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Hamirpur News: दिन में 12 बजे बम धमाका, दो घायलों को ले गई एंबुलेंस, रात आठ बजे हुआ ब्लैकआउट
Thu, 08 May 2025 12:47 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
Updated Thu, 08 May 2025 12:47 AM IST
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शहर के कांशीराम कालोनी में रात आठ बजे ब्लैक आउट के दौरान छाया अंधेरा। संवाद
- फोटो : शहर के कांशीराम कालोनी में रात आठ बजे ब्लैक आउट के दौरान छाया अंधेरा। संवाद
हमीरपुर। पहलगाम हमले के बाद भारत द्वारा पाकिस्तान पर की गई एयर स्ट्राइक के चलते दोनों देशों के बीच युद्ध जैसे हालात है। ऐसे में सरकार के पूर्व नियत कार्यक्रम के तहत जिले के दो स्थानों पर अलग-अलग समय माॅक ड्रिल कराई गई। बुधवार दोपहर 12 बजे मुख्यालय के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में सायरन बजते ही धमाका हुआ। इसमें वहां मौजूद दो लोग घायल हो गए। इन्हें एंबुलेंस अपने साथ ले गई। वहीं देर शाम आठ बजे लक्ष्मीबाई तिराहे में मॉकड्रिल कराया गया। इसमें दस मिनट पूरे शहर में अंधेरा छाया रहा। विद्यालयों व सार्वजनिक स्थलों पर लोगों को जागरूक किया गया।
युद्ध के दौरान हवाई हमले से बचाव के लिए बुधवार को मुख्यालय में जीजीआईसी व लक्ष्मीबाई तिराहे में जिलाधिकारी घनश्याम मीना व एसपी डॉ. दीक्षा शर्मा की मौजूदगी में मॉक ड्रिल कराया गया। दोपहर जीजीआईसी में सायरन बजने के कुछ देर बाद धमाका हुआ और उसमे दो लोग घायल हो गए। उन्हें एंबुलेंस अपने साथ ले गई। इसके बाद आपदा मित्र ऋषभ कुमार ने अपनी टीम के साथ वहां मौजूद उद्यमियों व छात्राओं को युद्ध की स्थिति में बजने वाले सायरन को समझने व हमले से बचने के तरीके बताए।
ब्लैक आउट के साथ सुरक्षित निकासी, प्राथमिक उपचार व सामूहिक सहयोग के कौशल भी सिखाए। इस मौके पर एडीएम विजय शंकर तिवारी, एएसपी मनोज कुमार, एडीएम सदर सुक्रमा प्रसाद, सीओ फायर रेहान अली, सीओ सदर राजेश कमल, रिमझिम इस्पात के अधिकारी शिशुपाल सिंह व दिनेश कुमार तिवारी के अलावा हिंदुस्तान लीवर के अधिकारी, एनसीसी कैडेट व कॉलेज की छात्राएं स्टॉफ समेत मौजूद रहे।
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जिलाधिकारी ने अभ्यास में सहभागी सभी विभागों, संस्थाओं एवं नागरिकों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन हमें आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारी को परखने व आवश्यक सुधार करने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने जनसामान्य से अपील की कि वह ऐसे अभियानों को गंभीरता से लें और सुरक्षा के प्रति जागरूक रहें। इससे किसी भी आकस्मिक आपदा में जान-माल की क्षति को न्यूनतम किया जा सके।
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आपातकाल की स्थिति में सामान्य निर्देश :
1. शांत रहें और अफवाहों से बचें:
-घबराएं नहीं: स्थिति की गंभीरता को समझें, लेकिन शांत रहें। घबराहट में गलत निर्णय लेने की संभावना बढ़ जाती है।
- आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें: केवल सरकार और जिला प्रशासन द्वारा जारी की गई आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास करें। सोशल मीडिया या अन्य अपुष्ट स्रोतों से आने वाली अफवाहों पर ध्यान न दें और न ही उन्हें फैलाएं।
- समाचारों को ध्यान से सुनें: रेडियो, टेलीविजन या आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टलों के माध्यम से नवीनतम और सत्यापित जानकारी प्राप्त करते रहें।
