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इबारत की जगह इमारत, राम की जगह काम की बात
मृगांक पाण्डेय, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Sat, 23 Jul 2016 01:35 AM IST
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रैली को संबोधित करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।
- फोटो : Shivharsh Dwivedi
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इसे सोच का बदलाव कहें या वक्ती जरूरत लेकिन यह सच है कि चुनावी मुहाने पर पहुंचे यूपी के लोगों को भाजपा के हक में रिझाने आगे आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपाई रैलियों के पारंपरिक तौर-तरीके को बदल दिया है। शुक्रवार को गोरखपुर में एम्स और खाद कारखाने की संगे बुनियाद रखने के बाद पूर्वांचल के लोगों से संवाद में जहां राम की जगह काम की बात की, वहीं मंच की पृष्ठभूमि में भी शीर्ष नेताओं की तस्वीरों में जड़ी भाजपाई इबारत की परंपरा दोहराने की जगह एम्स और फर्टिलाइजर फैक्ट्री के भविष्य की झलक देती इमारतों का अक्स था।
कहने को मोदी का यह कार्यक्त्रस्म पूर्वांचल के विकास को मजबूती और स्थानीय लोगों को सहूलियत देने के वादे पर आधारित दो बड़े प्रोजेक्ट के शिलान्यास पर केंद्रित था लेकिन तकरीर से लोगों के जेहन में स्पष्ट तस्वीर उभर आई कि मूल में यूपी के चुनाव की तैयारी है। किसान, गन्ना, स्वास्थ्य, सड़क, ग्रामीण विद्युतीकरण के लिए केंद्र सरकार के कामों को गिनाकर जहां भाजपाई हुकूमत को सौ में से सौ नंबर देने की कोशिश की, वहीं यूपी में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए केंद्र से स्वीकृत सात हजार करोड़ का इस्तेमाल न कर पाने का आक्षेप अखिलेश सरकार पर लगाकर आह्वान भी किया कि यूपी में भी केंद्र की तरह दौड़ने वाली सरकार लाओ, तभी बात बनेगी।
मोदी की स्क्रिप्ट यह भी साफ किया कि यूपी में भाजपा के चुनाव प्रचार का मुख्य बिंदु केंद्र सरकार के अब तक के ठोस काम का ब्यौरा होगा और उनके व्यक्तित्व को केंद्र में रखकर ही यूपी का चुनाव लड़ा जाएगा। इसके संकेत मंच और पंडाल की व्यवस्थाओं ने भी दिए। फर्श और परिसर की सज्जा में इस्तेमाल हुए रंगों में केसरिया का बर्चस्व भले था लेकिन बैकड्रॉप से लेकर कार्यक्त्रस्म में गूंजते नारों के बीच राम, मंदिर, मजहब विशेष से लगाव या अलगाव जताने वाली कोई बात नहीं आई। यूपी में पिछड़ों को लुभाने, दलितों को करीब लाने के चुनावी अभियान के बावजूद पिछड़े वोटों के प्रभाव वाले पूर्वांचल में मोदी ने न सिर्फ इस मुद्दे पर खामोशी बरती बल्कि अंत में आह्वान किया कि जाति की जगह विकास को तरजीह दें। दयाशंकर सिंह के मायावती पर दिए बयान से उठा सियासी भूचाल इस खामोशी की बड़ी वजह हो सकती है।
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सहारनपुर में 26 मई को हुई मोदी की रैली से गोरखपुर के कार्यक्त्रस्म की तुलना करें तो राम की जगह काम और इबारत की जगह विकास की इमारत को अहमियत का साम्य देखने को मिलता है। विकास पर्व बताए गए सहारनपुर के मंच के बैकड्रॉप पर मोदी की तस्वीर के साथ ‘बदलता भारत’ ‘बदल रहा भारत’ का नारा था तो गोरखपुर के मंच के पार्श्व में भी भाजपाई झंडे की रंगत, कमल, शीर्ष नेताओं के चेहरों से परहेज रखते हुए ‘बदल रहा है देश, बदलना है उत्तर प्रदेश’ का संदेश था। सिर्फ और सिर्फ मोदी की तस्वीर और संगत देते एम्स और खाद कारखाने के भविष्य के स्वरूप वाले फोटो। साथ ही 265 से अधिक सीटें जिताने का आह्वान।
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कहने को मोदी का यह कार्यक्त्रस्म पूर्वांचल के विकास को मजबूती और स्थानीय लोगों को सहूलियत देने के वादे पर आधारित दो बड़े प्रोजेक्ट के शिलान्यास पर केंद्रित था लेकिन तकरीर से लोगों के जेहन में स्पष्ट तस्वीर उभर आई कि मूल में यूपी के चुनाव की तैयारी है। किसान, गन्ना, स्वास्थ्य, सड़क, ग्रामीण विद्युतीकरण के लिए केंद्र सरकार के कामों को गिनाकर जहां भाजपाई हुकूमत को सौ में से सौ नंबर देने की कोशिश की, वहीं यूपी में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए केंद्र से स्वीकृत सात हजार करोड़ का इस्तेमाल न कर पाने का आक्षेप अखिलेश सरकार पर लगाकर आह्वान भी किया कि यूपी में भी केंद्र की तरह दौड़ने वाली सरकार लाओ, तभी बात बनेगी।
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मोदी की स्क्रिप्ट यह भी साफ किया कि यूपी में भाजपा के चुनाव प्रचार का मुख्य बिंदु केंद्र सरकार के अब तक के ठोस काम का ब्यौरा होगा और उनके व्यक्तित्व को केंद्र में रखकर ही यूपी का चुनाव लड़ा जाएगा। इसके संकेत मंच और पंडाल की व्यवस्थाओं ने भी दिए। फर्श और परिसर की सज्जा में इस्तेमाल हुए रंगों में केसरिया का बर्चस्व भले था लेकिन बैकड्रॉप से लेकर कार्यक्त्रस्म में गूंजते नारों के बीच राम, मंदिर, मजहब विशेष से लगाव या अलगाव जताने वाली कोई बात नहीं आई। यूपी में पिछड़ों को लुभाने, दलितों को करीब लाने के चुनावी अभियान के बावजूद पिछड़े वोटों के प्रभाव वाले पूर्वांचल में मोदी ने न सिर्फ इस मुद्दे पर खामोशी बरती बल्कि अंत में आह्वान किया कि जाति की जगह विकास को तरजीह दें। दयाशंकर सिंह के मायावती पर दिए बयान से उठा सियासी भूचाल इस खामोशी की बड़ी वजह हो सकती है।
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सहारनपुर में 26 मई को हुई मोदी की रैली से गोरखपुर के कार्यक्त्रस्म की तुलना करें तो राम की जगह काम और इबारत की जगह विकास की इमारत को अहमियत का साम्य देखने को मिलता है। विकास पर्व बताए गए सहारनपुर के मंच के बैकड्रॉप पर मोदी की तस्वीर के साथ ‘बदलता भारत’ ‘बदल रहा भारत’ का नारा था तो गोरखपुर के मंच के पार्श्व में भी भाजपाई झंडे की रंगत, कमल, शीर्ष नेताओं के चेहरों से परहेज रखते हुए ‘बदल रहा है देश, बदलना है उत्तर प्रदेश’ का संदेश था। सिर्फ और सिर्फ मोदी की तस्वीर और संगत देते एम्स और खाद कारखाने के भविष्य के स्वरूप वाले फोटो। साथ ही 265 से अधिक सीटें जिताने का आह्वान।