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Hamirpur News: आईसीयू में उपकरण न स्टाफ, कैसे मिले मरीजों को लाभ
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हमीरपुर। जिला अस्पताल में लाखों की लागत से बनी इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) अब तक चालू नहीं हो सकी है। अब तक स्टाफ की तैनाती नहीं है। अंदर रखे वेंटिलेटर और मशीनें धूल फांक रहे हैं। गंभीर मरीजों को कानपुर रेफर किया जा रहा है जिससे कई बार रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। हालत यह है कि जिला अस्पताल से प्रतिमाह करीब 200 मरीज रेफर किए जाते हैं।
बता दें कि जिला अस्पताल में करीब साल भर पहले आईसीयू चालू करने की तैयारी की गई थी। वेंटिलेटर में भी आ गए थे। साल भर बीतने के बाद भी इस यूनिट का संचालन शुरू नहीं हो सका है। जिला अस्पताल के मैनेजर विवेक राजधर ने बताया कि एक साल पहले ही आईसीयू कक्ष बनकर तैयार हो गया है। जिसमें उपकरण भी मौजूद हैं। इसके संचालन के लिए आठ आईसीयू टेक्नीशियन, दो चेस्ट फिजीशियन, चार मेडिकल आफीसर, तीन एनेस्थेटिक्स, वार्ड ब्वाय व वार्ड आया 16, चार सफाई कर्मी के स्टाफ की आवश्यकता है जो नहीं है।
सीएमएस डॉ. केके गुप्ता ने बताया कि चिकित्सकों की कमी से समस्या आ रही है। तकनीकी स्टाफ की कमी से आईसीयू को शुरू नहीं किया जा सका है। शासन को पत्र भेजा गया है।
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इन्हें होती है आईसीयू की आवश्यकता
- गंभीर रोगों से ग्रसित, सड़क दुर्घटना, ऑपरेशन व ट्रॉमा के मरीजों को आईसीयू में भर्ती किया जाता है। उन्हें 24 घंटे कड़ी देखभाल की जरूरत होती है। आईसीयू में मरीजों पर आईसीयू कर्मचारियों की एक टीम द्वारा बारीकी से निगरानी रखी जाती है। प्रत्येक एक या दो रोगियों के लिए एक नर्स होती है। जो मरीज स्वयं भोजन नहीं कर पाते हैं उन मरीजों को तरल पदार्थ और पोषक तत्व या अन्य तरल पदार्थ देने के लिए कई ट्यूब लगाए जाते हैं।
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बता दें कि जिला अस्पताल में करीब साल भर पहले आईसीयू चालू करने की तैयारी की गई थी। वेंटिलेटर में भी आ गए थे। साल भर बीतने के बाद भी इस यूनिट का संचालन शुरू नहीं हो सका है। जिला अस्पताल के मैनेजर विवेक राजधर ने बताया कि एक साल पहले ही आईसीयू कक्ष बनकर तैयार हो गया है। जिसमें उपकरण भी मौजूद हैं। इसके संचालन के लिए आठ आईसीयू टेक्नीशियन, दो चेस्ट फिजीशियन, चार मेडिकल आफीसर, तीन एनेस्थेटिक्स, वार्ड ब्वाय व वार्ड आया 16, चार सफाई कर्मी के स्टाफ की आवश्यकता है जो नहीं है।
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सीएमएस डॉ. केके गुप्ता ने बताया कि चिकित्सकों की कमी से समस्या आ रही है। तकनीकी स्टाफ की कमी से आईसीयू को शुरू नहीं किया जा सका है। शासन को पत्र भेजा गया है।
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इन्हें होती है आईसीयू की आवश्यकता
- गंभीर रोगों से ग्रसित, सड़क दुर्घटना, ऑपरेशन व ट्रॉमा के मरीजों को आईसीयू में भर्ती किया जाता है। उन्हें 24 घंटे कड़ी देखभाल की जरूरत होती है। आईसीयू में मरीजों पर आईसीयू कर्मचारियों की एक टीम द्वारा बारीकी से निगरानी रखी जाती है। प्रत्येक एक या दो रोगियों के लिए एक नर्स होती है। जो मरीज स्वयं भोजन नहीं कर पाते हैं उन मरीजों को तरल पदार्थ और पोषक तत्व या अन्य तरल पदार्थ देने के लिए कई ट्यूब लगाए जाते हैं।