{"_id":"5b3e6c3a4f1c1bb6248b4b52","slug":"151530817594-gorakhpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"चिटफंड सोसाइटी में 70 लाख फंसे, हंगामा","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
चिटफंड सोसाइटी में 70 लाख फंसे, हंगामा
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Fri, 06 Jul 2018 12:45 AM IST
विज्ञापन
पीपीगंज में चिटफंड कंपनी के ठगी के शिकार लोग।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पीपीगंज (गोरखपुर)। ज्यादा ब्याज का वादा कर लोगों से रकम जमा कराने वाली चिटफंड सोसाइटी पर गबन का आरोप लगाकर एजेंट और खाताधारकों ने बृहस्पतिवार को संस्था के आफिस के सामने हंगामा किया। लोगों का गुस्सा देख शाखा प्रबंधक फरार हो गए। एक-एक कर कर्मचारी भी वहां से खिसक लिए। आरोप है कि अलग-अलग लोगों के 70 लाख रुपये की मैच्योरिटी पूरी होने के बाद भी भुगतान नहीं किया जा रहा है। संस्था की ओर से दिए गए चेक भी बाउंस हो गए थे। हंगामे की सूचना पर पहुंची पुलिस ने कार्रवाई का आश्वासन देकर मामले को शांत कराया।
चार साल पहले पीपीगंज के अंबेडकरनगर में यूनाइटेड इंडिया ग्रुप के नाम से चिटफंड सोसाइटी खोली गई। बैंक के तौर पर खुद को प्रस्तुत कर आसपास के लोगों को एजेंट बनाया गया और फिर उनके जरिए लोगों से कैश जमा कराया गया। इस दौरान शाखा की ओर से जमाकर्ताओं को बाकायदा सरकारी बैंकों की तरह पासबुक और रसीद, बाउचर भी दिए गए। एजेंट को 100 रुपये जमा कराने पर सात रुपये कमीशन के तौर पर मिलते थे। करीब दो साल पहले संस्था का नाम बदलकर ट्रिनीटी मल्टीस्टेट कोआपरेटिव नाम से पंजीकरण करा दिया गया। जमाकर्ताओं और एजेंटों का कहना है कि शुरुआत के दो वर्षों तक कुछ जमाधन की मैच्योरिटी के बाद भुगतान भी समय से हुआ, जिससे लोगों का भरोसा बढ़ गया था। पर बीते एक वर्ष से जमाकर्ताओं के धन की मियाद पूरी होने पर भुगतान में हीलाहवाली शुरू हुई। आरोप है कि छह माह पूर्व भी हंगामा होने पर कुछ लोगों को भुगतान किया गया, लेकिन अभी तक कुल 236 जमाकर्ताओं का मूलधन अब एक करोड़ हो चुका है, जो वापस नहीं मिल सका।
विज्ञापन
पीपीगंज ब्रांच को जमाकर्ता के भुगतान के लिए चार महीने पहले 70 लाख दिए गए थे। ब्रांच पर कार्यरत अधिकारी और कर्मचारियों की ओर से कुछ जमाकर्ताओं का भुगतान किया गया और बाकी रकम मनमाने तरीके से खर्च की गई। इसके बाद ही तत्कालीन शाखा प्रबंधक को हटाकर आडिट कराया जा रहा है। जमाकर्ताओं को मूल रसीद और पासबुक उपलब्ध कराने पर दो से तीन माह के भीतर भुगतान कर दिया जाएगा। सोसाइटी रिजर्व बैंक और सरकार के नियम के अनुसार काम कर रही।
विज्ञापन
चार साल पहले पीपीगंज के अंबेडकरनगर में यूनाइटेड इंडिया ग्रुप के नाम से चिटफंड सोसाइटी खोली गई। बैंक के तौर पर खुद को प्रस्तुत कर आसपास के लोगों को एजेंट बनाया गया और फिर उनके जरिए लोगों से कैश जमा कराया गया। इस दौरान शाखा की ओर से जमाकर्ताओं को बाकायदा सरकारी बैंकों की तरह पासबुक और रसीद, बाउचर भी दिए गए। एजेंट को 100 रुपये जमा कराने पर सात रुपये कमीशन के तौर पर मिलते थे। करीब दो साल पहले संस्था का नाम बदलकर ट्रिनीटी मल्टीस्टेट कोआपरेटिव नाम से पंजीकरण करा दिया गया। जमाकर्ताओं और एजेंटों का कहना है कि शुरुआत के दो वर्षों तक कुछ जमाधन की मैच्योरिटी के बाद भुगतान भी समय से हुआ, जिससे लोगों का भरोसा बढ़ गया था। पर बीते एक वर्ष से जमाकर्ताओं के धन की मियाद पूरी होने पर भुगतान में हीलाहवाली शुरू हुई। आरोप है कि छह माह पूर्व भी हंगामा होने पर कुछ लोगों को भुगतान किया गया, लेकिन अभी तक कुल 236 जमाकर्ताओं का मूलधन अब एक करोड़ हो चुका है, जो वापस नहीं मिल सका।
विज्ञापन
इनके चेक हो चुके है बाउंस
संस्था की ओर से दबाव बढ़ने पर कुछ लोगों को चेक दिए गए थे, लेकिन वे बाउंस हो गए। प्रदीप जायसवाल 25200, श्रीराम 44520, शैल सिंह 19910, शीला 39600, हरिगंगे 60500, 45828, 50400, पुष्पा देवी को 11000 का चेक मिला था। ये सभी चेक बाउंस हो गए।
विज्ञापन
पीपीगंज ब्रांच को जमाकर्ता के भुगतान के लिए चार महीने पहले 70 लाख दिए गए थे। ब्रांच पर कार्यरत अधिकारी और कर्मचारियों की ओर से कुछ जमाकर्ताओं का भुगतान किया गया और बाकी रकम मनमाने तरीके से खर्च की गई। इसके बाद ही तत्कालीन शाखा प्रबंधक को हटाकर आडिट कराया जा रहा है। जमाकर्ताओं को मूल रसीद और पासबुक उपलब्ध कराने पर दो से तीन माह के भीतर भुगतान कर दिया जाएगा। सोसाइटी रिजर्व बैंक और सरकार के नियम के अनुसार काम कर रही।
- आरके शर्मा, एमडी