{"_id":"5c42260cbdec22739100641a","slug":"181547838988-gorakhpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अपराजेय ममता, हारी अक्षमता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अपराजेय ममता, हारी अक्षमता
Sat, 19 Jan 2019 12:46 AM IST
ajay Kumar
Gorakhpur, Uttar Pradesh, India
Gorakhpur, Uttar Pradesh, India
Published by: ajay Kumar
Updated Sat, 19 Jan 2019 12:46 AM IST
विज्ञापन
बेटी के साथ कंचन लता खुशी से फूली नहीं समातीं।
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गोरखपुर। ‘नारी तुम प्रेम हो, आस्था हो, विश्वास हो, टूटी हुई उम्मीदों की एकमात्र आस हो।’ आवास विकास कॉलोनी, सूरजकुंड निवासी कंचन लता राय इन पंक्तियाें का मूर्तरूप हैं। एक कार हादसे में अपनी दोनों बेटियों को खो देने वाली कंचन लता राय पर दुख तो पहाड़ बनकर टूटे पर उन्हें हरा न सके। छपरा में एएसआई विजिलेंस पति जयशिव राय की उदासी और घर का सूनापन दूर करने की उन्होंने वह राह चुनी जो बहुत कठिन थी। 50 साल की उम्र में मां बनने का फैसला। जीवट ही तो अपराजेय होने की कसौटी है। विश्वास दृढ़ हो तो हर आकाश मुट्ठी में आ सकता है। इस अपराजिता ने वह कर दिखाया।
किसी भी माता-पिता के लिए अपने बच्चों को खोने से बड़ा दु:ख कोई और नहीं होता। प्रिया (16) और मनोरमा (18) को खोकर कंचन राय और जयशिव राय यही महसूस कर रहे थे। दोनों को एक-दूसरे की उदासी अखरती। लेकिन कंचन लता ने अपने हौसले से नाउम्मीदी के बीच रोशनी की एक किरण ढूंढी। उन्होंने मां बनने का निर्णय लिया। उम्र के इस पड़ाव में सामान्य रूप से संतान सुख संभव न था। पति के साथ वह गोरखपुर में इंदिरा आईवीएफ की डॉ. शिखा मुखीजा के पास आईं। कंचन ने बताया कि डॉ. शिखा ने ज्यादा उम्र और कम वजन के चलते केस लेने से इनकार कर दिया। जब उन्होंने उनकी दर्दभरी कहानी सुनी तो मदद के लिए राजी हो गईं। आईवीएफ तकनीक की मदद से तीन माह पहले कंचन ने गुड़िया सी बेटी को जन्म दिया। उसकी किलकारियों ने घर का सूनापन खत्म कर दिया है। आत्मविश्वास से लबरेज कंचन लता से बात करते हुए जेहन में शे’र कौंधने लगता है... ‘अपने हौसले से तकदीर को बदल दूं, सुन ले दुनिया, हां मैं औरत हूं।’
विज्ञापन
किसी भी माता-पिता के लिए अपने बच्चों को खोने से बड़ा दु:ख कोई और नहीं होता। प्रिया (16) और मनोरमा (18) को खोकर कंचन राय और जयशिव राय यही महसूस कर रहे थे। दोनों को एक-दूसरे की उदासी अखरती। लेकिन कंचन लता ने अपने हौसले से नाउम्मीदी के बीच रोशनी की एक किरण ढूंढी। उन्होंने मां बनने का निर्णय लिया। उम्र के इस पड़ाव में सामान्य रूप से संतान सुख संभव न था। पति के साथ वह गोरखपुर में इंदिरा आईवीएफ की डॉ. शिखा मुखीजा के पास आईं। कंचन ने बताया कि डॉ. शिखा ने ज्यादा उम्र और कम वजन के चलते केस लेने से इनकार कर दिया। जब उन्होंने उनकी दर्दभरी कहानी सुनी तो मदद के लिए राजी हो गईं। आईवीएफ तकनीक की मदद से तीन माह पहले कंचन ने गुड़िया सी बेटी को जन्म दिया। उसकी किलकारियों ने घर का सूनापन खत्म कर दिया है। आत्मविश्वास से लबरेज कंचन लता से बात करते हुए जेहन में शे’र कौंधने लगता है... ‘अपने हौसले से तकदीर को बदल दूं, सुन ले दुनिया, हां मैं औरत हूं।’
विज्ञापन