{"_id":"5be25750bdec2269556aa5f0","slug":"use-of-poor-quality-tiles-in-construction-of-brd-medical-college-sample-fail-in-quality-check","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"मेडिकल कॉलेज में निर्माण में घटिया टाइल्स का इस्तेमाल, जांच में सेंपल फेल, ठेकेदार का भुगतान रुका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मेडिकल कॉलेज में निर्माण में घटिया टाइल्स का इस्तेमाल, जांच में सेंपल फेल, ठेकेदार का भुगतान रुका
संतोष सिंह, अमर उजाला, गोरखपुर
Updated Wed, 07 Nov 2018 08:39 AM IST
विज्ञापन
फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के छात्रावास में इंटरलाकिंग में घटिया टाइल्स का इस्तेमाल किया गया है। यूपी स्टेट कंस्ट्रक्शन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कारपोरेशन (सिडको) और नगर निगम के इंटरलाकिंग टाइल्स के सैंपल मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की प्रयोगशाला की जांच में फेल पाए गए हैं। अब ठेकेदार का भुगतान रोकने के साथ ही संबंधित अधिशासी अभियंता और अवर अभियंता से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
कमिश्नर अमित गुप्ता ने 15 सितंबर को बीआरडी मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण किया था। उस दौरान 50 बेड के छात्रावास से इंटरलाकिंग टाइल्स के दो सैंपल भरवाए। फिर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट आकांक्षा और संयुक्त विकास आयुक्त की अगुवाई में कमेटी गठित करके सैंपल को जांच के लिए प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की प्रयोगशाला में भेजा था। अफसरों की मौजूदगी में ही सैंपल की जांच हुई। उसकी रिपोर्ट मंगलवार को आ गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक निर्माण में घटिया टाइल्स का इस्तेमाल किया गया है। एक टाइल्स का मानक 30 न्यूटन प्रति मिलीमीटर स्क्वायर की जगह 10 मिला है। यह मजबूती के लिहाज से बेहद खराब माना जाता है। दूसरे टाइल्स की गुणवत्ता भी खराब मिली है। इसका मानक 20 न्यूटन प्रति मिलीमीटर स्क्वायर है।
विज्ञापन
छात्रावास के पास ही नगर निगम की तरफ से इंटरलाकिंग टाइल्स से खड़ंजा बनवाया गया है। इसके सैंपल भी फेल हो गए हैं। जिस इंटरलाकिंग टाइल्स की मजबूती 30 न्यूटन प्रति मिलीमीटर स्क्वायर होनी चाहिए, वह महज 20 मिली है। इस पर मंडलायुक्त ने कड़ी नाराजगी जताई और ठेकेदार का भुगतान रोकने का निर्देश दिया है। इस प्रकरण से सरकारी विभाग के अफसर, कार्यदायी संस्था और ठेकेदार बेचैन हैं।
विज्ञापन
कमिश्नर अमित गुप्ता ने 15 सितंबर को बीआरडी मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण किया था। उस दौरान 50 बेड के छात्रावास से इंटरलाकिंग टाइल्स के दो सैंपल भरवाए। फिर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट आकांक्षा और संयुक्त विकास आयुक्त की अगुवाई में कमेटी गठित करके सैंपल को जांच के लिए प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की प्रयोगशाला में भेजा था। अफसरों की मौजूदगी में ही सैंपल की जांच हुई। उसकी रिपोर्ट मंगलवार को आ गई है।
विज्ञापन
रिपोर्ट के मुताबिक निर्माण में घटिया टाइल्स का इस्तेमाल किया गया है। एक टाइल्स का मानक 30 न्यूटन प्रति मिलीमीटर स्क्वायर की जगह 10 मिला है। यह मजबूती के लिहाज से बेहद खराब माना जाता है। दूसरे टाइल्स की गुणवत्ता भी खराब मिली है। इसका मानक 20 न्यूटन प्रति मिलीमीटर स्क्वायर है।
विज्ञापन
छात्रावास के पास ही नगर निगम की तरफ से इंटरलाकिंग टाइल्स से खड़ंजा बनवाया गया है। इसके सैंपल भी फेल हो गए हैं। जिस इंटरलाकिंग टाइल्स की मजबूती 30 न्यूटन प्रति मिलीमीटर स्क्वायर होनी चाहिए, वह महज 20 मिली है। इस पर मंडलायुक्त ने कड़ी नाराजगी जताई और ठेकेदार का भुगतान रोकने का निर्देश दिया है। इस प्रकरण से सरकारी विभाग के अफसर, कार्यदायी संस्था और ठेकेदार बेचैन हैं।
प्रथम दृष्टया प्लास्टर की सामग्री भी घटिया
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में छात्रावास का निर्माण आवास विकास परिषद ने कराया है। दीवारों पर जो प्लास्टर लगा है, प्रथम दृष्टया उसकी गुणवत्ता खराब मिली है। इसी लिहाज से प्लास्टर में इस्तेमाल निर्माण सामग्री की सैंपलिंग कराई गई। इसकी जांच केएनआईटी सुल्तानपुर की प्रयोगशाला से कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई होगी।
'इंटरलाकिंग टाइल्स के सैंपल फेल हो गए। संबंधित अफसरों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। मामला गंभीर है। दोषी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन से सिफारिश की जाएगी।'
- अमित गुप्ता, कमिश्नर
'इंटरलाकिंग टाइल्स के सैंपल फेल हो गए। संबंधित अफसरों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। मामला गंभीर है। दोषी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन से सिफारिश की जाएगी।'
- अमित गुप्ता, कमिश्नर