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दो असलहे ऑल इंडिया परमिट के, जांच का दायरा बढ़ा
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दो असलहे ऑल इंडिया परमिट के, जांच का दायरा बढ़ा
गोरखपुर। फर्जी लाइसेंस पर असलहा खरीदने के तार कहां फैले हैं इसकी जांच में जुटी एसआईटी के सामने दिन प्रतिदिन जो जो तथ्य आ रहे हैं, वे चौंकाने वाले हैं। खोराबार में जिन दस लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें दो के पास ऑल इंडिया परमिट असलहे हैं।
इस जानकारी के बाद एसआईटी की जांच का दायरा बढ़ गया है। जांच की जा रही है कि इन असलहों से संबंधित फाइल शासन स्तर से भेज कर ऑल इंडिया परमिट दिलाई गई है या फर्जी लाइसेंस बनाने वाले गिरोह ने अपने स्तर से ही ऑल इंडिया परमिट दे दिया है। जांच अधिकारी एएसपी बोत्रे रोहन प्रमोद ने बताया कि दो असलहे ऑल इंडिया परमिट के मिले हैं उनकी जांच कराई जा रही है।
इनके नाम लाइसेंस जारी
- लाइसेंस नंबर 3400, विनोद कुमार पुत्र बसंत निवासी कुईं बाजार थाना खोराबार को फर्जी तरीके से 25 फरवरी 2003 को लाइसेंस जारी हुआ, जांच में पता चला कि इस लाइसेंस पर डॉ. जमीर अहमद पुत्र नजीर अहमद निवासी तुर्कमानपुर थाना राजघाट का लाइसेंस है जो 17 अगस्त 1992 को जारी हुआ था। उसे काटकर विनोद का नाम चढ़ाया गया है।
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- लाइसेंस नंबर 3333, जगदीश शुक्ला निवासी भैंसहा टोला जर्दा का 12 दिसंबर 2001 को फर्जी तरीके से लाइसेंस जारी हुआ। जांच में पता चला कि इस नंबर का लाइसेंस शाहपुर थाना क्षेत्र के बशारतपुर गड़ेरी टोला निवासी रामफल यादव के नाम से चार जुलाई 1992 को जारी हुआ था।
-लाइसेंस नंबर 3449 राम निवास यादव निवासी जंगल चवरी थाना खोराबार का 16 मार्च 2006 को फर्जी तरीके से लाइसेंस जारी हुआ है। इस नंबर का लाइसेंस गुलरिहा थाना क्षेत्र के डुमरी नंबर एक निवासी फेकू के नाम 9 सितंबर 1992 को जारी हुआ था।
- लाइसेंस नंबर 4842, एसबीबीएल मो. बिन कासिम निवासी जंगल सिकरी थाना खोराबार को ऑल इंडिया परमिशन मिला है, यह 31 दिसंबर 1995 को फर्जी तरीके से जारी हुआ। जांच में पता चला कि खोराबार के मूल शस्त्र रजिस्टर के अनुसार अंतिम लाइसेंस नंबर 3945 है जो भुनेश्वर पांडेय पुत्र कैलाश निवासी जंगल सिकरी थाना खोराबार के नाम है।
लाइसेंस नंबर 3945 के आगे के क्रमांक का लाइसेंस जारी नहीं हुआ है। मो. बिन कासिम के दूसरे लाइसेंस नंबर 3666 पर रिवाल्वर, पिस्टल 7 जनवरी 2007 को फर्जी तरीके से जारी हुआ। खोराबार के मूल शस्त्र रजिस्टर के अनुसार 3666 नंबर पर सत्य प्रकाश सिंह निवासी 618 ई बौलिया रेलवे कालोनी क्लब उत्तरी रेलवे के नाम एसबीबीएल गन का लाइसेंस 1 जनवरी 1993 को जारी हुआ है।
- लाइसेंस नंबर 3301 रामहित यादव निवासी छपरा खोराबार के नाम 14 अगस्त 2000 को फर्जी तरीके से जारी किया गया । जांच में पता चला कि इस नंबर पर खोराबार के मूल रजिस्टर में मंगल प्रसाद गुप्ता आशू लिपिक गन अधिकारी सदर निवासी छोटेकाजीपुर माली टोला थाना कोतवाली का नाम दर्ज है। उनके नाम 24 जून 1992 को लाइसेंस जारी किया गया है।
