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संघर्षों की सीढ़ी चढ़ सफलता के अर्श का सितारा बनीं मुमताज
Sun, 10 Feb 2019 01:31 AM IST
ajay Kumar
अमर उजाला ब्यूूूराे
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Published by: ajay Kumar
Updated Sun, 10 Feb 2019 01:31 AM IST
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- फोटो : amar ujala
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विवेक सिंह
गोरखपुर। पहली बार जब हाथ में हॉकी थामी तो मां ने बहुत डांटा। कई बार पिटाई भी हुई। मगर, जब हॉकी में बेहतर प्रदर्शन करने लगी तो मां ने न सिर्फ स्वीकृति दी बल्कि इसके लिए जैसे भी हो पैसों का इंतजाम किया। नाम रोशन करने के लिए दुआ की। इंडिया ए की फारवर्ड स्ट्राइकर मुमताज खान का यह संस्मरण अभावों के बावजूद तमाम बाधाओं को पार कर अपराजिता बनने की कहानी है।
बकौल मुमताज, उनके संघर्ष का सिलसिला जन्म के साथ ही शुरू हो गया। पिता हफीज खान लखनऊ में सब्जी का ठेला लगाते हैं जबकि मां कैसरजहां गृहिणी हैं। शुरू में हॉकी स्टिक थामने पर विरोध का सामना करने वाली मुमताज आज अपने परिवार के लिए किसी कुलदीपक से कम नहीं हैं। पिछले वर्ष हाईस्कूल की परीक्षा दे चुकी मुमताज का लखनऊ हॉस्टल में तीसरा साल है। फारवर्ड खेलने में महारत मुमताज 2016 में रांची और 2017 में रोहतक में नेशनल सब जूनियर महिला हॉकी में दमखम दिखा चुकी हैं। 2015 में छत्तीसगढ़ और 2016 में रांची में नेशनल जूनियर महिला हॉकी में उप्र की ओर से खेल चुकी हैं। इतना ही नहीं दिसंबर 2016 में बैंकाक में हुए अंडर-18 महिला हॉकी एशिया कप में मुमताज भारतीय टीम की भी सदस्य रह चुकी हैं।
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2017 आस्ट्रेलिया में खेले गए लीग मैच में जूनियर टीम का हिस्सा
2018 में खेले गए यूथ ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीतने वाली टीम की सदस्य
2018 में खेले गए जूनियर ओलंपिक में सिल्वर मेडल
बेल्जियम, नीदरलैंड में खेले गए मुकाबलों में भी टीम का सदस्य
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गोरखपुर। पहली बार जब हाथ में हॉकी थामी तो मां ने बहुत डांटा। कई बार पिटाई भी हुई। मगर, जब हॉकी में बेहतर प्रदर्शन करने लगी तो मां ने न सिर्फ स्वीकृति दी बल्कि इसके लिए जैसे भी हो पैसों का इंतजाम किया। नाम रोशन करने के लिए दुआ की। इंडिया ए की फारवर्ड स्ट्राइकर मुमताज खान का यह संस्मरण अभावों के बावजूद तमाम बाधाओं को पार कर अपराजिता बनने की कहानी है।
बकौल मुमताज, उनके संघर्ष का सिलसिला जन्म के साथ ही शुरू हो गया। पिता हफीज खान लखनऊ में सब्जी का ठेला लगाते हैं जबकि मां कैसरजहां गृहिणी हैं। शुरू में हॉकी स्टिक थामने पर विरोध का सामना करने वाली मुमताज आज अपने परिवार के लिए किसी कुलदीपक से कम नहीं हैं। पिछले वर्ष हाईस्कूल की परीक्षा दे चुकी मुमताज का लखनऊ हॉस्टल में तीसरा साल है। फारवर्ड खेलने में महारत मुमताज 2016 में रांची और 2017 में रोहतक में नेशनल सब जूनियर महिला हॉकी में दमखम दिखा चुकी हैं। 2015 में छत्तीसगढ़ और 2016 में रांची में नेशनल जूनियर महिला हॉकी में उप्र की ओर से खेल चुकी हैं। इतना ही नहीं दिसंबर 2016 में बैंकाक में हुए अंडर-18 महिला हॉकी एशिया कप में मुमताज भारतीय टीम की भी सदस्य रह चुकी हैं।
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डांस का शौक पर आता नहीं
हॉकी को जिंदगी बना चुकी मुमताज को डांस का भी शौक है। हालांकि, वह कहती हैं कि मुझे डांस आता नहीं, बस शौक ही है। मुमताज अपने एक भाई, चार बहनों व माता-पिता को आर्थिक रूप से मजबूत करना चाहती हैँ।
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ये हैं उपलब्धियां
2016 में बैंकाक में खेले गए अंडर-18 एशिया कप में कांस्य पदक2017 आस्ट्रेलिया में खेले गए लीग मैच में जूनियर टीम का हिस्सा
2018 में खेले गए यूथ ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीतने वाली टीम की सदस्य
2018 में खेले गए जूनियर ओलंपिक में सिल्वर मेडल
बेल्जियम, नीदरलैंड में खेले गए मुकाबलों में भी टीम का सदस्य