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विशाखा समिति करेगी छेड़खानी प्रकरण की जांच
गोरखपुर। अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 04 Jan 2016 08:58 PM IST
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मेडिकल कॉलेज में रविवार को सामने आये सनसनीखेज छेड़खानी प्रकरण की जांच कॉलेज की विशाखा समिति करेगी। एक डॉक्टर पर नर्स की ओर से छेड़खानी के आरोप के बाद कॉलेज प्रशासन ने न केवल इसे लेकर निर्णय लिया बल्कि मामले की जांच का प्रपत्र भी कमेटी को सौंप दिया। जिम्मेदारी मिलने के बाद प्रो. रीना श्रीवास्तव के नेतृत्व वाली तीन सदस्यीय समिति ने जांच करना शुरू कर दी है।
शनिवार को कॉलेज के इंसेफेलाइटिस वार्ड की एक नर्स ने वार्ड के ही एक डॉक्टर पर छेड़खानी का आरोप लगाते 100 नंबर पर फोन कर दिया था। जब उसका कोई रिस्पांस नहीं मिला तो वह नर्स अपने पिता के साथ गुलरिहा थाने पर पहुच गई। मामला चूंकि डॉक्टर से जुड़ा था, इसलिए थानेदार ने नर्स को प्राचार्य के पास जाने की सलाह दी।
थानेदार की सलाह पर नर्स ने रविवार की सुबह प्राचार्य से मिलकर अपनी व्यथा बताई तो प्राचार्य ने मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया। प्राचार्य की रुख से संतुष्ट न होने पर नर्स फिर थाने पर पहुुंची और थानेदार से कहकर सम्बन्धित डॉक्टर को थाने पर बुलवाया। जब डॉक्टर थाने पर पहुंचे तो एक-दूसरे पर आरोप लगाने का दौर शुरू हो गया। स्थिति देख थानेदार ने कहा कि इस मामले को कॉलेज प्रशासन ही निपटाये तो बेहतर होगा।
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उसके बाद नर्स जब फिर कॉलेज प्राचार्य से मिलने पहुंची तो प्राचार्य ने मिलने से इनकार कर दिया। लेकिन मामले की जांच विशाखा समिति को सौंप दी। कॉलेज प्राचार्य प्रो. आरपी शर्मा ने बताया कि समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद ही किसी कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा।
2013 में गठित हुई विशाखा समिति
विशाखा समिति का गठन विशाखा गाइड लाइन के पालन के निर्देश में किया गया। विशाखा गाइड लाइन 1997 में तब अस्तित्व आयी, जब सुरक्षा को कामकाजी महिलाओं का मौलिक अधिकार मानते हुए कहा गया कि हर कंपनी में एक महिला कमेटी बनाई जाय, जो कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न रोके। लेकिन इसे लेकर सक्रियता तब बढ़ी दिल्ली के निर्भया कांड के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस गाइड लाइन को धरातल पर लाने का निर्देश दिया। इसी क्रम में जनवरी 2013 में तीन सदस्यीय विशाखा कमेटी बनाई गई।
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शनिवार को कॉलेज के इंसेफेलाइटिस वार्ड की एक नर्स ने वार्ड के ही एक डॉक्टर पर छेड़खानी का आरोप लगाते 100 नंबर पर फोन कर दिया था। जब उसका कोई रिस्पांस नहीं मिला तो वह नर्स अपने पिता के साथ गुलरिहा थाने पर पहुच गई। मामला चूंकि डॉक्टर से जुड़ा था, इसलिए थानेदार ने नर्स को प्राचार्य के पास जाने की सलाह दी।
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थानेदार की सलाह पर नर्स ने रविवार की सुबह प्राचार्य से मिलकर अपनी व्यथा बताई तो प्राचार्य ने मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया। प्राचार्य की रुख से संतुष्ट न होने पर नर्स फिर थाने पर पहुुंची और थानेदार से कहकर सम्बन्धित डॉक्टर को थाने पर बुलवाया। जब डॉक्टर थाने पर पहुंचे तो एक-दूसरे पर आरोप लगाने का दौर शुरू हो गया। स्थिति देख थानेदार ने कहा कि इस मामले को कॉलेज प्रशासन ही निपटाये तो बेहतर होगा।
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उसके बाद नर्स जब फिर कॉलेज प्राचार्य से मिलने पहुंची तो प्राचार्य ने मिलने से इनकार कर दिया। लेकिन मामले की जांच विशाखा समिति को सौंप दी। कॉलेज प्राचार्य प्रो. आरपी शर्मा ने बताया कि समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद ही किसी कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा।
2013 में गठित हुई विशाखा समिति
विशाखा समिति का गठन विशाखा गाइड लाइन के पालन के निर्देश में किया गया। विशाखा गाइड लाइन 1997 में तब अस्तित्व आयी, जब सुरक्षा को कामकाजी महिलाओं का मौलिक अधिकार मानते हुए कहा गया कि हर कंपनी में एक महिला कमेटी बनाई जाय, जो कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न रोके। लेकिन इसे लेकर सक्रियता तब बढ़ी दिल्ली के निर्भया कांड के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस गाइड लाइन को धरातल पर लाने का निर्देश दिया। इसी क्रम में जनवरी 2013 में तीन सदस्यीय विशाखा कमेटी बनाई गई।