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डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर बोलीं माताएं, हे छठी मईया हर लीं बलैया...
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Thu, 26 Oct 2017 08:33 PM IST
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राप्ती नदी के राजघाट पर छठ पूजा के लिए जुटे श्रद्धालु।
- फोटो : Amar Ujala
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सिर पर पूजा सामग्री और दउरा लेकर घाटों पर जाते लोग। पीछे- पीछे ....... हे छठी मईया हर लीं बलैया, रिमिक झिमिक बोलेली छठी मईया... छठ गीत गाती महिलाएं। पटाखे जलाते बच्चे तो ढोल ताशों की गूंज के बीच छठी मईया के लगते जयकारे। कुछ ऐसे ही आस्था का एहसास कराता नजारा गुरुवार को छठ पर्व के तीसरे दिन शहर के सूरजकुंड धाम, गोरखनाथ, महेसरा, राजघाट, तकिया घाट, रामगढ़ ताल सहित तमाम घाटों पर दिखा। जहां व्रती महिलाओं ने पानी में खड़े होकर अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य दिया। साथ ही बेटे, पति की लंबी उम्र की मंगलकामना की। शुक्रवार तड़के अरुणोदय पर भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर महिलाएं व्रत का पारण करेंगी।
चार दिवसीय छठ महापर्व के तीसरे दिन दोपहर से ही शहर के छठ घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरू हुई। शाम तक सभी घाट खचाखच भर गए। तमाम लोग बैंडबाजे के साथ घाटों तक पहुंचे। अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य देने का सिलसिला शाम पांच बजे से शुरू हुआ, जो कि शाम छह बजे तक चलता रहा। राप्ती नदी के किनारे भीड़ ऐसी जुटी कि पैदल चलना मुश्किल हो गया। जैसे ही अर्घ्य का समय आया घाटों पर छठ माता के जयकारे गूंजने लगे। शाम को अरुण देव की लालिमा निहारते हुए महिलाओं ने मां षष्ठी का आह्वान किया। परिवार के पुरुष सदस्यों और पंडितों ने अर्घ्य दिलाया। गोरखनाथ मंदिर में भी छठ व्रत की छटा देखने को मिली। बड़ी संख्या में महिलाएं भीम सरोवर पहुंची और अर्घ्य देकर बेटे की लंबी उम्र की कामना की। केरवा जे फरे ला घवद से और कांच ही बांस की बहंगिया बहंगी लचकत जाए जैसे तमाम लोकगीत गाए गए। सहारा इस्टेट में छठ व्रत के लिए विशेष आयोजन किया गया। बड़े पार्क में पूजा-पाठ की व्यवस्था की गई।
कई घरों में भरी गई कोसी
अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य देने के बाद कई घरों में छठ माता की कृपा पाने के लिए कोसी भरी गई। रेलवे कॉलोनी, असुरन, सहारा स्टेट, गोरखनाथ, कूड़ाघाट, नंदानगर आदि मोहल्लों में इस आयोजन के कारण रौनक दिखी। माताओं ने कोसी पर दीप सजाकर मां की आराधना की।
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अस्थायी घाटों पर भी रही भीड़
बौलिया कॉलोनी, कूड़ाघाट, इंजीनियरिंग कॉलेज, बिलंदपुर, गोरखपुर यूनिवर्सिटी, बेतियाहाता, मोहद्दीपुर सहित कई क्षेत्रों में पार्क, कॉलोनी के आसपास अस्थायी तालाब बनाए गए। घाट बनाकर उसे सजाया-संवारा गया। लाइटिंग के विशेष इंतजाम किए गए। व्रती महिलाओं के परिवारवालों ने इन अस्थायी घाटों की सुंदर ढंग से सजावट की थी।
5001 दीपों से जगमग हुआ सूरजकुंड धाम
सूर्यकुंड धाम विकास समिति की ओर से छठ महोत्सव के रजत जयंती समारोह पर सूरजकुंड धाम परिसर को 5001 दीपों से सजाया गया। लोकगीत गायक मनोज मिश्र ‘मिहिर’ ने साथी कलाकारों के साथ छठ गीतों की प्रस्तुति देकर माहौल को भक्तिमय बना दिया। पूर्व जनपद न्यायाधीश रमेश कुमार त्रिपाठी और पूर्व महापौर डॉ. सत्या पांडेय ने महोत्सव का शुभारंभ किया।
माता मातेश्वरी सेवा दरबार में भी हुई पूजा
माता मातेश्वरी सेवा दरबार गुरुवार को अस्ताचल सूर्य की उपासना के लिए आईं व्रती माताओं से भरा रहा। माताओं एवं उनके परिजनों ने घंटे घड़ियाल की गूंज के बीच सूर्य को अर्घ्य दिया। इसके बाद पूजा-पाठ किया। चालीसा पाठ भी हुआ।
राजघाट के आसपास जबरदस्त जाम
राप्ती पर घाट सजे और बड़ी संख्या में व्रती महिलाएं भी पहुंची। इससे यातायात व्यवस्था ध्वस्त हो गई। राजघाट के आसपास लंबा जाम लग गया। इस कारण पैडलेगंज से नौसड़ की तरफ बड़े वाहनों का आवागमन पूरी तरह से बंद कर दिया गया। कुछ वाहनों को देवरिया बाईपास से राष्ट्रीय राजमार्ग पर निकाला गया।
