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नगर विधायक ने नये सीवर लाइन डालने का काम रुकवाया
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अब बिना सड़क खोदे डाली जाएगी सीवर लाइन डालन
गोरखपुर। शहर में सीवर लाइन डालने का काम अब बिना सड़कों को खोदे संभव हो सकेगा। नगर विधायक डॉ. राधामोहन दास अग्रवाल की ट्रेंचलेस सीवरिंग सिस्टम (बगैर खुदाई के सीवर लाइन डालने की व्यवस्था) से काम कराने की मांग जल निगम के प्रबंध निदेशक ने स्वीकार कर ली है। इसके लिए जल्द ही रिवाइज इस्टीमेट तैयार कर स्वीकृत कराया जाएगा। दरअसल, नंदा नगर और इंजीनियरिंग कॉलेज वार्ड में सीवर लाइन डालने के दौरान सड़कें बदहाल किए जाने से नाराज नगर विधायक डॉ. राधामोहन दास अग्रवाल ने जलनिगम को नई खुदाई करने से रोक दिया था। उन्होंने जल निगम के प्रबंध निदेशक से इस बारे में बात की थी।
नंदानगर से देवरिया बाईपास तक सीवर लाइन बिछाने के दौरान जलनिगम ने सड़कें खोदीं थीं। इसे बनवाने की बारी आई तो कुछ को अधूरा छोड़ दिया जहां निर्माण हुआ वहां की सड़कें घटिया हैं। इससे परेशान लोगों ने नगर विधायक से शिकायत की थी। नगर विधायक ने जलनिगम के प्रबंध निदेशक अनिल कुमार बाजपेयी से बात कर नई खुदाई न करने और आगे का काम ट्रेंचलेस सीवरिंग सिस्टम से कराने की मांग की।
ट्रेंचलेस पद्धति से डाली जाएगी 86 किलोमीटर सीवर लाइन
पहले चरण में शहर में कुल 140 किलोमीटर सीवर लाइन बिछाई जानी है। इसमें 54 किमी तक सीवर लाइन सड़के खोदकर डाली जा चुकी है। नगर विधायक ने जल निगम के अधीक्षण अभियंता राकेश कुमार बंसल से कहा है कि जल्द से जल्द 54 किमी में व्यवस्था पूरी करके इसे ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़कर सीवर सिस्टम प्रारंभ करा दें। सड़कें भी दुरुस्त कराएं। बाकी 86 किलोमीटर सीवर लाइन को ट्रेंचलेस पद्धति से डालने के लिए रिवाइज एस्टिमेट स्वीकृत कराएं।
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किफायती होगा ट्रेंचलेस सीवरिंग सिस्टम
सीवर लाइन की खुदाई के दौरान पहले चरण में ही करीब 140 किलोमीटर सड़क खस्ताहाल हो चुकीं हैं। इसको बनवाने में करीब 98 करोड़ रुपये की लागत आएगी। पूरे शहर में अनुमानित रूप से 6500 किलोमीटर सड़कें हैं। जिनको बनवाने में ही सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च हो जाएंगे। ऐसे में ट्रेंचलेस सीवरिंग सिस्टम से काफी पैसे की बचत होगी।
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गोरखपुर। शहर में सीवर लाइन डालने का काम अब बिना सड़कों को खोदे संभव हो सकेगा। नगर विधायक डॉ. राधामोहन दास अग्रवाल की ट्रेंचलेस सीवरिंग सिस्टम (बगैर खुदाई के सीवर लाइन डालने की व्यवस्था) से काम कराने की मांग जल निगम के प्रबंध निदेशक ने स्वीकार कर ली है। इसके लिए जल्द ही रिवाइज इस्टीमेट तैयार कर स्वीकृत कराया जाएगा। दरअसल, नंदा नगर और इंजीनियरिंग कॉलेज वार्ड में सीवर लाइन डालने के दौरान सड़कें बदहाल किए जाने से नाराज नगर विधायक डॉ. राधामोहन दास अग्रवाल ने जलनिगम को नई खुदाई करने से रोक दिया था। उन्होंने जल निगम के प्रबंध निदेशक से इस बारे में बात की थी।
नंदानगर से देवरिया बाईपास तक सीवर लाइन बिछाने के दौरान जलनिगम ने सड़कें खोदीं थीं। इसे बनवाने की बारी आई तो कुछ को अधूरा छोड़ दिया जहां निर्माण हुआ वहां की सड़कें घटिया हैं। इससे परेशान लोगों ने नगर विधायक से शिकायत की थी। नगर विधायक ने जलनिगम के प्रबंध निदेशक अनिल कुमार बाजपेयी से बात कर नई खुदाई न करने और आगे का काम ट्रेंचलेस सीवरिंग सिस्टम से कराने की मांग की।
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ट्रेंचलेस पद्धति से डाली जाएगी 86 किलोमीटर सीवर लाइन
पहले चरण में शहर में कुल 140 किलोमीटर सीवर लाइन बिछाई जानी है। इसमें 54 किमी तक सीवर लाइन सड़के खोदकर डाली जा चुकी है। नगर विधायक ने जल निगम के अधीक्षण अभियंता राकेश कुमार बंसल से कहा है कि जल्द से जल्द 54 किमी में व्यवस्था पूरी करके इसे ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़कर सीवर सिस्टम प्रारंभ करा दें। सड़कें भी दुरुस्त कराएं। बाकी 86 किलोमीटर सीवर लाइन को ट्रेंचलेस पद्धति से डालने के लिए रिवाइज एस्टिमेट स्वीकृत कराएं।
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किफायती होगा ट्रेंचलेस सीवरिंग सिस्टम
सीवर लाइन की खुदाई के दौरान पहले चरण में ही करीब 140 किलोमीटर सड़क खस्ताहाल हो चुकीं हैं। इसको बनवाने में करीब 98 करोड़ रुपये की लागत आएगी। पूरे शहर में अनुमानित रूप से 6500 किलोमीटर सड़कें हैं। जिनको बनवाने में ही सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च हो जाएंगे। ऐसे में ट्रेंचलेस सीवरिंग सिस्टम से काफी पैसे की बचत होगी।