2. सुरक्षित स्थानों पर आश्रय लें:
-घर के अंदर रहें: जब तक प्रशासन द्वारा बाहर निकलने के लिए न कहा जाए, अपने घरों के अंदर ही रहें। खिड़कियों और दरवाजों से दूर रहें।
-बंकर या सुरक्षित स्थानों की पहचान करें: यदि आपके आस-पास कोई बंकर या मजबूत भूमिगत स्थान उपलब्ध है, तो आवश्यकता पड़ने पर वहां आश्रय लें।
- आंतरिक कमरे का उपयोग करें: यदि बंकर उपलब्ध नहीं है, तो घर के अंदरूनी कमरे में रहें, जिसमें बाहरी दीवारों और खिड़कियों से कम संपर्क हो। फर्श पर बैठें और दीवारों से दूर रहें।
3. आवश्यक आपूर्ति तैयार रखें:
- आपातकालीन किट बनाएं: एक आपातकालीन किट तैयार करें जिसमें निम्नलिखित चीजें हों:
-पानी की बोतलें (कम से कम तीन दिन के लिए प्रति व्यक्ति)
- सूखा भोजन (बिस्कुट, अनाज, डिब्बाबंद भोजन, आदि)
- प्राथमिक चिकित्सा किट (पट्टी, एंटीसेप्टिक, दर्द निवारक, आदि)
- बैटरी चालित रेडियो और अतिरिक्त बैटरी
- टॉर्च और अतिरिक्त बैटरी
- सीटी
- चाकू
- माचिस या लाइटर (सुरक्षित डिब्बे में)
- नकदी (छोटे नोट)
-महत्वपूर्ण दस्तावेज (पहचान पत्र, चिकित्सा रिकॉर्ड, आदि की प्रतियां - वाटरप्रूफ बैग में)
- कंबल या गर्म कपड़े
-सैनिटाइजर और मास्क
- भोजन और पानी का भंडारण करें: कुछ दिनों के लिए पर्याप्त भोजन और पानी का भंडारण करके रखें।
- दवाएं: यदि आप कोई नियमित दवाएं लेते हैं, तो उनका पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित करें।
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4. बिजली और गैस के संबंध में सावधानी:
- बिजली के उपकरणों को बंद करें: यदि बमबारी या अन्य खतरों की आशंका हो, तो बिजली के सभी उपकरणों को बंद कर दें।
- गैस कनेक्शन बंद करें: यदि गैस का रिसाव महसूस हो या खतरे की आशंका हो, तो मुख्य गैस वाल्व को बंद कर दें।
5. सुरक्षा और सतर्कता:
- संदिग्ध गतिविधियों की सूचना दें: यदि आपको कोई संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि दिखाई दे, तो तुरंत स्थानीय पुलिस या प्रशासन को सूचित करें।
- अपरिचित वस्तुओं से दूर रहें: किसी भी लावारिस वस्तु को न छुएं। इसकी सूचना तुरंत सुरक्षा एजेंसियों को दें।
- रात में रोशनी कम रखें: यदि आपके क्षेत्र में ब्लैकआउट है, तो घरों में कम रोशनी का उपयोग करें ताकि बाहर से कम दिखाई दे। खिड़कियों पर पर्दे या मोटे कपड़े लगाएं।
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6. पड़ोसी और समुदाय का सहयोग करें:
- अपने पड़ोसियों की मदद करें: खासकर बुजुर्गों, बच्चों और जरूरतमंद लोगों का ध्यान रखें और उनकी सहायता करें।
- सामुदायिक प्रयासों में भाग लें: यदि आपके क्षेत्र में सुरक्षा या सहायता के लिए सामुदायिक प्रयास किए जा रहे हैं, तो उनमें सक्रिय रूप से भाग लें।
7. यात्रा से बचें:
- गैर-जरूरी यात्रा न करें: जब तक बहुत आवश्यक न हो, यात्रा करने से बचें। सड़कों पर भीड़ और खतरे बढ़ सकते हैं।
- यदि यात्रा करनी पड़े तो सावधानी बरतें: यदि यात्रा करना अपरिहार्य हो, तो अपने मार्ग की जानकारी रखें, सुरक्षित रास्तों का उपयोग करें और सतर्क रहें।
याद रखें: आपात काल के दौरान धैर्य, संयम और जागरूकता ही आपको और आपके प्रियजनों को सुरक्षित रखने में मदद कर सकती है । प्रशासन द्वारा जारी किए गए निर्देशों का पालन करें और एक-दूसरे का सहयोग करें।
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पहली बार देखा मॉक ड्रिल