सुरक्षा के तगड़े इंतजाम
घाटों पर सुरक्षा के तगड़े इंतजाम किए गए। राप्ती के आसपास एनडीआरएफ की तैनाती की गई। रामगढ़ ताल के आसपास पुलिस कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई। व्रती महिलाओं को किसी तरह की दिक्कत न हो, इसलिए सड़कों पर भी सुरक्षा के बंदोबस्त किए गए। मोहद्दीपुर और पैडलेगंज के पास छोटे वाहनों को धीमी गति से निकाला गया। इससे व्रती महिलाओं को सहूलियत हुई।
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चार दिवसीय छठ महापर्व के तीसरे दिन दोपहर से ही शहर के छठ घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरू हुई। शाम तक सभी घाट खचाखच भर गए। तमाम लोग बैंडबाजे के साथ घाटों तक पहुंचे। अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य देने का सिलसिला शाम पांच बजे से शुरू हुआ, जो कि शाम छह बजे तक चलता रहा। राप्ती नदी के किनारे भीड़ ऐसी जुटी कि पैदल चलना मुश्किल हो गया। जैसे ही अर्घ्य का समय आया घाटों पर छठ माता के जयकारे गूंजने लगे। शाम को अरुण देव की लालिमा निहारते हुए महिलाओं ने मां षष्ठी का आह्वान किया। परिवार के पुरुष सदस्यों और पंडितों ने अर्घ्य दिलाया। गोरखनाथ मंदिर में भी छठ व्रत की छटा देखने को मिली। बड़ी संख्या में महिलाएं भीम सरोवर पहुंची और अर्घ्य देकर बेटे की लंबी उम्र की कामना की। केरवा जे फरे ला घवद से और कांच ही बांस की बहंगिया बहंगी लचकत जाए जैसे तमाम लोकगीत गाए गए। सहारा इस्टेट में छठ व्रत के लिए विशेष आयोजन किया गया। बड़े पार्क में पूजा-पाठ की व्यवस्था की गई।
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कई घरों में भरी गई कोसी
अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य देने के बाद कई घरों में छठ माता की कृपा पाने के लिए कोसी भरी गई। रेलवे कॉलोनी, असुरन, सहारा स्टेट, गोरखनाथ, कूड़ाघाट, नंदानगर आदि मोहल्लों में इस आयोजन के कारण रौनक दिखी। माताओं ने कोसी पर दीप सजाकर मां की आराधना की।
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अस्थायी घाटों पर भी रही भीड़
बौलिया कॉलोनी, कूड़ाघाट, इंजीनियरिंग कॉलेज, बिलंदपुर, गोरखपुर यूनिवर्सिटी, बेतियाहाता, मोहद्दीपुर सहित कई क्षेत्रों में पार्क, कॉलोनी के आसपास अस्थायी तालाब बनाए गए। घाट बनाकर उसे सजाया-संवारा गया। लाइटिंग के विशेष इंतजाम किए गए। व्रती महिलाओं के परिवारवालों ने इन अस्थायी घाटों की सुंदर ढंग से सजावट की थी।
5001 दीपों से जगमग हुआ सूरजकुंड धाम
सूर्यकुंड धाम विकास समिति की ओर से छठ महोत्सव के रजत जयंती समारोह पर सूरजकुंड धाम परिसर को 5001 दीपों से सजाया गया। लोकगीत गायक मनोज मिश्र ‘मिहिर’ ने साथी कलाकारों के साथ छठ गीतों की प्रस्तुति देकर माहौल को भक्तिमय बना दिया। पूर्व जनपद न्यायाधीश रमेश कुमार त्रिपाठी और पूर्व महापौर डॉ. सत्या पांडेय ने महोत्सव का शुभारंभ किया।
माता मातेश्वरी सेवा दरबार में भी हुई पूजा
माता मातेश्वरी सेवा दरबार गुरुवार को अस्ताचल सूर्य की उपासना के लिए आईं व्रती माताओं से भरा रहा। माताओं एवं उनके परिजनों ने घंटे घड़ियाल की गूंज के बीच सूर्य को अर्घ्य दिया। इसके बाद पूजा-पाठ किया। चालीसा पाठ भी हुआ।
राजघाट के आसपास जबरदस्त जाम
राप्ती पर घाट सजे और बड़ी संख्या में व्रती महिलाएं भी पहुंची। इससे यातायात व्यवस्था ध्वस्त हो गई। राजघाट के आसपास लंबा जाम लग गया। इस कारण पैडलेगंज से नौसड़ की तरफ बड़े वाहनों का आवागमन पूरी तरह से बंद कर दिया गया। कुछ वाहनों को देवरिया बाईपास से राष्ट्रीय राजमार्ग पर निकाला गया।
सुरक्षा के तगड़े इंतजाम
घाटों पर सुरक्षा के तगड़े इंतजाम किए गए। राप्ती के आसपास एनडीआरएफ की तैनाती की गई। रामगढ़ ताल के आसपास पुलिस कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई। व्रती महिलाओं को किसी तरह की दिक्कत न हो, इसलिए सड़कों पर भी सुरक्षा के बंदोबस्त किए गए। मोहद्दीपुर और पैडलेगंज के पास छोटे वाहनों को धीमी गति से निकाला गया। इससे व्रती महिलाओं को सहूलियत हुई।