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गेहूं खरीद का लक्ष्य पूरा होना कठिन
ब्यूरो, अमर उजाला/हमीरपुर
Updated Tue, 09 Jun 2015 12:25 AM IST
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जिले में 66 दिनों में 19 हजार 76 मीट्रिक टन गेहूं की ही खरीद की जा सकी
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है। अब तक खरीद योजना का लाभ महज 3,864 किसानों को ही मिल सका है। किसान
अपना गेहूं बेचने के लिए एक समिति से दूसरी समिति का चक्कर लगा रहे हैं,
लेकिन उनका गेहूं खरीदने के प्रति क्रय केंद्र प्रभारी गंभीर नहीं हैं।
खरीद का कार्य 15 जून तक ही चलना है। केंद्रों पर किसान गेहूं की तौल कराने
को एक एक सप्ताह से डेरा डाले हैं। ऐसे में 31,500 मीट्रिक टन के लक्ष्य
को किस प्रकार पूरा किया जाएगा, इस बारे में अफसर मौन हैं। अब तक जो खरीद
हुई है, वह लक्ष्य का 61.54 प्रतिशत है।
मौसम की मार से गेहूं सहित अन्य फसलों की बर्बादी का दंश झेल रहे किसानों की समस्याएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। एक तरफ बर्बाद हुई गेहूं की फसल का मुआवजा न मिलने से उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है। तो दूसरी गेहूं की बची-खुची फसल की बिक्री को लेकर उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों के गेहूं की उपज की खरीद को लेकर विभागीय अधिकारी गंभीर नहीं हैं। 2 अप्रैल से शुरू हुई खरीद के बाद भी अब तक 3,864 किसानों से मात्र 19,076 मीट्रिक टन गेहूं की ही खरीद की जा सकी है, जो कि निर्धारित लक्ष्य 32.500 मीट्रिक टन के सापेक्ष 61.54 प्रतिशत है।
खरीद का कार्य तेज करने के लिए समय-समय पर प्रशासन ने तमाम दिशा-निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए, लेकिन इसका कोई प्रभाव न तो अधिकारियों पर पड़ा और न ही क्रय केंद्रों के कर्मचारियों पर। बिवांर गांव स्थित पीसीएफ केंद्र के प्रभारी ने अपने प्रभाव का जमकर दुरुपयोग किया।
लगातार डेढ़ माह तक इस केंद्र पर खरीद नहीं की गई। विभागीय आंकड़ों के अनुसार खाद्य विभाग ने 7 हजार मीट्रिक टन के सापेक्ष 757 किसानों का मात्र 3866.90 एमटी गेहूं खरीदा है।
इसके अलावा पीसीएफ ने 16500 एमटी लक्ष्य के सापेक्ष 2182 किसानों का 10793.90 मीट्रिक टन, यूपी एग्रो द्वारा दो हजार एमटी लक्ष्य के सापेक्ष 373 किसानों का 1767 एमटी व भारतीय खाद्य निगम द्वारा दो हजार एमटी लक्ष्य के सापेक्ष 552 किसानों का 2648 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की जा सकी है।
वहीं दूसरी तरफ खरीदे गए गेहूं की डिलेवरी नहीं हो पाने से खरीद का कार्य प्रभावित हो रहा है। एडीएम कुंजबिहारी अग्रवाल ने कहा कि गेहूं खरीद का कार्य तेज गति से चल रहा है। धन की भी कोई कमी है। आने वाले दिनों में और प्रगति नजर आएगी। किसान अपनी उपज लेकर 15 जून से पहले केंद्रों पर पहुंचे।
मौसम की मार से गेहूं सहित अन्य फसलों की बर्बादी का दंश झेल रहे किसानों की समस्याएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। एक तरफ बर्बाद हुई गेहूं की फसल का मुआवजा न मिलने से उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है। तो दूसरी गेहूं की बची-खुची फसल की बिक्री को लेकर उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों के गेहूं की उपज की खरीद को लेकर विभागीय अधिकारी गंभीर नहीं हैं। 2 अप्रैल से शुरू हुई खरीद के बाद भी अब तक 3,864 किसानों से मात्र 19,076 मीट्रिक टन गेहूं की ही खरीद की जा सकी है, जो कि निर्धारित लक्ष्य 32.500 मीट्रिक टन के सापेक्ष 61.54 प्रतिशत है।
खरीद का कार्य तेज करने के लिए समय-समय पर प्रशासन ने तमाम दिशा-निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए, लेकिन इसका कोई प्रभाव न तो अधिकारियों पर पड़ा और न ही क्रय केंद्रों के कर्मचारियों पर। बिवांर गांव स्थित पीसीएफ केंद्र के प्रभारी ने अपने प्रभाव का जमकर दुरुपयोग किया।
लगातार डेढ़ माह तक इस केंद्र पर खरीद नहीं की गई। विभागीय आंकड़ों के अनुसार खाद्य विभाग ने 7 हजार मीट्रिक टन के सापेक्ष 757 किसानों का मात्र 3866.90 एमटी गेहूं खरीदा है।
इसके अलावा पीसीएफ ने 16500 एमटी लक्ष्य के सापेक्ष 2182 किसानों का 10793.90 मीट्रिक टन, यूपी एग्रो द्वारा दो हजार एमटी लक्ष्य के सापेक्ष 373 किसानों का 1767 एमटी व भारतीय खाद्य निगम द्वारा दो हजार एमटी लक्ष्य के सापेक्ष 552 किसानों का 2648 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की जा सकी है।
वहीं दूसरी तरफ खरीदे गए गेहूं की डिलेवरी नहीं हो पाने से खरीद का कार्य प्रभावित हो रहा है। एडीएम कुंजबिहारी अग्रवाल ने कहा कि गेहूं खरीद का कार्य तेज गति से चल रहा है। धन की भी कोई कमी है। आने वाले दिनों में और प्रगति नजर आएगी। किसान अपनी उपज लेकर 15 जून से पहले केंद्रों पर पहुंचे।