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दो शव उठते ही छलक पड़े आंसू
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पत्योरा। कानपुर-सागर हाईवे-34 पर शुक्रवार को इंगोहटा के पास हुए हादसे में पत्योरा के मजरा शिवरामपुर निवासी दो युवक की मौत हुई थी। रविवार को दोनों शवों का अंतिम संस्कार किया गया। एक ही मोहल्ले से दो शव उठते ही लोगों के आंखों से आंसू छलक पड़े।
रामदास ने बताया उनके भतीजे राममिलन (30) के दो बेटियां हैं। जिनकी परवरिश की सारी जिम्मेदारी उसकी पत्नी राजकुमारी के कंधों पर आ गई है। पत्नी दो दिनों से बिना कुछ खाए बेसुध है। पड़ोसी गोविंद निषाद ने कहा कमाई के लालच में यह घटना हो गई। कहा गरीबी में घर परिवार चलाना मुश्किल हैं। रोजगार के कोई ठीकठाक अवसर न होने से मजदूरी कर ही परिवार का भरण पोषण करते थे। कहा अचानक यमुना नदी में बाढ़ के मटमैले पानी में मछली अधिक आकर उतराने लगी।
मछलियों का शिकार कर बेचकर रुपये कमाने के लिए मौदहा कस्बा गए थे। वहां से वापस आते समय हादसा हो गया। मृतक लल्लू के परिवार में तो सभी बेसुध हैं। अब कोई घर को कमा कर खिलाने वाला तक नहीं है। इन नौनिहालों की परवरिश को लेकर परेशान हैं। सरकारी मदद से इन गरीबों का कुछ भला हो सकता है। गांव निवासी जगन्नाथ निषाद ने कहा, बीते एक वर्ष में आधा दर्जन से अधिक युवक सड़क दुर्घटना में अपनी जान गवां चुके हैं। सभी घटनाएं बाइक से गिरकर ही हुई हैं।
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रामदास ने बताया उनके भतीजे राममिलन (30) के दो बेटियां हैं। जिनकी परवरिश की सारी जिम्मेदारी उसकी पत्नी राजकुमारी के कंधों पर आ गई है। पत्नी दो दिनों से बिना कुछ खाए बेसुध है। पड़ोसी गोविंद निषाद ने कहा कमाई के लालच में यह घटना हो गई। कहा गरीबी में घर परिवार चलाना मुश्किल हैं। रोजगार के कोई ठीकठाक अवसर न होने से मजदूरी कर ही परिवार का भरण पोषण करते थे। कहा अचानक यमुना नदी में बाढ़ के मटमैले पानी में मछली अधिक आकर उतराने लगी।
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मछलियों का शिकार कर बेचकर रुपये कमाने के लिए मौदहा कस्बा गए थे। वहां से वापस आते समय हादसा हो गया। मृतक लल्लू के परिवार में तो सभी बेसुध हैं। अब कोई घर को कमा कर खिलाने वाला तक नहीं है। इन नौनिहालों की परवरिश को लेकर परेशान हैं। सरकारी मदद से इन गरीबों का कुछ भला हो सकता है। गांव निवासी जगन्नाथ निषाद ने कहा, बीते एक वर्ष में आधा दर्जन से अधिक युवक सड़क दुर्घटना में अपनी जान गवां चुके हैं। सभी घटनाएं बाइक से गिरकर ही हुई हैं।
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