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हरियाली बांट रहे ‘हरियाली बाबा’
विवेक सिंह, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Mon, 05 Jun 2017 02:22 AM IST
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पौधों की देखभाल करते पलटन उर्फ हरियाली बाबा।
- फोटो : Amar Ujala
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रीजनल स्पोर्ट्स स्टेडियम के पास नर्सरी चलाने वाले किसान पलटन उर्फ हरियाली बाबा हरियाली की अलख जगने में लगे हैं। भले ही उनकी उम्र 70 साल हो लेकिन जोश और हौसला किसी युवा से कम नहीं। वह प्रदूषण से होने वाली हानि और हरियाली से मिलने वाले लाभ को शहरवासियों तक पहुंचाने की इच्छा पाले हिंद मिशन के तहत मुहिम चला रहे हैं। उन्हें इस पहल के लिए पूर्व में राज्यपाल विष्णुकांत शास्त्री सम्मानित भी कर चुके हैं।
हरियाली बाबा की यह यात्रा करीब 30 साल पहले लखनऊ से शुरू हुई। वहां विकास के नाम पर काटे जाने वाले पेड़ों को देखकर उनके मन इसे सहेजने की बात सूझी, बस फिर क्या था निकल पड़े इस राह पर। वह अब तक एक लाख से अधिक पौधों का निशुल्क वितरण चुके हैं। मूलरूप से कुशीनगर के भलुही स्थित मदारी पट्टी निवासी पलटन का पेड़-पौधों से लगाव देखते हुए लोग उन्हें हरियाली बाबा के नाम से बुलाते हैं।
दो साल से गोरखपुर में हरियाली के लिए काम करने वाले हरियाली बाबा वन विभाग की कार्यशैली से नाखुश हैं। उनका कहना है कि उद्यान खाली हैं। वनक्षेत्र सिकुड़ते जा रहे हैं, मगर इसे सहेजने की संजीदगी वन विभाग में नजर नहीं आती। यही वजह है कि हरियाली अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाती। उन्हाेंने बताया कि सरकारी कार्यालयों, प्राइवेट स्कूलों के साथ-आम आम नागरिकों तक हरियाली पहुंचाने के लिए उनकी टीम काम कर रही है।
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जल्द ही इस टीम का विस्तार किया जाएगा। घर-घर लोगों को बेहतर प्रजाति के पौधे, उन्नत खाद और गमले लागत मूल्य पर मुहैया कराए जाएंगे। हरियाली बाबा की नर्सरी में भी पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाले कई बोर्ड लगे हैं। उनकी नर्सरी में फलदार, फूलदार, खुशबूदार पौधे तो हैं ही, शोभा देने वाले, छाया देने वाले, इमारती, हर्बल पौधे, बीज, खाद, गमरिले भी उपलब्ध हैं।
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हरियाली बाबा की यह यात्रा करीब 30 साल पहले लखनऊ से शुरू हुई। वहां विकास के नाम पर काटे जाने वाले पेड़ों को देखकर उनके मन इसे सहेजने की बात सूझी, बस फिर क्या था निकल पड़े इस राह पर। वह अब तक एक लाख से अधिक पौधों का निशुल्क वितरण चुके हैं। मूलरूप से कुशीनगर के भलुही स्थित मदारी पट्टी निवासी पलटन का पेड़-पौधों से लगाव देखते हुए लोग उन्हें हरियाली बाबा के नाम से बुलाते हैं।
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दो साल से गोरखपुर में हरियाली के लिए काम करने वाले हरियाली बाबा वन विभाग की कार्यशैली से नाखुश हैं। उनका कहना है कि उद्यान खाली हैं। वनक्षेत्र सिकुड़ते जा रहे हैं, मगर इसे सहेजने की संजीदगी वन विभाग में नजर नहीं आती। यही वजह है कि हरियाली अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाती। उन्हाेंने बताया कि सरकारी कार्यालयों, प्राइवेट स्कूलों के साथ-आम आम नागरिकों तक हरियाली पहुंचाने के लिए उनकी टीम काम कर रही है।
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जल्द ही इस टीम का विस्तार किया जाएगा। घर-घर लोगों को बेहतर प्रजाति के पौधे, उन्नत खाद और गमले लागत मूल्य पर मुहैया कराए जाएंगे। हरियाली बाबा की नर्सरी में भी पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाले कई बोर्ड लगे हैं। उनकी नर्सरी में फलदार, फूलदार, खुशबूदार पौधे तो हैं ही, शोभा देने वाले, छाया देने वाले, इमारती, हर्बल पौधे, बीज, खाद, गमरिले भी उपलब्ध हैं।