- लाइसेंस नंबर 3375 रामअशीष निषाद निवासी मिर्जापुर खोराबार एसबीबीएल गन 26 सितंबर 2002 को फर्जी तरीके से जारी। जांच में पता चला कि इस नंबर पर जगन्नाथ प्रसाद गुप्ता निवासी बंसतपुर थाना राजघाट को डीबीबीएल गन 23 जुलाई 1992 को जारी हुआ था।
- लाइसेंस नंबर 3291 विजय प्रताप निवासी जंगल रामलखना खोराबार के नाम तीन लाइसेंस बना है जिसमें दो अन्य का नंबर 3764 और 4830 है। तीन शस्त्र 3291 नंबर पर चढ़ाए गए हैं। रिवाल्वरए असम राइफल, डीबीबीएल गन है। सभी लाइसेंस अलग-अलग डेट में जारी हैं। जांच में पता चला कि 3291 नंबर रिखन जैन निवासी दीवान बाजार कोतवाली के नाम रिवाल्वर, पिस्टल का लाइसेंस है। यह 18 जून 1992 को जारी हुआ है।
- लाइसेंस नंबर 3374 एमहताब आलम निवासी जंगल चौवरी खोराबार एसडीबीएल गन 23 सितंबर 2002 जारी। जांच में पता चला कि राजकुमार निवासी रहमत नगर राजघाट के नाम डीबीबीएल गन 27 जुलाई 1992 को जारी हुआ था।
- लाइसेंस नंबर 3343 एए रामचंद्र निवासी जंगल रामलखना खोराबार का 24 दिसंबर 2001 को फर्जी तरीके से राइफल का लाइसेंस जारी। जांच में पता चला कि 3343 नंबर पर हांसूपुर, राजघाट के राजीव शंकर त्रिपाठी के नाम डीबीबीएल गन का लाइसेंस है। जबकि 3343 नंबर पर कोई लाइसेंस जारी ही नहीं हुआ है।
- लाइसेंस नंबर 3309, रामनयन निवासी नौवा अव्वल खोराबार डीबीबीएल गन फर्जी तरीके से 24 फरवरी 2001 को जारी हुआ। जांच करने पर पता चला कि इस नंबर पर ज्ञानेंद्र प्रसाद गुप्ता निवासी बसंतपुर राजघाट के नाम दर्ज है। 25 जून 1992 को जारी हुआ जो बाद में एडीएम सिटी के आदेश पर पिस्टल में परिवर्तित हुआ।
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गोरखपुर। फर्जी लाइसेंस पर असलहा खरीदने के तार कहां फैले हैं इसकी जांच में जुटी एसआईटी के सामने दिन प्रतिदिन जो जो तथ्य आ रहे हैं, वे चौंकाने वाले हैं। खोराबार में जिन दस लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें दो के पास ऑल इंडिया परमिट असलहे हैं।
इस जानकारी के बाद एसआईटी की जांच का दायरा बढ़ गया है। जांच की जा रही है कि इन असलहों से संबंधित फाइल शासन स्तर से भेज कर ऑल इंडिया परमिट दिलाई गई है या फर्जी लाइसेंस बनाने वाले गिरोह ने अपने स्तर से ही ऑल इंडिया परमिट दे दिया है। जांच अधिकारी एएसपी बोत्रे रोहन प्रमोद ने बताया कि दो असलहे ऑल इंडिया परमिट के मिले हैं उनकी जांच कराई जा रही है।
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इनके नाम लाइसेंस जारी
- लाइसेंस नंबर 3400, विनोद कुमार पुत्र बसंत निवासी कुईं बाजार थाना खोराबार को फर्जी तरीके से 25 फरवरी 2003 को लाइसेंस जारी हुआ, जांच में पता चला कि इस लाइसेंस पर डॉ. जमीर अहमद पुत्र नजीर अहमद निवासी तुर्कमानपुर थाना राजघाट का लाइसेंस है जो 17 अगस्त 1992 को जारी हुआ था। उसे काटकर विनोद का नाम चढ़ाया गया है।
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- लाइसेंस नंबर 3333, जगदीश शुक्ला निवासी भैंसहा टोला जर्दा का 12 दिसंबर 2001 को फर्जी तरीके से लाइसेंस जारी हुआ। जांच में पता चला कि इस नंबर का लाइसेंस शाहपुर थाना क्षेत्र के बशारतपुर गड़ेरी टोला निवासी रामफल यादव के नाम से चार जुलाई 1992 को जारी हुआ था।
