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कानूनी दांव पेंच में फंसी पुष्पा सेल्स
Updated Fri, 01 Sep 2017 02:04 AM IST
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गोरखपुर।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की सप्लाई ठप करने वाली पुष्पा सेल्स प्राइवेट लिमिटेड कानूनी दांव-पेंच में उलझ गई है। कानूनी नोटिस के जरिये कंपनी ने 30 जुलाई 2017 को 15 दिन के अंदर ऑक्सीजन आपूर्ति के मद में बकाया धनराशि की मांग की थी लेकिन नौ अगस्त को ही ऑक्सीजन सप्लाई ठप करा दी। यह कानूनी नोटिस का खुला उल्लंघन है। पुलिस इस बिंदु की भी जांच कर रही है। पूरे मामले में पुष्पा सेल्स के मालिक मनीष भंडारी को आरोपी बनाया गया है। गुलरिहा थाने में केस भी दर्ज है।
मेडिकल कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्र को पुष्पा सेल्स की तरफ से एडवोकेट विवेक गुप्ता ने 30 जुलाई 2017 को लीगल नोटिस भेजा था। उन्होंने पंद्रह दिन का समय भुगतान के लिए दिया था लेकिन ऑक्सीजन की आपूर्ति बंद करने की चेतावनी नहीं दी गई थी। नोटिस में 63 लाख 65 हजार 702 रुपये की बकायेदारी दिखाई गई है। कहा गया है कि पैसे के भुगतान के लिए कंपनी की ओर से 14 व्यक्तिगत अनुरोध पत्र लिखे गए हैं। सारे पत्र 26 फरवरी से 18 जुलाई के बीच भेजे गए, फिर भी बकाये की धनराशि नहीं दी गई। ऑक्सीजन आपूर्ति का पैसा 23 नवंबर 2016 से ही नहीं मिला था। कानूनी नोटिस के जरिये चेतावनी दी गई थी कि पंद्रह दिन के भीतर भुगतान सुनिश्चित कराया जाना चाहिए। ऐसा नहीं हुआ तो 18 फीसदी ब्याज के साथ बकाया धनराशि देनी होगी। नोटिस में यह उल्लेख नहीं किया गया था कि ऑक्सीजन की सप्लाई बंद कर दी जाएगी। इसके बावजूद कंपनी की तरफ से मनमानी की गई।
अफसरों को भी मिली थी नोटिस
पुष्पा सेल्स प्राइवेट लिमिटेड ने कानूनी नोटिस की प्रति मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा, जिलाधिकारी गोरखपुर और महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा को भेजी थी। इस नोटिस की रिसीविंग 31 जुलाई 2017 को जिलाधिकारी दफ्तर में हुई है। जिलाधिकारी ने मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को नोटिस मार्क भी किया है। इसके बाद भी मामले को लटकाए रखा गया।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की सप्लाई ठप करने वाली पुष्पा सेल्स प्राइवेट लिमिटेड कानूनी दांव-पेंच में उलझ गई है। कानूनी नोटिस के जरिये कंपनी ने 30 जुलाई 2017 को 15 दिन के अंदर ऑक्सीजन आपूर्ति के मद में बकाया धनराशि की मांग की थी लेकिन नौ अगस्त को ही ऑक्सीजन सप्लाई ठप करा दी। यह कानूनी नोटिस का खुला उल्लंघन है। पुलिस इस बिंदु की भी जांच कर रही है। पूरे मामले में पुष्पा सेल्स के मालिक मनीष भंडारी को आरोपी बनाया गया है। गुलरिहा थाने में केस भी दर्ज है।
मेडिकल कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्र को पुष्पा सेल्स की तरफ से एडवोकेट विवेक गुप्ता ने 30 जुलाई 2017 को लीगल नोटिस भेजा था। उन्होंने पंद्रह दिन का समय भुगतान के लिए दिया था लेकिन ऑक्सीजन की आपूर्ति बंद करने की चेतावनी नहीं दी गई थी। नोटिस में 63 लाख 65 हजार 702 रुपये की बकायेदारी दिखाई गई है। कहा गया है कि पैसे के भुगतान के लिए कंपनी की ओर से 14 व्यक्तिगत अनुरोध पत्र लिखे गए हैं। सारे पत्र 26 फरवरी से 18 जुलाई के बीच भेजे गए, फिर भी बकाये की धनराशि नहीं दी गई। ऑक्सीजन आपूर्ति का पैसा 23 नवंबर 2016 से ही नहीं मिला था। कानूनी नोटिस के जरिये चेतावनी दी गई थी कि पंद्रह दिन के भीतर भुगतान सुनिश्चित कराया जाना चाहिए। ऐसा नहीं हुआ तो 18 फीसदी ब्याज के साथ बकाया धनराशि देनी होगी। नोटिस में यह उल्लेख नहीं किया गया था कि ऑक्सीजन की सप्लाई बंद कर दी जाएगी। इसके बावजूद कंपनी की तरफ से मनमानी की गई।
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अफसरों को भी मिली थी नोटिस
पुष्पा सेल्स प्राइवेट लिमिटेड ने कानूनी नोटिस की प्रति मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा, जिलाधिकारी गोरखपुर और महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा को भेजी थी। इस नोटिस की रिसीविंग 31 जुलाई 2017 को जिलाधिकारी दफ्तर में हुई है। जिलाधिकारी ने मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को नोटिस मार्क भी किया है। इसके बाद भी मामले को लटकाए रखा गया।
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