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राज्यपाल ने स्वीकार की दया याचिका, कैदी रिहा
Updated Fri, 06 Oct 2017 01:31 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर।
राज्यपाल की ओर से दया याचिका मंजूर किए जाने पर गोरखपुर जेल में एक दशक से सजा काट रहे कैदी को रिहा कर दिया गया। राज्यपाल राम नाईक की ओर से संस्तुति रिपोर्ट डीएम महराजगंज, जेल अधीक्षक गोरखपुर को भेजी गई थी। गुरुवार को घरवाले जेल पहुंचे और बंदी को लेकर महराजगंज चले गए।
महराजगंज के बरियापुर निवासी मारकंडेय शाही बीआरडीपीजी कॉलेज देवरिया में प्रवक्ता थे। तीन दशक पहले हत्या के मामले में कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। करीब एक दशक से मारकंडेय शाही गोरखपुर जेल में बंद थे। बीमारी की वजह से मेडिकल कॉलेज में लंबे समय तक भर्ती कराया गया था। दो माह पहले उन्होंने खराब सेहत, उम्र का हवाला देकर राज्यपाल रामनाईक के पास दया याचिका दी थी। जेल प्रशासन की तरफ से उनके अच्छे आचरण, बीमारी की रिपोर्ट दी गई। राज्यपाल ने दया याचिका स्वीकार कर ली। संस्तुति मिलने के बाद गुरुवार को उन्हें जेल से छोड़ दिया गया। जेलर ने कहा कि सेहत और उम्र अधिक होने के कारण उनकी देखरेख में दूसरे बंदियों को लगाया जाता था। दया याचिका स्वीकार होने पर उन्हें रिहा किया गया है।
सात और की रिहाई जल्द
दया याचिका, सजा पूरी कर चुके 14 कैदियों ने रिहाई के लिए प्रार्थना पत्र दिया है। डीएम कार्यालय की तरफ से सात बंदियों की रिपोर्ट शासन में भेज दी है। इसमें दो महिलाएं भी शामिल हैं। इसके अलावा सात और बंदियों की रिपोर्ट बनकर तैयार है।
गोरखपुर।
राज्यपाल की ओर से दया याचिका मंजूर किए जाने पर गोरखपुर जेल में एक दशक से सजा काट रहे कैदी को रिहा कर दिया गया। राज्यपाल राम नाईक की ओर से संस्तुति रिपोर्ट डीएम महराजगंज, जेल अधीक्षक गोरखपुर को भेजी गई थी। गुरुवार को घरवाले जेल पहुंचे और बंदी को लेकर महराजगंज चले गए।
महराजगंज के बरियापुर निवासी मारकंडेय शाही बीआरडीपीजी कॉलेज देवरिया में प्रवक्ता थे। तीन दशक पहले हत्या के मामले में कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। करीब एक दशक से मारकंडेय शाही गोरखपुर जेल में बंद थे। बीमारी की वजह से मेडिकल कॉलेज में लंबे समय तक भर्ती कराया गया था। दो माह पहले उन्होंने खराब सेहत, उम्र का हवाला देकर राज्यपाल रामनाईक के पास दया याचिका दी थी। जेल प्रशासन की तरफ से उनके अच्छे आचरण, बीमारी की रिपोर्ट दी गई। राज्यपाल ने दया याचिका स्वीकार कर ली। संस्तुति मिलने के बाद गुरुवार को उन्हें जेल से छोड़ दिया गया। जेलर ने कहा कि सेहत और उम्र अधिक होने के कारण उनकी देखरेख में दूसरे बंदियों को लगाया जाता था। दया याचिका स्वीकार होने पर उन्हें रिहा किया गया है।
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सात और की रिहाई जल्द
दया याचिका, सजा पूरी कर चुके 14 कैदियों ने रिहाई के लिए प्रार्थना पत्र दिया है। डीएम कार्यालय की तरफ से सात बंदियों की रिपोर्ट शासन में भेज दी है। इसमें दो महिलाएं भी शामिल हैं। इसके अलावा सात और बंदियों की रिपोर्ट बनकर तैयार है।
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