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मानबेला विवाद बढ़ा, पुलिस ने भांजी लाठी
Updated Mon, 18 Sep 2017 01:51 AM IST
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गोरखपुर।
भूमि अधिग्रहण का मुआवजा बढ़ाने के लिए मानबेला के किसानों ने रविवार को गोलघर से कचहरी चौराहा तक गोरखपुर डेवलपमेंट अथारिटी (जीडीए) और राज्य सरकार की प्रतीकात्मक शवयात्रा निकाली। साथ ही दो पुतलों को आग के हवाले किया। पुलिस ने रोक-टोक की तो किसानों से भिड़ंत हो गई। दोनों तरफ से हाथापाई होने लगी। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठियां भांजीं। किसानों को लाठी पटककर खदेड़ा और उनकी पिटाई भी की। इस दौरान 20 किसान चुटहिल हो गए। आंदोलन करने वाले 100 से ज्यादा महिला, पुरुष किसानों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। सबका शांति भंग में चालान किया गया। इसके बाद निजी मुचलके पर छोड़ दिया गया।
मुआवजा बढ़ाने और ब्याज पर छूट देने की सहित कई मांगों को लेकर किसान आंदोलन कर रहे हैं। कांग्रेस नेता राणा राहुल सिंह की अगुवाई में बीआरडी मेडिकल कॉलेज के पास पिछले कई दिनों से सत्याग्रह चल रहा है। इसके बावजूद शासन, प्रशासन के लोग नहीं पहुंच सके। इससे नाराज किसान रविवार को सड़क पर उतर आए। वे गोलघर में जीडीए टॉवर के पास एकत्रत हुए, फिर प्रतीकात्मक शवयात्रा निकालने लगे। पोस्टर, बैनर लेकर पहुंचे किसानों ने राज्य सरकार को उसका वादा याद दिलाया। कहा कि ब्याज में छूट देने का भरोसा दिलाया गया था लेकिन ऐसा नहीं किया गया। अब मानबेला, फतेहपुर, पीरु शहीद, पथल कइयां, पोखरभिंडा, हमीदपुर, मुगलपुर, करीमनगर गांव के किसान सड़क पर उतर आए हैं।
कचहरी चौराहा पहुंचते ही किसानों जीडीए ने और सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। वे पुतला जलाने लगे। पुलिस ने ऐसा करने से रोका तो किसान भिड़ गए। इसके बाद पुलिस ने लाठी भांजनी शुरू कर दी। इससे अफरातफरी मच गई और किसान भागने लगे। पुलिस ने कई किसानों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। इस दौरान करीब 20 किसान चुटहिल हो गए। प्रदर्शन में राजेश मौर्या, अजय यादव, रूदल निषाद, रामनाथ निषाद, परमात्मा कुमार, इमरान, लाल बिहारी निषाद, राकेश यादव, राजकिशोर यादव, कौशल सिंह, बृजेश मौर्य, इरफान मलिक, वकार समेत सैकड़ों किसान शामिल रहे।
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अफसरों की लापरवाही से बिगड़ रहे हालात
जीडीए और प्रशासनिक अफसरों की लापरवाही से मानबेला का विवाद बढ़ता जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हस्तक्षेप के बाद किसान मान गए थे लेकिन प्रशासनिक अफसरों ने समस्या के समाधान की प्रक्रिया तेज नहीं की। इसी का नतीजा रहा कि इस मामले में राजनीति शुरू हो गई। पहले कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर ने मसला उठाया, फिर स्थानीय नेता मामले को तूल देने में लगे हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक अफसर किसानों से बातचीत करके स्थायी समाधान निकालने की कोशिश नहीं कर रहे हैं।
सर्किल रेट के मुताबिक अधिग्रहित जमीन का मांग रहे मुआवजा
किसान सर्किल रेट के मुताबिक अधिग्रहित जमीन का मुआवजा देने, नए सिरे से सर्वे कर स्कूल, मस्जिद और मौके पर बन चुके मकानाें को अधिग्रहण से बाहर रखने तथा अधिग्रहित जमीन का 10 फीसदी विकसित कर उसे किसानों के लिए सुरक्षित करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक जीडीए उनकी तीनों मांगों को नहीं मान लेता, उनका सत्याग्रह जारी रहेगा। कहा कि प्रशासन कुछ किसानों को बरगला रहा है मगर वे अपने हक को लेकर सतर्क हैं।
