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एलएलबी चतुर्थ सेमेस्टर के 80 प्रतिशत छात्र फेल

Mon, 11 Apr 2016 08:25 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Updated Mon, 11 Apr 2016 08:25 PM IST
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80 percent law students failed in gorakhpur university
गोरखपुर यूनिवर्सिटी प्रशासनिक भवन का प्रवेशद्वार बंद कर कुलपति प्रो. अशोक कुमार को अंदर जाने से रोकते विधि संकाय के विद्यार्थी - फोटो : shivharsh
गोरखपुर यूनिवर्सिटी के एलएलबी चतुर्थ सेमेस्टर के छात्र सोमवार को सुबह साढ़े दस बजे अचानक प्रशासनिक भवन पहुंचकर हंगामा करने लगे। वजह पूछने पर पता चला कि दो दिन पहले सेमेस्टर के 80 फीसदी विद्यार्थियों को फेल कर दिया गया है। सभी छात्रों को विशेषकर तीन प्रश्नपत्रों में फेल किया गया है।
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हंगामे की जानकारी मिलते जब प्रॉक्टर पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे तो छात्रों ने धरने का रास्ता अख्तियार कर लिया। इस बीच 11 बजे के करीब कुलपति जब कार्यालय जाने के लिए प्रशासनिक भवन पहुंचे तो छात्रों ने उन्हें घेर कर अपनी समस्या बताई। कुलपति ने उन्हें व्यवस्थित ढंग से अपनी बात रखने की सलाह दी और कार्यालय में चले गए।
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बाद में छात्रों का एक प्रतिनिधि मंडल उनसे मिलने पहुंचा। छात्रों ने बताया कि अधिकतर छात्रोें को एनवायरमेंटल लॉ, एडमिनिस्ट्रेटिव लॉ और बैकिंग लॉ के पेपर में फेल किया गया है, जबकि ये विद्यार्थी अन्य विषयों में बेहतर अंकों से पास है। कुछ छात्रों की मांग थी इन विषयों की फिर से परीक्षा कराई जाए, जबकि कुछ पुनर्मूल्यांकन की मांग कर रहे थे।
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कुलपति ने गंभीरता से विचार करने का आश्वासन देकर छात्रों के प्रतिनिधिमंडल को वापस भेज दिया। आश्वासन मिलने के बाद दो बजे के करीब छात्रों ने धरना खत्म कर दिया। लेकिन उनका कहना था कि उन्हें कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है सो उनका धरना मंगलवार से एक बार फिर शुरू होगा और मामला सुलझने तक जारी रहेगा। 

2013 में भी हुआ था ऐसा ही वाकया

गोरखपुर। गोरखपुर यूनिवर्सिटी के लिए यह मामला नया नहीं है। ऐसा ही वाकया 2013 में भी हो चुका है। जब यूनिवर्सिटी और उससे संबद्ध कॉलेजों में भूगोल विषय के एमए प्रथम वर्ष के ज्यादातर विद्यार्थियों को कई पेपरों में शून्य से लेकर तीन नंबर दिए गए थे। नाराज विद्यार्थियों ने कई दिनों तक आमरण अनशन किया। आखिर यूनिवर्सिटी को पुनर्मूल्यांकन करना पड़ा, जिसमें सभी फेल छात्र बेहतर नंबरों से पास हो गए।


इसके बाद बीए व बीएससी के सैकड़ों छात्र भी अपनी ऐसी पीड़ा के साथ प्रशासनिक भवन पहुंचे तो यूनिवर्सिटी प्रशासन ने पुनर्मूल्यांकन पर ही रोक लगा दिया। इसे लेकर जब कुछ छात्र हाईकोर्ट गए तो यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्रों से प्रार्थना पत्र लेकर एक्सपर्ट पैनल के सामने कॉपियां दिखाने और अंक सुधारने का निर्णय लिया।


  
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