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आर्थिक तंगी में किसान ने फांसी लगाकर जान दी
ब्यूरो, अमर उजाला हमीरपुर
Updated Tue, 08 Sep 2015 11:25 PM IST
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जरिया थानाक्षेत्र के तुरना गांव में आर्थिक तंगी व
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तुलसी की फसल सूखने से आहत 45 वर्षीय किसान ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर
ली। किसान पर एक लाख रुपये का कर्ज था। उसका खेत भी गिरवी रखा था व अपने
खेत को वह बटाई पर जोत रहा था। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम
के लिए भेज दिया है।
प्राकृतिक आपदाओं से तंग किसानों का मौत को गले लगाने का सिलसिला थम नहीं रहा है। मंगलवार को तुरना गांव के दयाशंकर (45) ने सूने घर में अपनी पत्नी की साड़ी से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
मृतक किसान के भतीजे अश्विनी कुमार ने बताया कि चाचा आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहे थे। उसके पास मात्र एक एकड़ जमीन थी। पिछले साल उसने बड़ी बेटी संगीता की शादी के लिए करीब एक लाख रुपये कर्ज लिया था।
शादी के लिए उसने अपनी जमीन भी गांव के ही एक किसान के पास गिरवी रख दी और अपने ही खेत बटाई पर लेकर खेती कर रहा था। खेती कम करने होने के कारण वह अपनी पत्नी संतोष कुमारी के साथ मेहनत मजदूरी भी करता था।
उसने अपने पूरे खेत में अधिक मुनाफे की मंशा से तुलसी की खेती की थी, लेकिन बारिश न होने के कारण वह सूखने लगी थी। मंगलवार को वह अपनी पत्नी के साथ खेत पर गया और फसल देख उदास होकर घर चला आया।
पत्नी वहीं खेतों में बकरियां चराने लगी। उसके तीनों बेटे सचिन (14), नरेंद्र (10) व हरेंद्र (7) स्कूल चले गए थे। जबकि दूसरी बेटी नीतू (18) मजदूरी करने गांव में ही गई थी। अब चाचा को दूसरी बेटी की शादी की चिंता थी।
इससे परेशान होकर उसने फांसी लगाकर जान दे दी। उसकी पत्नी घर पहुंची तब घटना की जानकारी हुई। चौकी प्रभारी सरीला राजा दुबे ने बताया कि आर्थिक तंगी व फसल सूखने से आहत होकर किसान ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है।
प्राकृतिक आपदाओं से तंग किसानों का मौत को गले लगाने का सिलसिला थम नहीं रहा है। मंगलवार को तुरना गांव के दयाशंकर (45) ने सूने घर में अपनी पत्नी की साड़ी से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
मृतक किसान के भतीजे अश्विनी कुमार ने बताया कि चाचा आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहे थे। उसके पास मात्र एक एकड़ जमीन थी। पिछले साल उसने बड़ी बेटी संगीता की शादी के लिए करीब एक लाख रुपये कर्ज लिया था।
शादी के लिए उसने अपनी जमीन भी गांव के ही एक किसान के पास गिरवी रख दी और अपने ही खेत बटाई पर लेकर खेती कर रहा था। खेती कम करने होने के कारण वह अपनी पत्नी संतोष कुमारी के साथ मेहनत मजदूरी भी करता था।
उसने अपने पूरे खेत में अधिक मुनाफे की मंशा से तुलसी की खेती की थी, लेकिन बारिश न होने के कारण वह सूखने लगी थी। मंगलवार को वह अपनी पत्नी के साथ खेत पर गया और फसल देख उदास होकर घर चला आया।
पत्नी वहीं खेतों में बकरियां चराने लगी। उसके तीनों बेटे सचिन (14), नरेंद्र (10) व हरेंद्र (7) स्कूल चले गए थे। जबकि दूसरी बेटी नीतू (18) मजदूरी करने गांव में ही गई थी। अब चाचा को दूसरी बेटी की शादी की चिंता थी।
इससे परेशान होकर उसने फांसी लगाकर जान दे दी। उसकी पत्नी घर पहुंची तब घटना की जानकारी हुई। चौकी प्रभारी सरीला राजा दुबे ने बताया कि आर्थिक तंगी व फसल सूखने से आहत होकर किसान ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है।