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संतोष की मेहनत रंग लाई, चारों तरफ हरियाली फैलाई
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भरुआसुमेरपुर। लगातार बढ़ते तापमान और बिगड़ते पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए कम ही लोग आगे आते दिखाई दे रहे हैं। मगर कुंडौरा गांव निवासी संतोष कुमार कुशवाहा ने पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए कदम बढ़ाया तो उनके साथ कस्बे के युवा जुड़ते चले गए। जब उनके साथियों की संख्या अधिक हो गई तो उन्होंने पर्यावरण संरक्षण समिति के नाम से संस्था बनाकर पौधे लगाने का कार्य बृहद रूप से करना शुरू कर दिया। सभी लोग इस संकल्प के साथ पौधों का रोपण शुरू किया है कि कस्बे को क्लीन और ग्रीन बनाना है।
संतोष कुशवाहा ने बताया वह कुंडौरा गांव से रोजी रोटी की तलाश में कस्बे में आया था। इलेक्ट्रीशियन कोर्स किए होने के कारण एक गुमटी में दुकान खोलकर पंखा व मोटर भरने का काम शुरू किया। कहा काटे जा रहे पेड़ों को देख कर उसका दिल द्रवित होने लगा। इस पर संकल्प लिया कि वह पर्यावरण बचाने के लिए पौधे रोपित कर उन्हें तैयार करेगा। इसी संकल्प के साथ उन्होंने पौधे रोपित कर उन्हें खाद पानी देना शुरू कर दिया।
उनके अभियान को शुरू में लोग मजाक के रूप में लेते थे और उसे सनकी करार दे दिया था। लेकिन उनकी तपस्या को देखकर लोग जुड़ने लगे। इस पर समिति का गठन कर लोगों को जोड़ा। उनके इस परिश्रम को देखकर कस्बे के लोग उन्हें नया नाम देते हुए ग्रीन मैन बुलाने लगे हैं। समिति द्वारा लगाए गए पौधों के संरक्षण के लिए वह प्रतिदिन उन्हें पानी, खाद देकर तैयार करने में जुटे रहते हैं।
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चाहे भीषण गर्मी हो या ठंड वह सुबह-शाम पौधों की देखरेख जरूर करते हैं। उनके इस अभियान से कस्बे के रेलवे स्टेशन के आसपास खाली पड़ी जमीन पर पौधों की वजह से हरीभरी नजर आने लगी है। कुशवाहा ने बताया वह 2013 से लेकर अब तक करीब 1000 पौधे रोपित कर चुके हैं। तपोभूमि में खाली पड़ी जमीन पर पौध लगाने के बाद वह स्टेशन की ओर आ गए। स्टेशन के पास वट वृक्ष, पीपल, नीम, पाकर सहित विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए हैं। अब अंतिम सांस तक पौधरोपण करने का संकल्प ले चुके हैं।
सुमेरपुर कस्बे में अकेले दम पर अब तक लगाए एक हजार पौधे
अमर उजाला ब्यूरो
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संतोष कुशवाहा ने बताया वह कुंडौरा गांव से रोजी रोटी की तलाश में कस्बे में आया था। इलेक्ट्रीशियन कोर्स किए होने के कारण एक गुमटी में दुकान खोलकर पंखा व मोटर भरने का काम शुरू किया। कहा काटे जा रहे पेड़ों को देख कर उसका दिल द्रवित होने लगा। इस पर संकल्प लिया कि वह पर्यावरण बचाने के लिए पौधे रोपित कर उन्हें तैयार करेगा। इसी संकल्प के साथ उन्होंने पौधे रोपित कर उन्हें खाद पानी देना शुरू कर दिया।
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उनके अभियान को शुरू में लोग मजाक के रूप में लेते थे और उसे सनकी करार दे दिया था। लेकिन उनकी तपस्या को देखकर लोग जुड़ने लगे। इस पर समिति का गठन कर लोगों को जोड़ा। उनके इस परिश्रम को देखकर कस्बे के लोग उन्हें नया नाम देते हुए ग्रीन मैन बुलाने लगे हैं। समिति द्वारा लगाए गए पौधों के संरक्षण के लिए वह प्रतिदिन उन्हें पानी, खाद देकर तैयार करने में जुटे रहते हैं।
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चाहे भीषण गर्मी हो या ठंड वह सुबह-शाम पौधों की देखरेख जरूर करते हैं। उनके इस अभियान से कस्बे के रेलवे स्टेशन के आसपास खाली पड़ी जमीन पर पौधों की वजह से हरीभरी नजर आने लगी है। कुशवाहा ने बताया वह 2013 से लेकर अब तक करीब 1000 पौधे रोपित कर चुके हैं। तपोभूमि में खाली पड़ी जमीन पर पौध लगाने के बाद वह स्टेशन की ओर आ गए। स्टेशन के पास वट वृक्ष, पीपल, नीम, पाकर सहित विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए हैं। अब अंतिम सांस तक पौधरोपण करने का संकल्प ले चुके हैं।
सुमेरपुर कस्बे में अकेले दम पर अब तक लगाए एक हजार पौधे
अमर उजाला ब्यूरो