{"_id":"5972621f4f1c1b317f8b46bc","slug":"131500668447-gorakhpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्क्रीनिंग में बेदाग निकले 16 भू-माफिया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्क्रीनिंग में बेदाग निकले 16 भू-माफिया
Updated Sat, 22 Jul 2017 01:54 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
अरुण चन्द
गोरखपुर। जिला प्रशासन की स्क्रीनिंग में 16 भू-माफिया बेदाग निकले। पेशे से हलवाई व सदर तहसील केे गुलरिहा निवासी रामप्रसाद और त्रिलोकी समेत विभिन्न तहसीलों के इन सभी लोगों को बड़ी राहत मिली है। अपने को बेगुनाह साबित करने के लिए ये सभी तहसील, थाने से लेकर डीएम दफ्तर तक के चक्कर लगा रहे थे।
एंटी भू-माफिया अभियान के तहत जिला प्रशासन ने भू-माफिया की जो सूची बनाई थी, उनमें सदर तहसील के आठ समेत जिले की विभिन्न तहसीलों के 29 लोगों के नाम शामिल थे। डीएम राजीव रौतेला की सख्ती के बाद जब इन्हें शासन की गाइडलाइन की कसौटी पर कसा गया तो इनकी संख्या अब सिर्फ 13 ही रह गई है। इनमें सर्वाधिक सदर तहसील के छह और डीसीआरबी की सूची के पांच भू-माफिया शामिल हैं। ये सभी वे लोग हैं जिनपर गुंडा एक्ट समेत समय-समय पर विभिन्न धाराओं में मुकदमे दर्ज हो चुके हैं।
एंटी भू-माफिया अभियान को लेकर शासन की गाइडलाइन को पूरी तरह से न समझ पाने से कुछ तहसील प्रशासन ने सरकारी जमीन पर ठेले, गुमटी या झोपड़ी डाल देने वालों के भी नाम भू-माफिया की सूची में डाल दिए थे। शुरुआत में प्रशासन ने ऐसे 44 लोगों को चिह्नित किया था मगर पखवारे भर पहले डीएम ने जब सख्ती की तो इनमें से 15 नाम कट गए, शेष 29 नाम शासन स्तर पर बनी एंटी भू-माफिया कमेटी को भेज दिए गए।
विज्ञापन
इसके बाद भी जब इन 16 लोगों ने साक्ष्य के साथ अपनी बेगुनाही को लेकर डीएम से फरियाद की तो उन्होंने दोबारा जांच कराई और इन सभी के नाम सूची से काट दिए गए। अभियान के तहत अब उन्हीं पर शिकंजा कसा जाएगा जिनपर सरकारी, गरीबों की जमीनें कब्जा करने को लेकर कई बार मुकदमे दर्ज किए गए हों।
0
डीसीआरबी की सूची ही मिली पक्की
भू-माफिया को चिह्नित कर विभिन्न विभागों ने जिला एंटी-भू माफिया कमेटी को जो रिपोर्ट सौंपी थी, उनमें सिर्फ डीसीआरबी की सूची ही पक्की मिली। डीसीआरबी की तरफ से छह लोगों के नाम भेजे गए थे इनमें से सिर्फ एक ही नाम कटा, जबकि सदर तहसील से भेजी गई सूची में दो, चौरीचौरा तहसील के सभी चार, गोला के सभी तीन और कैंपियरगंज के सभी छह नाम जांच की कसौटी पर सही नहीं मिले। इससे तहसील प्रशासन के साथ ही जिला प्रशासन की भी किरकिरी हुई है।
0
ये हैं जिले के भू-माफिया
डीसीआरबी-
मोहम्मद कैश, लकड़ी मंडी तुर्कमानपुर, थाना राजघाट
पप्पू निषाद, भौवापार, थाना बेलीपार(शहर में कैं ट थाना क्षेत्र में पीपल डाडा के पास भी आवास)
