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कहीं ‘आवाज’ तो कहीं जाति ने बनाया प्रत्याशी
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Wed, 28 Dec 2016 09:04 PM IST
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राजनीति
- फोटो : demo pic
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गोरखपुर। समाजवादी पार्टी में लगातार हो रहा फेरबदल अब भी प्रत्याशियों की धुकधुकी बढ़ाए हुए है। मुख्यमंत्री की सूची पर अभी अमल बाकी ही था कि बुधवार को फिर कई प्रत्याशी बदल दिए गए। गोरखपुर में जहां पिपराइच विधानसभा क्षेत्र से राजमती को तीसरी बार पार्टी ने उम्मीदवार बनाया वहीं खजनी और बांसगांव विधानसभा क्षेत्र के प्रत्याशी बदल दिए। खजनी से जोखू पासवान की जगह अब रूपावती बेलदार को प्रत्याशी घोषित किया गया है वहीं बांसगांव में दूसरी बार प्रत्याशी बदलकर शारदा देवी की जगह वार्ड नंबर 51 से जिला पंचायत सदस्य सुमन पासवान को टिकट दिया गया है। इससे पहले संजय पहलवान का टिकट काटकर शारदा उम्मीदवार बनाई गई थीं।
क्षेत्र छोड़वाकर पार्टी ने शारदा को बांसगांव का उम्मीदवार तो बना दिया था, मगर सूत्र बताते हैं कि अब भी वह चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह से मन नहीं बना पाईं थीं। बांसगांव से घोषणा होने के बाद भी वह लगातार शीर्ष नेतृत्व से चौरीचौरा से टिकट की डिमांड कर रहीं हैं। चौरीचौरा (पूर्व में मुंडेरा बाजार) से पांच बार विधायक रहने और क्षेत्र बदलते ही पिछले चुनाव में बांसगांव से मिली हार, ये दो ऐसे बड़े आधार हैं जिनका हवाला देकर शारदा बांसगांव से हटना चाहती हैं, जबकि चौरीचौरा से वह टिकट की दावेदारी बनी हुई हैं। यहां तक की चौरीचौरा से केशव का टिक ट कटने के बाद दुर्गेश यादव को वहां से टिकट मिलने पर भी उन्होंने उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा है।
शारदा के क्षेत्र फैक्टर के अलावा सरल व्यवहार के साथ मधुर आवाज भी सुमन की उम्मीदवारी की वजह बनी। पार्टी के तमाम कार्यक्रमों में लोक गायकी से उन्होंने अपना अलग वजूद बनाया है। उनके साथ ही साथ पार्टी के तकरीबन सभी बड़े नेताओं को विश्वास हैं कि वे बांसगांव से किसी भी प्रत्याशी को कड़ी टक्कर देंगी। इसी तरह खजनी में बेलदार वोट की बहुलता जोखू पासवान की निष्ठा पर भारी पड़ गई और बहुत सक्रिय न रहने के बाद भी रूपावती बेलदार को टिकट मिल गया। वर्तमान में खजनी के भाजपा विधायक संत प्रसाद भी जाति के बेलदार हैं। रूपावती कहती हैं कि पार्टी ने उनपर जो भरोसा जताया है वह उसपर खरी उतरेंगी।
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क्षेत्र छोड़वाकर पार्टी ने शारदा को बांसगांव का उम्मीदवार तो बना दिया था, मगर सूत्र बताते हैं कि अब भी वह चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह से मन नहीं बना पाईं थीं। बांसगांव से घोषणा होने के बाद भी वह लगातार शीर्ष नेतृत्व से चौरीचौरा से टिकट की डिमांड कर रहीं हैं। चौरीचौरा (पूर्व में मुंडेरा बाजार) से पांच बार विधायक रहने और क्षेत्र बदलते ही पिछले चुनाव में बांसगांव से मिली हार, ये दो ऐसे बड़े आधार हैं जिनका हवाला देकर शारदा बांसगांव से हटना चाहती हैं, जबकि चौरीचौरा से वह टिकट की दावेदारी बनी हुई हैं। यहां तक की चौरीचौरा से केशव का टिक ट कटने के बाद दुर्गेश यादव को वहां से टिकट मिलने पर भी उन्होंने उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा है।
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शारदा के क्षेत्र फैक्टर के अलावा सरल व्यवहार के साथ मधुर आवाज भी सुमन की उम्मीदवारी की वजह बनी। पार्टी के तमाम कार्यक्रमों में लोक गायकी से उन्होंने अपना अलग वजूद बनाया है। उनके साथ ही साथ पार्टी के तकरीबन सभी बड़े नेताओं को विश्वास हैं कि वे बांसगांव से किसी भी प्रत्याशी को कड़ी टक्कर देंगी। इसी तरह खजनी में बेलदार वोट की बहुलता जोखू पासवान की निष्ठा पर भारी पड़ गई और बहुत सक्रिय न रहने के बाद भी रूपावती बेलदार को टिकट मिल गया। वर्तमान में खजनी के भाजपा विधायक संत प्रसाद भी जाति के बेलदार हैं। रूपावती कहती हैं कि पार्टी ने उनपर जो भरोसा जताया है वह उसपर खरी उतरेंगी।
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