार्य करेगी।