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एम्स में प्रवेश से रोकने पर हंगामा, गार्ड को पीटा, कार्यालयों में तोड़फोड़
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एम्स में प्रवेश से रोकने पर हंगामा, गार्ड को पीटा, कार्यालयों में तोड़फोड़
गोरखपुर। एम्स गेट पर मजदूरों को प्रवेश से रोकने पर शनिवार को हंगामा हो गया। गार्ड की सख्ती के विरोध में गुस्साए मजदूरों ने एक गार्ड को पीट दिया और अंदर घुसकर तोड़फोड़ करने लगे। इंट्री रूम, टाइम ऑफिस, मेडिकल कार्यालय और सेफ्टी कार्यालय के कुर्सी मेज, अलमारी को तोड़ा डाला। मजदूरों के हंगामे की खबर पाते ही पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। नाराज मजदूर एकजुट होकर सुबह दस बजे के करीब एम्स के सामने सड़क जाम कर धरने पर बैठ गए। उनकी मांग थी कि गार्डों की मनमानी बंद की जाए। घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस ने समझा-बुझाकर करीब आधे घंटे बाद मजदूरों को सड़क से हटाया। करीब 10:30 बजे आवागमन शुरू कराया जा सका।
शनिवार की सुबह आठ बजे एम्स में निर्माण कार्य करा रही एलएनटी कंपनी के मजदूर गेट नंबर एक से प्रवेश कर रहे थे। कुछ मजदूरों के पास इंट्री पास नहीं था। ऐसे में वहां मौजूद गार्ड रामू ने उन्हें गेट पर ही रोक दिया और पीछे के गेट (सिंघड़िया) की ओर से अंदर जाने को कहा। इस पर गार्ड और मजदूरों में कहासुनी हो गई। आरोप है कि इस बीच गार्ड ने एक मजदूर को थप्पड़ मार दिया। इससे नाराज 15 से 20 की संख्या में मजदूरों ने गार्ड रूम के शीशे और कुर्सियां तोड़ डालीं। साथ ही लोहे के फाटक को भी तोड़ दिया। इस बीच गार्ड वहां से भाग निकला। विवाद की खबर अंदर पहुंची तो बाकी मजदूर भी काम छोड़कर वहां पहुंच गए और कई कार्यालयों में तोड़फोड़ की। करीब एक घंटे तक तोड़फोड़ चलती रही। सूचना पर तत्काल एम्स चौकी इंचार्ज शैलेंद्र शुक्ल, इंजीनियरिंग कॉलेज चौकी इंचार्ज मनीष यादव सहित भारी पुलिस फोर्स पहुंच गई। पुलिस ने उन्हें रोका तो मजदूर कसया हाइवे पर बैठ गए। सुबह 10 बजे से शुरू होकर करीब आधे घंटे तक चले इस जाम से वाहनों की कतार लग गई। पुलिस ने किसी तरह मजदूरों को सड़क से समझाकर हटाया। इस संबंध में इंस्पेक्टर कैंट रवि राय ने बताया कि मजदूरों और गार्ड में इंट्री को लेकर विवाद हुआ था। जिसके बाद मजदूरों ने तोड़फोड़ की है। अभी किसी पक्ष से तहरीर नहीं मिली है। तहरीर मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
नहीं माने मजदूर, काम ठप
हंगामे की सूचना पर साइट इंचार्ज, प्रोजेक्ट मैनेजर, ठेकेदार और सुपरवाइजर मौके पर पहुंचे और मजदूरों से बात की। मजदूरों ने उन्हें अपनी समस्या बताई। इस दौरान मजदूरों ने दो बजे के बाद निर्माण कार्य पर वापस आने की बात कही। लेकिन शाम तक किसी मजदूर ने काम शुरू नहीं किया।
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हंगामे से मरीजों की भी सांसत
हंगामा होने की वजह से तमाम मरीजों को भी सांसत झेलनी पड़ी। मारपीट के दौरान कई मरीज और तीमारदार सकते में आ गए। पुलिस के आने के बाद इलाज रोज की तरह ही शुरू कराया गया।
कई दिनों से पनप रहा था विवाद
मजदूरों को दूसरे गेट से भेजे जाने की मनमानी पिछले कई दिनों से चल रही है। इंट्री पास होने के बावजूद भी उन्हें दूसरे गेट से आने को कहा जाता है जिसकी दूरी करीब दो किलोमीटर है। यही वजह है कि मजदूर दूसरे गेट से जाने की जगह उसी गेट से इंट्री देने की सिफारिश करते हैं।