भूमि अधिग्रहण का मुआवजा बढ़ाने के लिए मानबेला के किसानों ने रविवार को गोलघर से कचहरी चौराहा तक गोरखपुर डेवलपमेंट अथारिटी (जीडीए) और राज्य सरकार की प्रतीकात्मक शवयात्रा निकाली। साथ ही दो पुतलों को आग के हवाले किया। पुलिस ने रोक-टोक की तो किसानों से भिड़ंत हो गई। दोनों तरफ से हाथापाई होने लगी। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठियां भांजीं। किसानों को लाठी पटककर खदेड़ा और उनकी पिटाई भी की। इस दौरान 20 किसान चुटहिल हो गए। आंदोलन करने वाले 100 से ज्यादा महिला, पुरुष किसानों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। सबका शांति भंग में चालान किया गया। इसके बाद निजी मुचलके पर छोड़ दिया गया।
मुआवजा बढ़ाने और ब्याज पर छूट देने की सहित कई मांगों को लेकर किसान आंदोलन कर रहे हैं। कांग्रेस नेता राणा राहुल सिंह की अगुवाई में बीआरडी मेडिकल कॉलेज के पास पिछले कई दिनों से सत्याग्रह चल रहा है। इसके बावजूद शासन, प्रशासन के लोग नहीं पहुंच सके। इससे नाराज किसान रविवार को सड़क पर उतर आए। वे गोलघर में जीडीए टॉवर के पास एकत्रत हुए, फिर प्रतीकात्मक शवयात्रा निकालने लगे। पोस्टर, बैनर लेकर पहुंचे किसानों ने राज्य सरकार को उसका वादा याद दिलाया। कहा कि ब्याज में छूट देने का भरोसा दिलाया गया था लेकिन ऐसा नहीं किया गया। अब मानबेला, फतेहपुर, पीरु शहीद, पथल कइयां, पोखरभिंडा, हमीदपुर, मुगलपुर, करीमनगर गांव के किसान सड़क पर उतर आए हैं।
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कचहरी चौराहा पहुंचते ही किसानों जीडीए ने और सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। वे पुतला जलाने लगे। पुलिस ने ऐसा करने से रोका तो किसान भिड़ गए। इसके बाद पुलिस ने लाठी भांजनी शुरू कर दी। इससे अफरातफरी मच गई और किसान भागने लगे। पुलिस ने कई किसानों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। इस दौरान करीब 20 किसान चुटहिल हो गए। प्रदर्शन में राजेश मौर्या, अजय यादव, रूदल निषाद, रामनाथ निषाद, परमात्मा कुमार, इमरान, लाल बिहारी निषाद, राकेश यादव, राजकिशोर यादव, कौशल सिंह, बृजेश मौर्य, इरफान मलिक, वकार समेत सैकड़ों किसान शामिल रहे।
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अफसरों की लापरवाही से बिगड़ रहे हालात
जीडीए और प्रशासनिक अफसरों की लापरवाही से मानबेला का विवाद बढ़ता जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हस्तक्षेप के बाद किसान मान गए थे लेकिन प्रशासनिक अफसरों ने समस्या के समाधान की प्रक्रिया तेज नहीं की। इसी का नतीजा रहा कि इस मामले में राजनीति शुरू हो गई। पहले कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर ने मसला उठाया, फिर स्थानीय नेता मामले को तूल देने में लगे हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक अफसर किसानों से बातचीत करके स्थायी समाधान निकालने की कोशिश नहीं कर रहे हैं।
सर्किल रेट के मुताबिक अधिग्रहित जमीन का मांग रहे मुआवजा
किसान सर्किल रेट के मुताबिक अधिग्रहित जमीन का मुआवजा देने, नए सिरे से सर्वे कर स्कूल, मस्जिद और मौके पर बन चुके मकानाें को अधिग्रहण से बाहर रखने तथा अधिग्रहित जमीन का 10 फीसदी विकसित कर उसे किसानों के लिए सुरक्षित करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक जीडीए उनकी तीनों मांगों को नहीं मान लेता, उनका सत्याग्रह जारी रहेगा। कहा कि प्रशासन कुछ किसानों को बरगला रहा है मगर वे अपने हक को लेकर सतर्क हैं।