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गिरफ्तार छात्रनेता नहीं भेजे गए जेल
Updated Sat, 09 Sep 2017 08:47 PM IST
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गोरखपुर।
छात्रसंघ चुनाव टाले जाने को लेकर हुए बवाल में गिरफ्तार छात्रनेताओं को शनिवार को भी जेल नहीं भेजा गया। इनके समर्थन में सुबह ही भाजपा और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नेता और पदाधिकारियों ने थाने पर डेरा डाल दिया, जिसके बाद डीएम के आदेश पर पुलिस ने गिरफ्तार छात्रनेताओं का चालान रोक दिया। पुलिस अब उन्हें मुचलके पर छोड़ने के लिए कानूनी सलाह ले रही है।
शुक्रवार को छात्रसंघ चुनाव टाले जाने को लेकर जमकर बवाल हुआ था। इस मामले में पुलिस ने यूनिवर्सिटी के मुख्य अभियंता प्रो. गोपाल प्रसाद, चौकी प्रभारी भिक्खू राय, कर्मचारी रितेश सिंह की अलग-अलग तहरीर के आधार पर छात्रसंघ उपाध्यक्ष समेत 27 नामजद व 100 अज्ञात लोगों के खिलाफ मारपीट, बलवा, सरकारी काम में बाधा डालने, बंधक बनाने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, मानव जीवन को संकट में डालने, लोकसेवक पर हमला करने, हत्या की कोशिश की धाराओं में केस दर्ज किया था। मामले में छात्रनेता शिवेंद्र पांडेय, कपिल त्रिपाठी, मनोज पांडेय, सिद्धार्थ राय, पुष्पेंद्र पांडेय, सर्वेश कुशवाहा व अखिलेश पांडेय को गिरफ्तार किया गया था। इन छात्रनेताओं को छुड़ाने के लिए शनिवार सुबह से ही भाजपा व विद्यार्थी परिषद के नेता थाने पहुंच गए और इन्हें निर्दोष बताते हुए छोड़ने का दबाव बनाने लगे। भाजपा नेता ने डीएम राजीव रौतेला और एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज से फोन पर बात की। इसके बाद डीएम ने गिरफ्तार छात्रों का चालान न करने का आदेश दिया। इस दौरान चीफ प्रॉक्टर भी थाने पहुंचे थे। इंस्पेक्टर कैंट मनोज पाठक ने बताया कि गिरफ्तार छात्र घटना में शामिल नहीं थे। अफसरों के आदेश पर चालान नहीं किया गया है। मुचलके पर उन्हें छोड़ा जाएगा।
छात्रों को भड़काने का संदेह
पुलिस को संदेह है कि छात्रों को भड़काया गया है। बवाल के लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन से जुड़े कुछ लोगों ने ही उन्हें उकसाया। फिलहाल पुलिस अभी खुलकर कुछ नहीं बोल रही है। कैंट पुलिस का कहना है कि छानबीन चल रही है, जल्द ही पूरा मामला सामने आ जाएगा।
छात्रसंघ चुनाव टाले जाने को लेकर हुए बवाल में गिरफ्तार छात्रनेताओं को शनिवार को भी जेल नहीं भेजा गया। इनके समर्थन में सुबह ही भाजपा और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नेता और पदाधिकारियों ने थाने पर डेरा डाल दिया, जिसके बाद डीएम के आदेश पर पुलिस ने गिरफ्तार छात्रनेताओं का चालान रोक दिया। पुलिस अब उन्हें मुचलके पर छोड़ने के लिए कानूनी सलाह ले रही है।
शुक्रवार को छात्रसंघ चुनाव टाले जाने को लेकर जमकर बवाल हुआ था। इस मामले में पुलिस ने यूनिवर्सिटी के मुख्य अभियंता प्रो. गोपाल प्रसाद, चौकी प्रभारी भिक्खू राय, कर्मचारी रितेश सिंह की अलग-अलग तहरीर के आधार पर छात्रसंघ उपाध्यक्ष समेत 27 नामजद व 100 अज्ञात लोगों के खिलाफ मारपीट, बलवा, सरकारी काम में बाधा डालने, बंधक बनाने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, मानव जीवन को संकट में डालने, लोकसेवक पर हमला करने, हत्या की कोशिश की धाराओं में केस दर्ज किया था। मामले में छात्रनेता शिवेंद्र पांडेय, कपिल त्रिपाठी, मनोज पांडेय, सिद्धार्थ राय, पुष्पेंद्र पांडेय, सर्वेश कुशवाहा व अखिलेश पांडेय को गिरफ्तार किया गया था। इन छात्रनेताओं को छुड़ाने के लिए शनिवार सुबह से ही भाजपा व विद्यार्थी परिषद के नेता थाने पहुंच गए और इन्हें निर्दोष बताते हुए छोड़ने का दबाव बनाने लगे। भाजपा नेता ने डीएम राजीव रौतेला और एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज से फोन पर बात की। इसके बाद डीएम ने गिरफ्तार छात्रों का चालान न करने का आदेश दिया। इस दौरान चीफ प्रॉक्टर भी थाने पहुंचे थे। इंस्पेक्टर कैंट मनोज पाठक ने बताया कि गिरफ्तार छात्र घटना में शामिल नहीं थे। अफसरों के आदेश पर चालान नहीं किया गया है। मुचलके पर उन्हें छोड़ा जाएगा।
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छात्रों को भड़काने का संदेह
पुलिस को संदेह है कि छात्रों को भड़काया गया है। बवाल के लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन से जुड़े कुछ लोगों ने ही उन्हें उकसाया। फिलहाल पुलिस अभी खुलकर कुछ नहीं बोल रही है। कैंट पुलिस का कहना है कि छानबीन चल रही है, जल्द ही पूरा मामला सामने आ जाएगा।
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