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विद्यार्थियों ने यूनिवर्सिटी प्रशासनिक भवन पर जड़ा ताला
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Fri, 18 Mar 2016 08:12 PM IST
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प्रशासनिक भवन में डीन कार्यालय में विधि विभागाध्यक्ष व शिक्षक कों बंधक बनाकर नारेबाजी करते छात्र।
- फोटो : shivharsh
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शुल्क प्रतिपूर्ति के चलते रिजल्ट रोक देने के विरोध में तीन दिनों से गोरखपुर यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक पर धरने पर बैठे विधि द्वितीय सेमेस्टर के एससी/एसटी विद्यार्थियों का गुस्सा शुक्रवार को फूट पड़ा। विद्यार्थियों ने प्रशासनिक भवन के मुख्य दरवाजे पर ताला जड़ दिया। मौके पर पहुंचे अधिष्ठाता छात्र कल्याण और प्रॉक्टर के आश्वासन के बाद तीन घंटे बाद विद्यार्थियों ने ताला खोला। यूनिवर्सिटी प्रशासन को विद्यार्थियों पर काबू पाने के लिए पुलिस तक का सहारा लेना पड़ा।
डॉ. अंबेडकर छात्र युवा चेतना समिति के अध्यक्ष ऋषि कपूर के नेतृत्व में धरने की शुरुआत दो दिन पहले हुई थी लेकिन जब दो दिन में यूनिवर्सिटी की ओर से इसे लेकर कोई पहल नहीं हुई तो शुक्रवार को 11 बजे विद्यार्थियों ने प्रशासनिक भवन के मुख्य गेट पर ताला लगा दिया और नारेबाजी करने लगे। शुक्रवार को इस धरने में अंबेडकरवादी छात्र सभा के कार्यकर्ता भी अमर पासवान के नेतृत्व शामिल हो गए तो मामला और गरम हो गया।
प्रशासनिक कार्य बाधित हुआ तो अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. सुधीर कुमार श्रीवास्तव और प्रॉक्टर डॉ. सतीश चंद्र पांडेय मौके पर पहुंचे और धरने पर बैठे विद्यार्थियों को समझाने लगे। जब विद्यार्थी रिजल्ट से कम पर किसी भी बात के लिए तैयार नहीं हुए तो डॉ. सुधीर ने विद्यार्थियों से इस शर्त पर रिजल्ट निकालने के लिए कहा कि वे इस बात का लिखित आश्वासन दें कि यदि शासन की ओर से शुल्क प्रतिपूर्ति का फैसला विद्यार्थियों के पक्ष में नहीं आया तो वे यूनिवर्सिटी में फीस जमा कर देंगे।
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विद्यार्थियों ने डॉ. सुधीर की बात मानी और लिखित रूप से आश्वासन दे दिया, लेकिन इसके बाद विद्यार्थी भी लिखित आश्वासन मांगने लगे और अधिष्ठाता को कार्यालय में घेर लिया। माहौल में तल्खी आई तो डॉ. सुधीर कार्यालय छोड़ कर चले गए। बाद में मौके पर पहुंचे विधि संकाय के डीन प्रो. जितेंद्र तिवारी और सहायक अधिष्ठाता गोपाल प्रसाद ने विद्यार्थियों को बताया कि शुल्क प्रतिपूर्ति को लेकर शनिवार को एजेंडा तय किया जाएगा और उसे 26 मार्च को परीक्षा समिति की बैठक में रखे जाने की बात कही गई। परीक्षा समिति जो भी निर्णय लेगी, उसे लागू किया जाएगा। 26 तारीख को फिर आंदोलन की चेतावनी के साथ विद्यार्थी देर शाम लौटे।
शासन की ओर से शुल्क प्रतिपूर्ति को लेकर लिए गए फैसले को मानने की बाबत लिखित शपथ पत्र विद्यार्थियों से ले लिया गया है। शासन का जो भी फैसला होगा, उसे 26 मार्च को परीक्षा समिति के सामने रखा जाएगा। परीक्षा समिति जो निर्णय लेगी, उसे लागू कर दिया जाएगा।
- प्रो. अशोक कुमार, कुलपति, गोरखपुर यूनिवर्सिटी
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डॉ. अंबेडकर छात्र युवा चेतना समिति के अध्यक्ष ऋषि कपूर के नेतृत्व में धरने की शुरुआत दो दिन पहले हुई थी लेकिन जब दो दिन में यूनिवर्सिटी की ओर से इसे लेकर कोई पहल नहीं हुई तो शुक्रवार को 11 बजे विद्यार्थियों ने प्रशासनिक भवन के मुख्य गेट पर ताला लगा दिया और नारेबाजी करने लगे। शुक्रवार को इस धरने में अंबेडकरवादी छात्र सभा के कार्यकर्ता भी अमर पासवान के नेतृत्व शामिल हो गए तो मामला और गरम हो गया।
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प्रशासनिक कार्य बाधित हुआ तो अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. सुधीर कुमार श्रीवास्तव और प्रॉक्टर डॉ. सतीश चंद्र पांडेय मौके पर पहुंचे और धरने पर बैठे विद्यार्थियों को समझाने लगे। जब विद्यार्थी रिजल्ट से कम पर किसी भी बात के लिए तैयार नहीं हुए तो डॉ. सुधीर ने विद्यार्थियों से इस शर्त पर रिजल्ट निकालने के लिए कहा कि वे इस बात का लिखित आश्वासन दें कि यदि शासन की ओर से शुल्क प्रतिपूर्ति का फैसला विद्यार्थियों के पक्ष में नहीं आया तो वे यूनिवर्सिटी में फीस जमा कर देंगे।
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विद्यार्थियों ने डॉ. सुधीर की बात मानी और लिखित रूप से आश्वासन दे दिया, लेकिन इसके बाद विद्यार्थी भी लिखित आश्वासन मांगने लगे और अधिष्ठाता को कार्यालय में घेर लिया। माहौल में तल्खी आई तो डॉ. सुधीर कार्यालय छोड़ कर चले गए। बाद में मौके पर पहुंचे विधि संकाय के डीन प्रो. जितेंद्र तिवारी और सहायक अधिष्ठाता गोपाल प्रसाद ने विद्यार्थियों को बताया कि शुल्क प्रतिपूर्ति को लेकर शनिवार को एजेंडा तय किया जाएगा और उसे 26 मार्च को परीक्षा समिति की बैठक में रखे जाने की बात कही गई। परीक्षा समिति जो भी निर्णय लेगी, उसे लागू किया जाएगा। 26 तारीख को फिर आंदोलन की चेतावनी के साथ विद्यार्थी देर शाम लौटे।
शासन की ओर से शुल्क प्रतिपूर्ति को लेकर लिए गए फैसले को मानने की बाबत लिखित शपथ पत्र विद्यार्थियों से ले लिया गया है। शासन का जो भी फैसला होगा, उसे 26 मार्च को परीक्षा समिति के सामने रखा जाएगा। परीक्षा समिति जो निर्णय लेगी, उसे लागू कर दिया जाएगा।
- प्रो. अशोक कुमार, कुलपति, गोरखपुर यूनिवर्सिटी