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गोरखपुर में नए साल पर होगी नई शुरुआत, मापी जा सकेगी भूकंप की तीव्रता
Mon, 23 Dec 2019 03:52 PM IST
विजय जैन
राजन राय, गोरखपुर
राजन राय, गोरखपुर
Published by: विजय जैन
Updated Mon, 23 Dec 2019 03:52 PM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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जल्द ही गोरखपुर में भी भूकंप की तीव्रता मापी जा सकेगी। भूकंप का केंद्र बिंदु कहां है, इसका सटीक पता लगेगा। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) में नए साल में भूकंप मापक केंद्र खुलेगा। भारतीय भूकंप विज्ञान संस्थान, गांधीनगर (अहमदाबाद) यहां भूकंप मापी संयंत्र लगाएगा और एमएएमएमयूटी से मिलकर काम करेगा।
पहले चरण की वार्ता हो चुकी है, अब दोनों संस्थानों में जल्द ही अनुबंध होगा।
हिमालय से सटे होने के कारण गोरखपुर और आसपास के इलाके में भूकंप की आशंका बनी रहती है। इसे देखते हुए भारतीय भूकंप विज्ञान संस्थान ने पूरे देश में मेजरमेंट का नेटवर्क डेवलेप करने की योजना बनाई है। इसी क्रम में संस्थान ने गोरखपुर में अपना एक केंद्र खोलने का निर्णय लिया है।
एमएमएमयूटी में भूकंप मापक केंद्र स्थापित होने से भूकंप का केंद्र पता लगाने में मौसम वैज्ञानिकों को सहायता मिलेगी। संयंत्रों से तरंगों के कंपन को रिकार्ड किया जाएगा। इससे शोधार्थियों को शोध करने में मदद मिलेगी। साथ ही विशेषज्ञों की मदद से शिक्षक और छात्र भूकंप की आशंका पर हमेशा नजर बनाए रखेंगे। इससे आपदा प्रबंधन में मदद भी मिलेगी। भारतीय भूकंप विज्ञान संस्थान गांधीनगर से आई एक टीम ने पिछले दिनों एमएमएमयूटी आकर वार्ता भी की है।
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एमएमएमयूटी के शिक्षक एवं पर्यावरणविद डॉ गोविंद पांडेय ने बताया कि जनवरी में टीम फिर आएगी। तब अधिकृत रूप से सहमति बनेगी। भूकंप मापक केंद्र खुलने से नेपाल सीमा पर भी लगातार मानीटरिंग हो सकेगी। सटीक जानकारी मिलने से हम होने वाले जानमाल के नुकसान से बच सकेंगे।
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पहले चरण की वार्ता हो चुकी है, अब दोनों संस्थानों में जल्द ही अनुबंध होगा।
हिमालय से सटे होने के कारण गोरखपुर और आसपास के इलाके में भूकंप की आशंका बनी रहती है। इसे देखते हुए भारतीय भूकंप विज्ञान संस्थान ने पूरे देश में मेजरमेंट का नेटवर्क डेवलेप करने की योजना बनाई है। इसी क्रम में संस्थान ने गोरखपुर में अपना एक केंद्र खोलने का निर्णय लिया है।
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एमएमएमयूटी में भूकंप मापक केंद्र स्थापित होने से भूकंप का केंद्र पता लगाने में मौसम वैज्ञानिकों को सहायता मिलेगी। संयंत्रों से तरंगों के कंपन को रिकार्ड किया जाएगा। इससे शोधार्थियों को शोध करने में मदद मिलेगी। साथ ही विशेषज्ञों की मदद से शिक्षक और छात्र भूकंप की आशंका पर हमेशा नजर बनाए रखेंगे। इससे आपदा प्रबंधन में मदद भी मिलेगी। भारतीय भूकंप विज्ञान संस्थान गांधीनगर से आई एक टीम ने पिछले दिनों एमएमएमयूटी आकर वार्ता भी की है।
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एमएमएमयूटी के शिक्षक एवं पर्यावरणविद डॉ गोविंद पांडेय ने बताया कि जनवरी में टीम फिर आएगी। तब अधिकृत रूप से सहमति बनेगी। भूकंप मापक केंद्र खुलने से नेपाल सीमा पर भी लगातार मानीटरिंग हो सकेगी। सटीक जानकारी मिलने से हम होने वाले जानमाल के नुकसान से बच सकेंगे।
25 अप्रैल 2015 को आए थे तेज झटके
गोरखपुर। अप्रैल 2015 में एक ही दिन में सात घंटे में चार बार भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए थे। नेपाल में भारी तबाही मची थी। मकान, स्कूल का छज्जा गिरने और चहारदिवारी गिरने से गोरखपुर जोन में छह लोगों की मौत हो गई थी, जिसमें गोरखपुर जिले के तीन लोग शामिल थे। यहां 200 से ज्यादा मकानों में दरारें आ गई थीं। इसके बाद मई 2015 को भी तेज झटका आया। करीब एक मिनट तक भूकंप के झटके महसूस किए थे। मकान, दफ्तर छोड़कर लोग बाहर आ गए थे। इस दौरान पूरे देश में 36 लोगों की मौत हुई थी।
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जोन 4 में है गोरखपुर
गोरखपुर। नेपाल से सटे होने के कारण गोरखपुर भूकंप के लिहाज से काफी संवेदनशील माना जाता है। इसीलिए इसे सिसमिक जोन 4 में रखा गया है। भूकंप मापी केंद्र होने से रिक्टर स्केल पर 2 से 3 की तीव्रता के भूकंप को भी मापा जा सकेगा। साथ भी तरंगों के मूवमेंट के बारे में भी जानकारी हो सकेगी।
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जोन 4 में है गोरखपुर
गोरखपुर। नेपाल से सटे होने के कारण गोरखपुर भूकंप के लिहाज से काफी संवेदनशील माना जाता है। इसीलिए इसे सिसमिक जोन 4 में रखा गया है। भूकंप मापी केंद्र होने से रिक्टर स्केल पर 2 से 3 की तीव्रता के भूकंप को भी मापा जा सकेगा। साथ भी तरंगों के मूवमेंट के बारे में भी जानकारी हो सकेगी।