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नई सरकार में मालामाल हो रहा बिजली महकमा
Updated Sat, 16 Sep 2017 01:39 AM IST
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गोरखपुर।
नई सरकार ने बिजली व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए विभाग पर राजस्व वसूली का दबाव बनाया तो सिर्फ शहर से पॉवर कॉर्पोरेशन ने चार माह में 45 करोड़ रुपये जुटा लिए। एक लाख से ज्यादा की बकाएदारी 111.9 करोड़ से घटकर अब 77 करोड़ रुपये ही रह गई है। आंकड़े बता रहे हैं कि नई सरकार में बिजली महकमा मालामाल होने लगा है।
पिछले वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर अप्रैल में शहर में कुल 111.9 करोड़ रुपये एक लाख रुपये से ज्यादा बिल वाले उपभोक्ताओं पर बाकी था। सरकार ने विभाग पर इसकी वसूली के लिए दबाव बनाया। नतीजा रहा कि शहर के बिजली अफसर इस बकाया राशि की वसूली में जुट गए। अप्रैल में ऐसे 11356 बकाएदार थे जो अब घटकर 7068 हो चुकेे हैं। शहर के 3288 बड़े बकाएदार उपभोक्ताओं से बिजली विभाग ने 44.9 करोड़ रुपये वसूले। अप्रैल में नगरीय विद्युत वितरण खंड प्रथम में 2525 बकाएदार थे जो सितंबर में घटकर 1576 आ गए। ऐसे ही खंड द्वितीय में 2831 बकाएदारों की संख्या चार माह में 2492 पर पहुंच चुकी है। खंड तृतीय का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा। यहां अप्रैल में 6000 लोगों पर एक लाख से ज्यादा का बकाया था, अब यह संख्या घटकर 3000 ही रह गई है।
6600 के खिलाफ हो सकती है एफआईआर
शहर में बड़ी संख्या में ऐसे उपभोक्ता हैं जिनका मासिक बिजली बिल 10 हजार से ज्यादा होता है। वहीं पॉवर कनेक्शन वाले करीब 400 उपभोक्ताओं का एक माह का बिजली बिल एक लाख रुपये या इससे ज्यादा का होता है। ऐसे में बड़े बकाएदारों की संख्या में से इन्हें हटा दें तो करीब 6600 उपभोक्ता लंबे समय से अपने बिल का भुगतान नहीं कर रहे। इन बड़े बकाएदारों से वसूली विभाग के लिए चुनौती है। ऐसे में माना जा रहा है कि सरकार की सख्ती के बाद अब ये बकाएदार निशाने पर होंगे। बिजली विभाग इनसे बकाए की वसूली के लिए इन पर एफआईआर कराने की तैयारी में है।
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7000 उपभोक्ता करोड़ों का चूना लगाकर ‘लापता’
शहर में करीब 7000 ऐसे बिजली उपभोक्ता भी हैं जिन पर करोड़ों का बकाया है, लेकिन ये ढूंढे नहीं मिल रहे। इन उपभोक्ताओं के नाम पर हर माह बिजली बिल भी बन रहा है। हालांकि इनका पता न होने से इनसे बकाए की वसूली नहीं हो पा रही है। इससे विभाग पर बकाए का बोझ बढ़ता जा रहा है। आम लोगों को कनेक्शन देने में तमाम तरह की औपचारिकताएं पूरी करने वाले बिजली विभाग के अफसरों ने इनके नाम पते की तस्दीक के बिना इन्हें कैसे कनेक्शन जारी किए यह भी एक बड़ा सवाल है। हालांकि इनमें से कुछ ऐसे भी उपभोक्ता हैं जो लाइन कटवा चुके हैं, फिर भी इनका बिल बन रहा है।
बड़े बकाएदारों की लाइन काटी जा रही है। उन पर बकाया भुगतान के लिए दबाव बनाया जा रहा है। जो उपभोक्ता लाइन कटने के बाद बिना बकाया जमा किए बिजली जोड़ दे रहे हैं उनके खिलाफ एफआईआर भी कराई जा रही है। बकाया वसूली को लेकर लगातार अभियान जारी है।
