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डॉक्टर के इंतजार में तड़पे मरीज
Updated Thu, 28 Sep 2017 01:11 AM IST
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गोरखपुर।
जिला अस्पताल डाक्टरों की कमी के बीच उनकी मनमानी से मरीजों को सांसत झेलनी पड़ रही है। बुधवार को अस्पताल की ओपीडी के कमरा नंबर पांच में डाक्टर घंटों नदारद रहे। मरीजों को जमीन पर बैठकर इंतजार करना पड़ा।
बुधवार को जिला अस्पताल की ओपीडी के कमरा नंबर पांच के आगे मरीजों की लंबी कतार थी, लेकिन डॉक्टर नहीं थे। पर्ची बनवाते वक्त काउंटर पर कमरा नंबर बताया गया था। इसलिए मरीज लाइन में खड़े थे। कतार में सबसे बुरा हाल वृद्धों का था। लंबे इंतजार के बाद भी जब डॉक्टर नहीं पहुंचे तो मरीज जमीन पर बैठकर सुस्ताने लगे। जो ज्यादा बीमार थे वो जमीन पर लेट गए। माल्हनपार से सुबह 7 बजे जिला अस्पताल पहुंचीं 55 वर्षीय सुजाती देवी ने कहा कि पांच घंटे से लाइन में लगी हूं। सहजनवां की 60 वर्षीय चंपा देवी ने कहा कि डॉक्टर का इंतजार बीमारी से कम तकलीफ दायक नहीं। महावीर छपरा की 50 वर्षीय विमला देवी जमीन पर ही दर्द से कराहते हुए सो गईं। नए गांव की 45 वर्षीय अनारी देवी पेट दर्द से तड़पती रहीं और उनके पति उन्हें हौसला देते रहे।
इमरजेंसी से कॉल आने के चलते डॉक्टर को ओपीडी छोड़कर जाना पड़ा। इससे कुछ देर के लिए ओपीडी की सेवा प्रभावित हुई।
- डॉ. आरके गुप्ता, एसआईसी, जिला अस्पताल
जिला अस्पताल डाक्टरों की कमी के बीच उनकी मनमानी से मरीजों को सांसत झेलनी पड़ रही है। बुधवार को अस्पताल की ओपीडी के कमरा नंबर पांच में डाक्टर घंटों नदारद रहे। मरीजों को जमीन पर बैठकर इंतजार करना पड़ा।
बुधवार को जिला अस्पताल की ओपीडी के कमरा नंबर पांच के आगे मरीजों की लंबी कतार थी, लेकिन डॉक्टर नहीं थे। पर्ची बनवाते वक्त काउंटर पर कमरा नंबर बताया गया था। इसलिए मरीज लाइन में खड़े थे। कतार में सबसे बुरा हाल वृद्धों का था। लंबे इंतजार के बाद भी जब डॉक्टर नहीं पहुंचे तो मरीज जमीन पर बैठकर सुस्ताने लगे। जो ज्यादा बीमार थे वो जमीन पर लेट गए। माल्हनपार से सुबह 7 बजे जिला अस्पताल पहुंचीं 55 वर्षीय सुजाती देवी ने कहा कि पांच घंटे से लाइन में लगी हूं। सहजनवां की 60 वर्षीय चंपा देवी ने कहा कि डॉक्टर का इंतजार बीमारी से कम तकलीफ दायक नहीं। महावीर छपरा की 50 वर्षीय विमला देवी जमीन पर ही दर्द से कराहते हुए सो गईं। नए गांव की 45 वर्षीय अनारी देवी पेट दर्द से तड़पती रहीं और उनके पति उन्हें हौसला देते रहे।
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इमरजेंसी से कॉल आने के चलते डॉक्टर को ओपीडी छोड़कर जाना पड़ा। इससे कुछ देर के लिए ओपीडी की सेवा प्रभावित हुई।
- डॉ. आरके गुप्ता, एसआईसी, जिला अस्पताल