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24 घंटे के दौरान बीआरडी में 16 बच्चों की मौत
Updated Wed, 20 Sep 2017 01:04 AM IST
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गोरखपुर।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बालरोग विभाग में 24 घंटे के दौरान 16 बच्चों की मौत हो गई। मरने वालों में इंसेफेलाइटिस से पीड़ित चार बच्चे भी शामिल हैं। वहीं इस दौरान इंसेफेलाइटिस के 12 नए मरीज भी भर्ती किए गए।
24 घंटों के दौरान नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (एनआईसीयू) में सात नवजात और पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) में नौ बच्चों की मौत हुई। पीआईसीयू में मरने वाले बच्चों में चार इंसेफेलाइटिस से पीड़ित थे। इसमें गोरखपुर की नेहा (15), सिद्धार्थनगर के समीर (10), सिद्धार्थनगर की काजल (15), देवरिया की शाबिया खातून (5) का नाम शामिल है। प्राचार्य डॉ. पीके सिंह ने बताया कि चिकित्सकों के पूरे प्रयास के बाद भी गंभीर हाल में भर्ती इन बच्चों को नहीं बचाया जा सका। वहीं इस दौरान गोरखपुर के चार, संतकबीरनगर के तीन, महराजगंज के दो और सिद्धार्थनगर, बिहार व देवरिया के एक-एक नए मरीज भर्ती किए गए। इसके साथ इस साल अब तक इंसेफेलाइटिस से दम तोड़ने वाले मरीजों की संख्या 239 हो गई है। इस साल अब तक कुल 1115 इंसेफेलाइटिस पीड़ित भर्ती हो चुके हैं। इनमें से 124 मरीजों का इलाज अभी बीआरडी मेडिकल कॉलेज में चल रहा है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बालरोग विभाग में 24 घंटे के दौरान 16 बच्चों की मौत हो गई। मरने वालों में इंसेफेलाइटिस से पीड़ित चार बच्चे भी शामिल हैं। वहीं इस दौरान इंसेफेलाइटिस के 12 नए मरीज भी भर्ती किए गए।
24 घंटों के दौरान नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (एनआईसीयू) में सात नवजात और पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) में नौ बच्चों की मौत हुई। पीआईसीयू में मरने वाले बच्चों में चार इंसेफेलाइटिस से पीड़ित थे। इसमें गोरखपुर की नेहा (15), सिद्धार्थनगर के समीर (10), सिद्धार्थनगर की काजल (15), देवरिया की शाबिया खातून (5) का नाम शामिल है। प्राचार्य डॉ. पीके सिंह ने बताया कि चिकित्सकों के पूरे प्रयास के बाद भी गंभीर हाल में भर्ती इन बच्चों को नहीं बचाया जा सका। वहीं इस दौरान गोरखपुर के चार, संतकबीरनगर के तीन, महराजगंज के दो और सिद्धार्थनगर, बिहार व देवरिया के एक-एक नए मरीज भर्ती किए गए। इसके साथ इस साल अब तक इंसेफेलाइटिस से दम तोड़ने वाले मरीजों की संख्या 239 हो गई है। इस साल अब तक कुल 1115 इंसेफेलाइटिस पीड़ित भर्ती हो चुके हैं। इनमें से 124 मरीजों का इलाज अभी बीआरडी मेडिकल कॉलेज में चल रहा है।
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