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पीडब्लूडी के तीन अफसरों सहित आठ के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Wed, 14 Nov 2018 10:23 PM IST
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गोरखपुर। कौड़ीराम-गजपुर मार्ग से ताल दोहर मार्ग का टेंडर निकालने और निर्माण कार्यों में धांधली के साक्ष्य मिलने के बाद विजिलेंस ने लोक निर्माण विभाग के तीन अफसर, तीन कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालिक और दो ठेकेदार के खिलाफ भ्रष्टाचार की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है। मामला 2003 का है लेकिन 2017 में जांच पूरी हुई थी। अब शासन ने कानूनी कार्रवाई की अनुमति मिली है। मामला कैंट थाने में दर्ज हुआ है। इसकी जांच इंस्पेक्टर कैंट रवि राय करेंगे।
लोक निर्माण विभाग ने वर्ष 2003 में कौड़ीराम गजपुर मार्ग से ताल दोहर मार्ग (1.5 किलोमीटर लंबी) के निर्माण का टेंडर निकाला था लेकिन कोई कंपनी या फिर ठेकेदार सामने नहीं आया। इसके बाद 16 लाख 58 हजार रुपये की बजट वाली इस सड़क को अनुबंध से बनवाने का फैसला किया गया। विजिलेंस के इंस्पेक्टर राधराचार्य पांडेय ने कैंट पुलिस को जो तहरीर दी है, उसके मुताबिक विभाग के तत्कालीन अधिशासी अभियंता शशिभूषण दीक्षित और सहायक अभियंता पातंजलि श्रीवास्तव ने नियम दरकिनार करके मेसर्स आनंद ट्रेडर्स को नौ फीसदी ज्यादा रेट पर काम दे दिया। बाद में यही काम तत्कालीन अधिशासी अभियंता राकेश कुमार चौधरी ने किया। राकेश ने इसी काम का अनुबंध मेसर्स गंगोत्री इंटरप्राइजेज से कर लिया।
इसके बाद टेंडर निरस्त हुआ, फिर अलग-अलग कंपनी और ठेकेदार को काम देकर धांधली की गई। इस मामले में अफसर, कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालिक और ठेकेदार बराबर के भागीदार हैं। विजिलेंस को मामले की जांच नौ नवंबर 2006 में मिली थी, जो 2017 में पूरी कर ली गई। अब शासन ने एफआईआर की अनुमति दी है। कैंट पुलिस ने भ्रष्टाचार की धारा में मुकदमा दर्ज करके छानबीन शुरू कर दी है।
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लोक निर्माण विभाग ने वर्ष 2003 में कौड़ीराम गजपुर मार्ग से ताल दोहर मार्ग (1.5 किलोमीटर लंबी) के निर्माण का टेंडर निकाला था लेकिन कोई कंपनी या फिर ठेकेदार सामने नहीं आया। इसके बाद 16 लाख 58 हजार रुपये की बजट वाली इस सड़क को अनुबंध से बनवाने का फैसला किया गया। विजिलेंस के इंस्पेक्टर राधराचार्य पांडेय ने कैंट पुलिस को जो तहरीर दी है, उसके मुताबिक विभाग के तत्कालीन अधिशासी अभियंता शशिभूषण दीक्षित और सहायक अभियंता पातंजलि श्रीवास्तव ने नियम दरकिनार करके मेसर्स आनंद ट्रेडर्स को नौ फीसदी ज्यादा रेट पर काम दे दिया। बाद में यही काम तत्कालीन अधिशासी अभियंता राकेश कुमार चौधरी ने किया। राकेश ने इसी काम का अनुबंध मेसर्स गंगोत्री इंटरप्राइजेज से कर लिया।
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इसके बाद टेंडर निरस्त हुआ, फिर अलग-अलग कंपनी और ठेकेदार को काम देकर धांधली की गई। इस मामले में अफसर, कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालिक और ठेकेदार बराबर के भागीदार हैं। विजिलेंस को मामले की जांच नौ नवंबर 2006 में मिली थी, जो 2017 में पूरी कर ली गई। अब शासन ने एफआईआर की अनुमति दी है। कैंट पुलिस ने भ्रष्टाचार की धारा में मुकदमा दर्ज करके छानबीन शुरू कर दी है।
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