- एके सिंह, अधीक्षण अभियंता, नगरीय विद्युत वितरण खंड
नई सरकार ने बिजली व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए विभाग पर राजस्व वसूली का दबाव बनाया तो सिर्फ शहर से पॉवर कॉर्पोरेशन ने चार माह में 45 करोड़ रुपये जुटा लिए। एक लाख से ज्यादा की बकाएदारी 111.9 करोड़ से घटकर अब 77 करोड़ रुपये ही रह गई है। आंकड़े बता रहे हैं कि नई सरकार में बिजली महकमा मालामाल होने लगा है।
पिछले वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर अप्रैल में शहर में कुल 111.9 करोड़ रुपये एक लाख रुपये से ज्यादा बिल वाले उपभोक्ताओं पर बाकी था। सरकार ने विभाग पर इसकी वसूली के लिए दबाव बनाया। नतीजा रहा कि शहर के बिजली अफसर इस बकाया राशि की वसूली में जुट गए। अप्रैल में ऐसे 11356 बकाएदार थे जो अब घटकर 7068 हो चुकेे हैं। शहर के 3288 बड़े बकाएदार उपभोक्ताओं से बिजली विभाग ने 44.9 करोड़ रुपये वसूले। अप्रैल में नगरीय विद्युत वितरण खंड प्रथम में 2525 बकाएदार थे जो सितंबर में घटकर 1576 आ गए। ऐसे ही खंड द्वितीय में 2831 बकाएदारों की संख्या चार माह में 2492 पर पहुंच चुकी है। खंड तृतीय का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा। यहां अप्रैल में 6000 लोगों पर एक लाख से ज्यादा का बकाया था, अब यह संख्या घटकर 3000 ही रह गई है।
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6600 के खिलाफ हो सकती है एफआईआर
शहर में बड़ी संख्या में ऐसे उपभोक्ता हैं जिनका मासिक बिजली बिल 10 हजार से ज्यादा होता है। वहीं पॉवर कनेक्शन वाले करीब 400 उपभोक्ताओं का एक माह का बिजली बिल एक लाख रुपये या इससे ज्यादा का होता है। ऐसे में बड़े बकाएदारों की संख्या में से इन्हें हटा दें तो करीब 6600 उपभोक्ता लंबे समय से अपने बिल का भुगतान नहीं कर रहे। इन बड़े बकाएदारों से वसूली विभाग के लिए चुनौती है। ऐसे में माना जा रहा है कि सरकार की सख्ती के बाद अब ये बकाएदार निशाने पर होंगे। बिजली विभाग इनसे बकाए की वसूली के लिए इन पर एफआईआर कराने की तैयारी में है।
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7000 उपभोक्ता करोड़ों का चूना लगाकर ‘लापता’
शहर में करीब 7000 ऐसे बिजली उपभोक्ता भी हैं जिन पर करोड़ों का बकाया है, लेकिन ये ढूंढे नहीं मिल रहे। इन उपभोक्ताओं के नाम पर हर माह बिजली बिल भी बन रहा है। हालांकि इनका पता न होने से इनसे बकाए की वसूली नहीं हो पा रही है। इससे विभाग पर बकाए का बोझ बढ़ता जा रहा है। आम लोगों को कनेक्शन देने में तमाम तरह की औपचारिकताएं पूरी करने वाले बिजली विभाग के अफसरों ने इनके नाम पते की तस्दीक के बिना इन्हें कैसे कनेक्शन जारी किए यह भी एक बड़ा सवाल है। हालांकि इनमें से कुछ ऐसे भी उपभोक्ता हैं जो लाइन कटवा चुके हैं, फिर भी इनका बिल बन रहा है।
बड़े बकाएदारों की लाइन काटी जा रही है। उन पर बकाया भुगतान के लिए दबाव बनाया जा रहा है। जो उपभोक्ता लाइन कटने के बाद बिना बकाया जमा किए बिजली जोड़ दे रहे हैं उनके खिलाफ एफआईआर भी कराई जा रही है। बकाया वसूली को लेकर लगातार अभियान जारी है।
- एके सिंह, अधीक्षण अभियंता, नगरीय विद्युत वितरण खंड