- मुख्यालय निवासी अधिवक्ता राजेंद्रवीर सिंह चौहान ने बताया कि 1971 में हुए भारत पाक युद्ध के दौरान केवल रेडियो से सूचना मिलती थी। रेडियो के माध्यम से ही बचाव के तरीके बताए जाते थे। बताया जाता था कि बम गिरने पर लेट जाए।
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पहले भी देख चुकीं हैं ब्लैक आउट
- जिले के मलेहटा गांव निवासी दिवंगत हवलदार जगरूप सिंह की पत्नी लल्ली देवी के अनुसार वह 1971 में ब्लैक आउट देख चुकी है। बताया कि उनके पति की राजस्थान बॉर्डर में पोस्टिंग थी और वह उनके साथ रह रही थी। जब युद्ध छिड़ा तब वह अकेले कॉलोनी में थीं और पति युद्ध में गए थे। इस दौरान बजने वाले सायरन की आवाजों को सुनने के साथ ब्लैक आउट करीब 15 दिन देखा।
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युद्ध के दौरान हवाई हमले से बचाव के लिए बुधवार को मुख्यालय में जीजीआईसी व लक्ष्मीबाई तिराहे में जिलाधिकारी घनश्याम मीना व एसपी डॉ. दीक्षा शर्मा की मौजूदगी में मॉक ड्रिल कराया गया। दोपहर जीजीआईसी में सायरन बजने के कुछ देर बाद धमाका हुआ और उसमे दो लोग घायल हो गए। उन्हें एंबुलेंस अपने साथ ले गई। इसके बाद आपदा मित्र ऋषभ कुमार ने अपनी टीम के साथ वहां मौजूद उद्यमियों व छात्राओं को युद्ध की स्थिति में बजने वाले सायरन को समझने व हमले से बचने के तरीके बताए।
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ब्लैक आउट के साथ सुरक्षित निकासी, प्राथमिक उपचार व सामूहिक सहयोग के कौशल भी सिखाए। इस मौके पर एडीएम विजय शंकर तिवारी, एएसपी मनोज कुमार, एडीएम सदर सुक्रमा प्रसाद, सीओ फायर रेहान अली, सीओ सदर राजेश कमल, रिमझिम इस्पात के अधिकारी शिशुपाल सिंह व दिनेश कुमार तिवारी के अलावा हिंदुस्तान लीवर के अधिकारी, एनसीसी कैडेट व कॉलेज की छात्राएं स्टॉफ समेत मौजूद रहे।
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जिलाधिकारी ने अभ्यास में सहभागी सभी विभागों, संस्थाओं एवं नागरिकों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन हमें आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारी को परखने व आवश्यक सुधार करने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने जनसामान्य से अपील की कि वह ऐसे अभियानों को गंभीरता से लें और सुरक्षा के प्रति जागरूक रहें। इससे किसी भी आकस्मिक आपदा में जान-माल की क्षति को न्यूनतम किया जा सके।
आपातकाल की स्थिति में सामान्य निर्देश :
1. शांत रहें और अफवाहों से बचें:
-घबराएं नहीं: स्थिति की गंभीरता को समझें, लेकिन शांत रहें। घबराहट में गलत निर्णय लेने की संभावना बढ़ जाती है।
- आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें: केवल सरकार और जिला प्रशासन द्वारा जारी की गई आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास करें। सोशल मीडिया या अन्य अपुष्ट स्रोतों से आने वाली अफवाहों पर ध्यान न दें और न ही उन्हें फैलाएं।
- समाचारों को ध्यान से सुनें: रेडियो, टेलीविजन या आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टलों के माध्यम से नवीनतम और सत्यापित जानकारी प्राप्त करते रहें।
2. सुरक्षित स्थानों पर आश्रय लें:
-घर के अंदर रहें: जब तक प्रशासन द्वारा बाहर निकलने के लिए न कहा जाए, अपने घरों के अंदर ही रहें। खिड़कियों और दरवाजों से दूर रहें।
-बंकर या सुरक्षित स्थानों की पहचान करें: यदि आपके आस-पास कोई बंकर या मजबूत भूमिगत स्थान उपलब्ध है, तो आवश्यकता पड़ने पर वहां आश्रय लें।
