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बेलीपार में बनती थी नकली शराब, भेजते थे बिहार
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Mon, 16 Jul 2018 01:22 AM IST
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क्राइम
- फोटो : demo
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गोरखपुर। बेलीपार इलाके में नकली शराब बनाए जाने का पुलिस ने भंडाफोड़ किया। हरियाणा से स्प्रिट, ढक्कन और रैपर मंगाकर यहां पर नकली शराब तैयार करके फिर उसे बिहार भेजा जाता था। ट्रक चालक को गिरफ्तार कर पुलिस गिरोह के फरार दो सदस्यों की तलाश शुरू कर दी है।
एसपी क्राइम आलोक शर्मा ने पुलिस लाइंस में प्रेस कांफ्रेंस कर बताया कि स्वाट प्रभारी सत्य प्रकाश सिंह को मुखबिर के जरिए सूचना मिली थी कि हरियाणा से स्प्रिट और अन्य समान लाया जा रहा है। उससे नकली शराब तैयार की जाएगी। टीम ने आबकारी इंस्पेक्टर अमित कुमार श्रीवास्तव से संपर्क कर डवरपार में पहुंची और नाकाबंदी कर चेकिंग शुरू कर दी। उसी दौरान एक ट्रक को पकड़ा गया। तलाशी के दौरान उसमें से 60 ड्रम स्प्रिट, ढक्कन और दो ब्रांड के स्टीकर आदि बरामद किया गया। पकड़े गए चालक की पहचान पंजाब के पटियाला, डहरिया निवासी जज सिंह के रूप में हुई। पूछताछ में उसने बताया कि डवरपार निवासी अर्जुन जायसवाल और नियामत चक, कोतवाली निवासी सौरभ जायसवाल ने सामान मंगाया था। ये लोग नकली शराब तैयार कर बिहार भेजा करते थे। पुलिस को पूछताछ में पता चला है कि जो सामान बरामद हुआ है, उससे करीब 80 लाख रुपये कीमत की नकली शराब तैयार की जाती।
एसपी क्राइम आलोक शर्मा ने पुलिस लाइंस में प्रेस कांफ्रेंस कर बताया कि स्वाट प्रभारी सत्य प्रकाश सिंह को मुखबिर के जरिए सूचना मिली थी कि हरियाणा से स्प्रिट और अन्य समान लाया जा रहा है। उससे नकली शराब तैयार की जाएगी। टीम ने आबकारी इंस्पेक्टर अमित कुमार श्रीवास्तव से संपर्क कर डवरपार में पहुंची और नाकाबंदी कर चेकिंग शुरू कर दी। उसी दौरान एक ट्रक को पकड़ा गया। तलाशी के दौरान उसमें से 60 ड्रम स्प्रिट, ढक्कन और दो ब्रांड के स्टीकर आदि बरामद किया गया। पकड़े गए चालक की पहचान पंजाब के पटियाला, डहरिया निवासी जज सिंह के रूप में हुई। पूछताछ में उसने बताया कि डवरपार निवासी अर्जुन जायसवाल और नियामत चक, कोतवाली निवासी सौरभ जायसवाल ने सामान मंगाया था। ये लोग नकली शराब तैयार कर बिहार भेजा करते थे। पुलिस को पूछताछ में पता चला है कि जो सामान बरामद हुआ है, उससे करीब 80 लाख रुपये कीमत की नकली शराब तैयार की जाती।
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जीपीएस से लेते वाहनों की लोकेशन
हरियाणा से चलने वाले ट्रकों में जीपीएस लगाया जाता था। धंधे से जुड़े लोग कमरे में बैठकर ट्रक का लोकेशन लेते थे और जहां कहीं भी ट्रक को रुका पाते थे, फोन पर वजह पूछते थे। यही वजह है कि जैसे ही बेलीपार में ट्रक को पकड़ा गया, धंधेबाजों को इसकी जानकारी हो गई। उसके बाद वे फरार हो गए।
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