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जांच को फाइलें नहीं दी तो निगम पहुंचे कमिश्नर  

Wed, 13 Jul 2016 01:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Updated Wed, 13 Jul 2016 01:36 AM IST
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commissioner check the file of nagar nigam
नगर निगम में फाइलो की जांच करते ‌कमिश्नर। - फोटो : mahesh kumar
नगर निगम में व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। अफसर अपनी मनमानी पर उतर आए हैं तो कमिश्नर के निर्देशों की भी अनदेखी की जा रही है। तीन साल के  कामों की जांच के लिए जब निगम ने फाइलें नहीं दी तो कमिश्नर पी गुरुप्रसाद को खुद नगर निगम पहुंचना पड़ा। अपनी मौजूदगी में कमिश्नर ने जांच के लिए संबंधित कामों की फाइलें जांच टीम से जब्त कराईं। साथ ही बिलो टेंडर और दुकानों के किराये से जुड़ी फाइलें भी टीम को उपलब्ध कराया।
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बता दें कि लगातार मिल रही शिकायतों पर कमिश्नर ने पिछले तीन सालों में हुए करीब 1300 कामों में से 88 बड़े कामों की जांच के निर्देश दिए थे। इसके लिए छह सदस्यीय टीम गठित की गई थीं। जांच की जद में आए कामों से जुड़ी फाइलों के कई बार मांगे जाने के बाद भी नगर निगम ने उसे टीम को उपलब्ध नहीं कराया। इस पर खफा कमिश्नर खुद मंगलवार की शाम जांच टीम के साथ नगर निगम पहुंच गए।
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करीब घंटे भर तक कमिश्नर, निगम में मौजूद रहे और इस दौरान जांच से जुड़ी फाइलों के साथ ही बिलो टेंडर और निगम की दुकानों से जुड़ी फाइलें जांच टीम को उपलब्ध करवाया। बार-बार के निर्देशों के बाद भी फाइलें नहीं उपलब्ध कराने से खफा कमिश्नर ने नगर आयुक्त से लेकर निगम के सभी संबंधित अफसरों को जमकर फटकार लगाई।
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अमर उजाला से हुई बातचीत में कमिश्नर ने बताया कि निगम में पांच से 15 फीसदी तक हुए बिलो टेंडर को निरस्त किया जा रहा था। जबकि अगर टेंडर से कम दाम पर टेंडर हुए थे तो निगम को उसे संबंधित ठेकेदारों से कराया जाना चाहिए था। अगर निर्माण कार्य या उसमें इस्तेमाल होने वाले निर्माण सामग्री की गुणवत्ता खराब है तो निगम को इसकी मानीटरिंग क रनी चाहिए थी। ऐसे ठेकेदारों से सिक्योरिटी राशि अधिक जमा करानी चाहिए थी और कमियां मिलने पर संबंधित ठेकेदार की सिक्योरिटी मनी को जब्त करने के साथ ही उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराना चाहिए था। मगर ऐसा नहीं हुआ। यहीं नहीं पिछले 10-15 सालों से तमाम दुकानों के किराये में कोई बढ़ोत्तरी नहीं कर निगम को भारी आर्थिक क्षति पहुंचाई गई।


कमिश्नर ने बताया कि ऐसे सभी कामों की जांच के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट में अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई तय है।  उन्होंने नगर आयुक्त से कहा कि सहायक अभियंता को मुख्य अभियंता का प्रभार देना गलत है। नगर आयुक्त को चेताया कि जल्द व्यवस्था सुधार लें वर्ना शासन में अगर शिकायत हुई तो सभी का नपना तय है। कमिश्नर के साथ पहुंची जांच टीम में जीडीए के मुख्य अभियंता, गीडा के जीएम फाइनेंस, एडी ट्रेजरी, जेडी ट्रेजरी, जिला बचत अधिकारी, निदेशक समाज कल्याण शामिल थे।  
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