दानबहादुर यादव, विवेकपुरम भरवलिया बुजुर्ग, थाना खोराबार
अमरजीत यादव, भटहट, थाना गुलरिहा
बृजेश यादव, बंधा बसियाडीह मंदिर के निकट, थाना चिलुआताल
प्रभागीय वनाधिकारी-
जीतन यादव, लक्ष्मीपुर यादव टोला, थाना कैंपियरगंज
एसडीएम सदर-
अनिल त्रिपाठी, सुमेर सागर
राजकुमार ऊर्फ राजू जायसवाल, राजू बेयरिंग हाउस गोलघर
पवन सिंह, महादेव झारखंडी टुकड़ा नंबर तीन, नंदानगर दरगहिया
सैयद शहाबुद्दीन, अलहदादपुर
राजकुमार सोनकर, नथमलपुर
फिरोज अहमद, रसूलपुर
एसडीएम सहजनवां-
हीरा, मईल थाना सहजनवां
ये मिले बेदाग-
बब्लू दूबे, बड़गो थाना खोराबार
त्रिलोकी, बरौली थाना गुलरिहा
रामप्रसाद, जंगल सालिकराम, थाना शाहपुर
लालजी, बेलवा
रामभूषण, बेलवा
रामप्रीत, बेलवा
सुरेंद्र, बेलवा
झींगुर, कोटियानिरंजन, थाना बड़हलगंज
रामलाल, बड़हलगंज
सूर्यनाथ, खैराटी, बड़हलगंज
संतराज व भगौती (दोनों भाई) बैजनाथपुर
विपिन कुमार जायसवाल, चौमुखा
सर्जुन यादव, तेनुआ विशम्भरपुर
रामप्रीत, करमहवां, थाना कैंपियरगंज
ग्राम पंचायत अधिकारी चौमुखा
0
जीडीए और गीडा की जमीन बनी चुनौती
जिले में करीब छह सौ एकड़ सरकारी व ग्राम सभा की जमीन पर कब्जा चिह्नित किया गया था। ज्यादातर विभागों की जमीन कब्जामुक्त करा ली गई है, मगर जीडीए और गीडा की सबसे ज्यादा चार सौ एकड़ से अधिक जमीन से कब्जा हटाना अब भी प्रशासन के सामने चुनौती बना हुआ है। जीडीए की करीब दो सौ एकड़ जमीन खोराबार से छुड़ाई जानी है। इस पर करीब 1371 लोगों ने कब्जा कर रखा है। इसी तरह गीडा की भी करीब दो सौ एकड़ पर 887 लोग कब्जा जमाए बैठे हैं।
गोरखपुर। जिला प्रशासन की स्क्रीनिंग में 16 भू-माफिया बेदाग निकले। पेशे से हलवाई व सदर तहसील केे गुलरिहा निवासी रामप्रसाद और त्रिलोकी समेत विभिन्न तहसीलों के इन सभी लोगों को बड़ी राहत मिली है। अपने को बेगुनाह साबित करने के लिए ये सभी तहसील, थाने से लेकर डीएम दफ्तर तक के चक्कर लगा रहे थे।
एंटी भू-माफिया अभियान के तहत जिला प्रशासन ने भू-माफिया की जो सूची बनाई थी, उनमें सदर तहसील के आठ समेत जिले की विभिन्न तहसीलों के 29 लोगों के नाम शामिल थे। डीएम राजीव रौतेला की सख्ती के बाद जब इन्हें शासन की गाइडलाइन की कसौटी पर कसा गया तो इनकी संख्या अब सिर्फ 13 ही रह गई है। इनमें सर्वाधिक सदर तहसील के छह और डीसीआरबी की सूची के पांच भू-माफिया शामिल हैं। ये सभी वे लोग हैं जिनपर गुंडा एक्ट समेत समय-समय पर विभिन्न धाराओं में मुकदमे दर्ज हो चुके हैं।
विज्ञापन
एंटी भू-माफिया अभियान को लेकर शासन की गाइडलाइन को पूरी तरह से न समझ पाने से कुछ तहसील प्रशासन ने सरकारी जमीन पर ठेले, गुमटी या झोपड़ी डाल देने वालों के भी नाम भू-माफिया की सूची में डाल दिए थे। शुरुआत में प्रशासन ने ऐसे 44 लोगों को चिह्नित किया था मगर पखवारे भर पहले डीएम ने जब सख्ती की तो इनमें से 15 नाम कट गए, शेष 29 नाम शासन स्तर पर बनी एंटी भू-माफिया कमेटी को भेज दिए गए।