-लाइसेंस नंबर 3449 राम निवास यादव निवासी जंगल चवरी थाना खोराबार का 16 मार्च 2006 को फर्जी तरीके से लाइसेंस जारी हुआ है। इस नंबर का लाइसेंस गुलरिहा थाना क्षेत्र के डुमरी नंबर एक निवासी फेकू के नाम 9 सितंबर 1992 को जारी हुआ था।
- लाइसेंस नंबर 4842, एसबीबीएल मो. बिन कासिम निवासी जंगल सिकरी थाना खोराबार को ऑल इंडिया परमिशन मिला है, यह 31 दिसंबर 1995 को फर्जी तरीके से जारी हुआ। जांच में पता चला कि खोराबार के मूल शस्त्र रजिस्टर के अनुसार अंतिम लाइसेंस नंबर 3945 है जो भुनेश्वर पांडेय पुत्र कैलाश निवासी जंगल सिकरी थाना खोराबार के नाम है।
लाइसेंस नंबर 3945 के आगे के क्रमांक का लाइसेंस जारी नहीं हुआ है। मो. बिन कासिम के दूसरे लाइसेंस नंबर 3666 पर रिवाल्वर, पिस्टल 7 जनवरी 2007 को फर्जी तरीके से जारी हुआ। खोराबार के मूल शस्त्र रजिस्टर के अनुसार 3666 नंबर पर सत्य प्रकाश सिंह निवासी 618 ई बौलिया रेलवे कालोनी क्लब उत्तरी रेलवे के नाम एसबीबीएल गन का लाइसेंस 1 जनवरी 1993 को जारी हुआ है।
- लाइसेंस नंबर 3301 रामहित यादव निवासी छपरा खोराबार के नाम 14 अगस्त 2000 को फर्जी तरीके से जारी किया गया । जांच में पता चला कि इस नंबर पर खोराबार के मूल रजिस्टर में मंगल प्रसाद गुप्ता आशू लिपिक गन अधिकारी सदर निवासी छोटेकाजीपुर माली टोला थाना कोतवाली का नाम दर्ज है। उनके नाम 24 जून 1992 को लाइसेंस जारी किया गया है।
- लाइसेंस नंबर 3375 रामअशीष निषाद निवासी मिर्जापुर खोराबार एसबीबीएल गन 26 सितंबर 2002 को फर्जी तरीके से जारी। जांच में पता चला कि इस नंबर पर जगन्नाथ प्रसाद गुप्ता निवासी बंसतपुर थाना राजघाट को डीबीबीएल गन 23 जुलाई 1992 को जारी हुआ था।
- लाइसेंस नंबर 3291 विजय प्रताप निवासी जंगल रामलखना खोराबार के नाम तीन लाइसेंस बना है जिसमें दो अन्य का नंबर 3764 और 4830 है। तीन शस्त्र 3291 नंबर पर चढ़ाए गए हैं। रिवाल्वरए असम राइफल, डीबीबीएल गन है। सभी लाइसेंस अलग-अलग डेट में जारी हैं। जांच में पता चला कि 3291 नंबर रिखन जैन निवासी दीवान बाजार कोतवाली के नाम रिवाल्वर, पिस्टल का लाइसेंस है। यह 18 जून 1992 को जारी हुआ है।
- लाइसेंस नंबर 3374 एमहताब आलम निवासी जंगल चौवरी खोराबार एसडीबीएल गन 23 सितंबर 2002 जारी। जांच में पता चला कि राजकुमार निवासी रहमत नगर राजघाट के नाम डीबीबीएल गन 27 जुलाई 1992 को जारी हुआ था।
- लाइसेंस नंबर 3343 एए रामचंद्र निवासी जंगल रामलखना खोराबार का 24 दिसंबर 2001 को फर्जी तरीके से राइफल का लाइसेंस जारी। जांच में पता चला कि 3343 नंबर पर हांसूपुर, राजघाट के राजीव शंकर त्रिपाठी के नाम डीबीबीएल गन का लाइसेंस है। जबकि 3343 नंबर पर कोई लाइसेंस जारी ही नहीं हुआ है।
- लाइसेंस नंबर 3309, रामनयन निवासी नौवा अव्वल खोराबार डीबीबीएल गन फर्जी तरीके से 24 फरवरी 2001 को जारी हुआ। जांच करने पर पता चला कि इस नंबर पर ज्ञानेंद्र प्रसाद गुप्ता निवासी बसंतपुर राजघाट के नाम दर्ज है। 25 जून 1992 को जारी हुआ जो बाद में एडीएम सिटी के आदेश पर पिस्टल में परिवर्तित हुआ।