- आंतरिक कमरे का उपयोग करें: यदि बंकर उपलब्ध नहीं है, तो घर के अंदरूनी कमरे में रहें, जिसमें बाहरी दीवारों और खिड़कियों से कम संपर्क हो। फर्श पर बैठें और दीवारों से दूर रहें।
3. आवश्यक आपूर्ति तैयार रखें:
- आपातकालीन किट बनाएं: एक आपातकालीन किट तैयार करें जिसमें निम्नलिखित चीजें हों:
-पानी की बोतलें (कम से कम तीन दिन के लिए प्रति व्यक्ति)
- सूखा भोजन (बिस्कुट, अनाज, डिब्बाबंद भोजन, आदि)
- प्राथमिक चिकित्सा किट (पट्टी, एंटीसेप्टिक, दर्द निवारक, आदि)
- बैटरी चालित रेडियो और अतिरिक्त बैटरी
- टॉर्च और अतिरिक्त बैटरी
- सीटी
- चाकू
- माचिस या लाइटर (सुरक्षित डिब्बे में)
- नकदी (छोटे नोट)
-महत्वपूर्ण दस्तावेज (पहचान पत्र, चिकित्सा रिकॉर्ड, आदि की प्रतियां - वाटरप्रूफ बैग में)
- कंबल या गर्म कपड़े
-सैनिटाइजर और मास्क
- भोजन और पानी का भंडारण करें: कुछ दिनों के लिए पर्याप्त भोजन और पानी का भंडारण करके रखें।
- दवाएं: यदि आप कोई नियमित दवाएं लेते हैं, तो उनका पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित करें।
4. बिजली और गैस के संबंध में सावधानी:
- बिजली के उपकरणों को बंद करें: यदि बमबारी या अन्य खतरों की आशंका हो, तो बिजली के सभी उपकरणों को बंद कर दें।
- गैस कनेक्शन बंद करें: यदि गैस का रिसाव महसूस हो या खतरे की आशंका हो, तो मुख्य गैस वाल्व को बंद कर दें।
5. सुरक्षा और सतर्कता:
- संदिग्ध गतिविधियों की सूचना दें: यदि आपको कोई संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि दिखाई दे, तो तुरंत स्थानीय पुलिस या प्रशासन को सूचित करें।
- अपरिचित वस्तुओं से दूर रहें: किसी भी लावारिस वस्तु को न छुएं। इसकी सूचना तुरंत सुरक्षा एजेंसियों को दें।
- रात में रोशनी कम रखें: यदि आपके क्षेत्र में ब्लैकआउट है, तो घरों में कम रोशनी का उपयोग करें ताकि बाहर से कम दिखाई दे। खिड़कियों पर पर्दे या मोटे कपड़े लगाएं।
6. पड़ोसी और समुदाय का सहयोग करें:
- अपने पड़ोसियों की मदद करें: खासकर बुजुर्गों, बच्चों और जरूरतमंद लोगों का ध्यान रखें और उनकी सहायता करें।
- सामुदायिक प्रयासों में भाग लें: यदि आपके क्षेत्र में सुरक्षा या सहायता के लिए सामुदायिक प्रयास किए जा रहे हैं, तो उनमें सक्रिय रूप से भाग लें।
7. यात्रा से बचें:
- गैर-जरूरी यात्रा न करें: जब तक बहुत आवश्यक न हो, यात्रा करने से बचें। सड़कों पर भीड़ और खतरे बढ़ सकते हैं।
- यदि यात्रा करनी पड़े तो सावधानी बरतें: यदि यात्रा करना अपरिहार्य हो, तो अपने मार्ग की जानकारी रखें, सुरक्षित रास्तों का उपयोग करें और सतर्क रहें।
याद रखें: आपात काल के दौरान धैर्य, संयम और जागरूकता ही आपको और आपके प्रियजनों को सुरक्षित रखने में मदद कर सकती है । प्रशासन द्वारा जारी किए गए निर्देशों का पालन करें और एक-दूसरे का सहयोग करें।
पहली बार देखा मॉक ड्रिल
- मुख्यालय निवासी अधिवक्ता राजेंद्रवीर सिंह चौहान ने बताया कि 1971 में हुए भारत पाक युद्ध के दौरान केवल रेडियो से सूचना मिलती थी। रेडियो के माध्यम से ही बचाव के तरीके बताए जाते थे। बताया जाता था कि बम गिरने पर लेट जाए।
पहले भी देख चुकीं हैं ब्लैक आउट
- जिले के मलेहटा गांव निवासी दिवंगत हवलदार जगरूप सिंह की पत्नी लल्ली देवी के अनुसार वह 1971 में ब्लैक आउट देख चुकी है। बताया कि उनके पति की राजस्थान बॉर्डर में पोस्टिंग थी और वह उनके साथ रह रही थी। जब युद्ध छिड़ा तब वह अकेले कॉलोनी में थीं और पति युद्ध में गए थे। इस दौरान बजने वाले सायरन की आवाजों को सुनने के साथ ब्लैक आउट करीब 15 दिन देखा।