विज्ञापन
इसके बाद भी जब इन 16 लोगों ने साक्ष्य के साथ अपनी बेगुनाही को लेकर डीएम से फरियाद की तो उन्होंने दोबारा जांच कराई और इन सभी के नाम सूची से काट दिए गए। अभियान के तहत अब उन्हीं पर शिकंजा कसा जाएगा जिनपर सरकारी, गरीबों की जमीनें कब्जा करने को लेकर कई बार मुकदमे दर्ज किए गए हों।
0
डीसीआरबी की सूची ही मिली पक्की
भू-माफिया को चिह्नित कर विभिन्न विभागों ने जिला एंटी-भू माफिया कमेटी को जो रिपोर्ट सौंपी थी, उनमें सिर्फ डीसीआरबी की सूची ही पक्की मिली। डीसीआरबी की तरफ से छह लोगों के नाम भेजे गए थे इनमें से सिर्फ एक ही नाम कटा, जबकि सदर तहसील से भेजी गई सूची में दो, चौरीचौरा तहसील के सभी चार, गोला के सभी तीन और कैंपियरगंज के सभी छह नाम जांच की कसौटी पर सही नहीं मिले। इससे तहसील प्रशासन के साथ ही जिला प्रशासन की भी किरकिरी हुई है।
0
ये हैं जिले के भू-माफिया
डीसीआरबी-
मोहम्मद कैश, लकड़ी मंडी तुर्कमानपुर, थाना राजघाट
पप्पू निषाद, भौवापार, थाना बेलीपार(शहर में कैं ट थाना क्षेत्र में पीपल डाडा के पास भी आवास)
दानबहादुर यादव, विवेकपुरम भरवलिया बुजुर्ग, थाना खोराबार
अमरजीत यादव, भटहट, थाना गुलरिहा
बृजेश यादव, बंधा बसियाडीह मंदिर के निकट, थाना चिलुआताल
प्रभागीय वनाधिकारी-
जीतन यादव, लक्ष्मीपुर यादव टोला, थाना कैंपियरगंज
एसडीएम सदर-
अनिल त्रिपाठी, सुमेर सागर
राजकुमार ऊर्फ राजू जायसवाल, राजू बेयरिंग हाउस गोलघर
पवन सिंह, महादेव झारखंडी टुकड़ा नंबर तीन, नंदानगर दरगहिया
सैयद शहाबुद्दीन, अलहदादपुर
राजकुमार सोनकर, नथमलपुर
फिरोज अहमद, रसूलपुर
एसडीएम सहजनवां-
हीरा, मईल थाना सहजनवां
ये मिले बेदाग-
बब्लू दूबे, बड़गो थाना खोराबार
त्रिलोकी, बरौली थाना गुलरिहा
रामप्रसाद, जंगल सालिकराम, थाना शाहपुर
लालजी, बेलवा
रामभूषण, बेलवा
रामप्रीत, बेलवा
सुरेंद्र, बेलवा
झींगुर, कोटियानिरंजन, थाना बड़हलगंज
रामलाल, बड़हलगंज
सूर्यनाथ, खैराटी, बड़हलगंज
संतराज व भगौती (दोनों भाई) बैजनाथपुर
विपिन कुमार जायसवाल, चौमुखा
सर्जुन यादव, तेनुआ विशम्भरपुर
रामप्रीत, करमहवां, थाना कैंपियरगंज
ग्राम पंचायत अधिकारी चौमुखा
0
जीडीए और गीडा की जमीन बनी चुनौती
जिले में करीब छह सौ एकड़ सरकारी व ग्राम सभा की जमीन पर कब्जा चिह्नित किया गया था। ज्यादातर विभागों की जमीन कब्जामुक्त करा ली गई है, मगर जीडीए और गीडा की सबसे ज्यादा चार सौ एकड़ से अधिक जमीन से कब्जा हटाना अब भी प्रशासन के सामने चुनौती बना हुआ है। जीडीए की करीब दो सौ एकड़ जमीन खोराबार से छुड़ाई जानी है। इस पर करीब 1371 लोगों ने कब्जा कर रखा है। इसी तरह गीडा की भी करीब दो सौ एकड़ पर 887 लोग कब्जा जमाए बैठे हैं।