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गोरखपुर। एम्स गेट पर मजदूरों को प्रवेश से रोकने पर शनिवार को हंगामा हो गया। गार्ड की सख्ती के विरोध में गुस्साए मजदूरों ने एक गार्ड को पीट दिया और अंदर घुसकर तोड़फोड़ करने लगे। इंट्री रूम, टाइम ऑफिस, मेडिकल कार्यालय और सेफ्टी कार्यालय के कुर्सी मेज, अलमारी को तोड़ा डाला। मजदूरों के हंगामे की खबर पाते ही पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। नाराज मजदूर एकजुट होकर सुबह दस बजे के करीब एम्स के सामने सड़क जाम कर धरने पर बैठ गए। उनकी मांग थी कि गार्डों की मनमानी बंद की जाए। घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस ने समझा-बुझाकर करीब आधे घंटे बाद मजदूरों को सड़क से हटाया। करीब 10:30 बजे आवागमन शुरू कराया जा सका।
शनिवार की सुबह आठ बजे एम्स में निर्माण कार्य करा रही एलएनटी कंपनी के मजदूर गेट नंबर एक से प्रवेश कर रहे थे। कुछ मजदूरों के पास इंट्री पास नहीं था। ऐसे में वहां मौजूद गार्ड रामू ने उन्हें गेट पर ही रोक दिया और पीछे के गेट (सिंघड़िया) की ओर से अंदर जाने को कहा। इस पर गार्ड और मजदूरों में कहासुनी हो गई। आरोप है कि इस बीच गार्ड ने एक मजदूर को थप्पड़ मार दिया। इससे नाराज 15 से 20 की संख्या में मजदूरों ने गार्ड रूम के शीशे और कुर्सियां तोड़ डालीं। साथ ही लोहे के फाटक को भी तोड़ दिया। इस बीच गार्ड वहां से भाग निकला। विवाद की खबर अंदर पहुंची तो बाकी मजदूर भी काम छोड़कर वहां पहुंच गए और कई कार्यालयों में तोड़फोड़ की। करीब एक घंटे तक तोड़फोड़ चलती रही। सूचना पर तत्काल एम्स चौकी इंचार्ज शैलेंद्र शुक्ल, इंजीनियरिंग कॉलेज चौकी इंचार्ज मनीष यादव सहित भारी पुलिस फोर्स पहुंच गई। पुलिस ने उन्हें रोका तो मजदूर कसया हाइवे पर बैठ गए। सुबह 10 बजे से शुरू होकर करीब आधे घंटे तक चले इस जाम से वाहनों की कतार लग गई। पुलिस ने किसी तरह मजदूरों को सड़क से समझाकर हटाया। इस संबंध में इंस्पेक्टर कैंट रवि राय ने बताया कि मजदूरों और गार्ड में इंट्री को लेकर विवाद हुआ था। जिसके बाद मजदूरों ने तोड़फोड़ की है। अभी किसी पक्ष से तहरीर नहीं मिली है। तहरीर मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
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नहीं माने मजदूर, काम ठप
हंगामे की सूचना पर साइट इंचार्ज, प्रोजेक्ट मैनेजर, ठेकेदार और सुपरवाइजर मौके पर पहुंचे और मजदूरों से बात की। मजदूरों ने उन्हें अपनी समस्या बताई। इस दौरान मजदूरों ने दो बजे के बाद निर्माण कार्य पर वापस आने की बात कही। लेकिन शाम तक किसी मजदूर ने काम शुरू नहीं किया।
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हंगामे से मरीजों की भी सांसत
हंगामा होने की वजह से तमाम मरीजों को भी सांसत झेलनी पड़ी। मारपीट के दौरान कई मरीज और तीमारदार सकते में आ गए। पुलिस के आने के बाद इलाज रोज की तरह ही शुरू कराया गया।
कई दिनों से पनप रहा था विवाद
मजदूरों को दूसरे गेट से भेजे जाने की मनमानी पिछले कई दिनों से चल रही है। इंट्री पास होने के बावजूद भी उन्हें दूसरे गेट से आने को कहा जाता है जिसकी दूरी करीब दो किलोमीटर है। यही वजह है कि मजदूर दूसरे गेट से जाने की जगह उसी गेट से इंट्री देने की सिफारिश करते हैं।