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सिपाहियों ने जिला अस्पताल के डॉक्टर को पीटा, तोड़फोड़
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Thu, 19 Apr 2018 01:29 AM IST
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जिला अस्पताल के डाक्टरों ने घटना के बाद काम ठप कर दिया।
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गोरखपुर। जिला अस्पताल में पुलिस कर्मियों के हंगामे और मारपीट के बाद डॉक्टरों ने मंगलवार की देररात इमरजेंसी और ओपीडी में इलाज ठप कर दिया। इससे मरीज कराह उठे। नाराज डॉक्टरों ने कोतवाली पहुंचकर जमकर हंगामा किया। साथ ही तहरीर देकर बेनीगंज चौकी इंचार्ज अंजनी कुमार सहित तीन सिपाहियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया। इस मामले में मुख्य आरोपी मऊ के दोहरीघाट थाने में तैनात सिपाही दुर्गेश पाठक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। साथ ही एसएसपी शलभ माथुर ने सिपाही के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए मऊ के एसपी को पत्र लिखा। नामजद गोरखपुर के पुलिस कर्मियों के खिलाफ जांच चल रही है।
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में मंगलवार की देररात उस समय जमकर हंगामा हुआ जब नशे में धुत सिपाही दुर्गेश पाठक इलाज कराने पहुंचा। आरोप है कि उपचार के बाद जब मेडिको लीगल होने लगा तो दुर्गेश ने साथियों के साथ मिलकर इमरजेंसी में तोड़फोड़ शुरू कर दी। यही नहीं, ड्यूटी पर मौजूद इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ. राकेश कुमार के साथ हाथापाई, मारपीट की। डॉक्टर को चोटें आई हैं। कई सामान भी क्षतिग्रस्त हो गए। शीशे टूट गए। घटना के बाद तमाम चिकित्सक, मेडिकल ऑफिसर मौके पर पहुंचे और इमरजेंसी में इलाज ठप कर दिया। यह सिलसिला बुधवार की सुबह नौ बजे तक जारी रहा। आक्रोशित डॉक्टर एवं अन्य पैरामेडिकल स्टाफ ने बुधवार की सुबह आठ बजे से शुरू होने वाली ओपीडी का भी बहिष्कार कर दिया। इससे मरीज, तीमारदारों को दिक्कत हुई। तमाम मरीजों को लौटा दिया गया। अस्पताल के बाहर, डॉक्टरों के केबिन के बाहर मरीजों की भीड़ लग गई। पर्चा काउंटर भी नहीं खुला। सूचना पाकर पुलिस, प्रशासनिक अफसर जिला अस्पताल पहुंचे। सुबह नौ बजे के आसपास आरोपी सिपाही दुर्गेश पाठक की गिरफ्तारी की सूचना डॉक्टरों को मिली, तब जाकर डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ ने काम शुरू किया। हालांकि विरोध में वे काली पट्टी बांधकर काम करते रहे।
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डॉक्टरों का आरोप है कि सिपाही ने डॉक्टर का कालर पकड़ लिया और उन्हें खींचकर इमरजेंसी से बाहर ले आया। अन्य पुलिसकर्मी भी आरोपी सिपाही का साथ देते हुए डॉक्टर को जबरदस्ती थाने ले जाने लगे। इस पर कर्मचारियों और डाक्टर ने पुलिसकर्मियों का जोरदार विरोध किया। इसके बाद वे भाग खड़े हुए। डॉ. राकेश कुमार ने इसकी सूचना अस्पताल के एसआईसी डॉ. आरके गुप्ता को दी। मौके पर पहुंचे एसआईसी व अन्य डाक्टरों ने पुलिस के आला अधिकारियों समेत कोतवाली थाने को सूचना दी। अधिकारी और कोतवाली पुलिस भी थोड़ी देर में इमरजेंसी में पहुंच गई। जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि डॉक्टरों ने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। ऐसा न होने पर वे काम ठप कर देंगे।
मंगलवार की देररात करीब दो बजे नशे की हालत में पहुंचे सिपाही दुर्गेश पाठक की डॉ. राकेश कुमार के साथ हुई हाथापाई, मारपीट और तोड़फोड़ की सूचना पर थोड़ी देर में वहां कोतवाली से पुलिस तो पहुंच गई लेकिन पुलिसकर्मी तोड़फोड़ कर रहे सिपाही के पक्ष में ही खड़े हो गए। वे डॉक्टरों को ही खरी-खोटी सुनाने लगे। कहने लगे कि सबको जेल भेजा जाएगा। इससे हंगामा कर रहे सिपाही का मनोबल और बढ़ गया।
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जिला अस्पताल की इमरजेंसी में मंगलवार की देररात उस समय जमकर हंगामा हुआ जब नशे में धुत सिपाही दुर्गेश पाठक इलाज कराने पहुंचा। आरोप है कि उपचार के बाद जब मेडिको लीगल होने लगा तो दुर्गेश ने साथियों के साथ मिलकर इमरजेंसी में तोड़फोड़ शुरू कर दी। यही नहीं, ड्यूटी पर मौजूद इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ. राकेश कुमार के साथ हाथापाई, मारपीट की। डॉक्टर को चोटें आई हैं। कई सामान भी क्षतिग्रस्त हो गए। शीशे टूट गए। घटना के बाद तमाम चिकित्सक, मेडिकल ऑफिसर मौके पर पहुंचे और इमरजेंसी में इलाज ठप कर दिया। यह सिलसिला बुधवार की सुबह नौ बजे तक जारी रहा। आक्रोशित डॉक्टर एवं अन्य पैरामेडिकल स्टाफ ने बुधवार की सुबह आठ बजे से शुरू होने वाली ओपीडी का भी बहिष्कार कर दिया। इससे मरीज, तीमारदारों को दिक्कत हुई। तमाम मरीजों को लौटा दिया गया। अस्पताल के बाहर, डॉक्टरों के केबिन के बाहर मरीजों की भीड़ लग गई। पर्चा काउंटर भी नहीं खुला। सूचना पाकर पुलिस, प्रशासनिक अफसर जिला अस्पताल पहुंचे। सुबह नौ बजे के आसपास आरोपी सिपाही दुर्गेश पाठक की गिरफ्तारी की सूचना डॉक्टरों को मिली, तब जाकर डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ ने काम शुरू किया। हालांकि विरोध में वे काली पट्टी बांधकर काम करते रहे।
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सात घंटे ठप रही इमरजेंसी सेवा
सिपाही के हंगामे के चलते जिला अस्पताल की इमरजेंसी रात दो बजे से से सुबह लगभग नौ बजे तक बाधित रही। इस बीच इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को पर्याप्त चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाई क्योंकि इमरजेंसी मेडिकल आफिसर डॉ. राकेश कुमार घटना को लेकर परेशान थे। अपने साथ हुई मारपीट से वह काफी डरे हुए थे। आरोपी सिपाही ने इमरजेंसी रजिस्टर भी फाड़ दिया जिससे मरीजों का रिकॉर्ड नष्ट हो गया। 24 घंटे में किस मरीज को भर्ती किया गया और उसे कौन सी दवा दी गई, इसकी जानकारी नहीं मिल सकेगी। इतना ही नहीं, मेडिको लीगल करने आए डॉ. शहनवाज से भी आरोपी सिपाही उलझ गया। मेडिको लीगल के बाद जब पेपर तैयार हुआ तो आरोपी सिपाही ने उसे पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के सामने ही छीनकर पाढ़ दिया। इस पर डॉक्टर फिर नाराज हो गए।
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