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सिक्के बने सिरदर्द, नहीं ले रहा कोई
Updated Fri, 15 Sep 2017 11:52 PM IST
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कुशीनगर। कभी सिक्कों की खनक धन-संपदा की पहचान हुआ करती थी, लेकिन नवंबर 2016 में नोटबंदी के बाद बाजार में भारी पैमाने पर आए सिक्के आम लोगों के साथ-साथ व्यापारियों के लिए सिर दर्द बन गए हैं। न तो बड़े व्यापारी सिक्के ले रहे हैं और न ही बैंक। किराना व्यवसायियों से लगायत चाय-पान के दुकानदार और अन्य छोटे कारोबारी सिक्कों को लेकर परेशान हैं। व्यापारी इन सिक्कों को प्रत्येक सौ रुपये के साथ कुछ फुटकर ग्राहकों को देकर खपा रहे हैं।
आरओ प्लांट के संचालक सूर्य प्रकाश शर्मा का कहना है कि प्रतिदिन उनके पास हजार रुपये के सिक्के आते हैं। इन सिक्कों को जब बैंक में लेकर जाते हैं तो बैंक कर्मी लेने से इनकार कर देते हैं। उनका कहना है कि जब बैंकों ने ही सिक्के दिए थे तो फिर लेने से मना क्यों कर रहे हैं। शादी कार्ड विक्रेता सुशीला गुप्ता कहती हैं कि ग्राहकों से सिक्के लेने से मना नहीं कर सकते हैं, लेकिन जब यही सिक्के बैंक में जमा करने जाते हैं तो बैंक कर्मी कहते हैं कि सिक्कों की गिनती करने के लिए उनके पास समय नहीं है। स्टेशनरी कारोबारी धर्मेंद्र शुक्ल का कहना है कि व्यवसाय के लिए ग्राहक सिक्के दें या फिर नोट, हम ग्राहकों को नहीं लौटा सकते हैं, लेकिन बैंक कर्मियों के अड़ियल रवैए के चलते बैंक से वापस लौटना पड़ता है। आखिर इन सिक्कों का क्या करें। किसी तरह इसे ग्राहकों को देकर खपा रहे हैं। किराना व्यापारी सुरेंद्र जायसवाल का कहना है कि नोटबंदी के बाद यह समस्या उत्पन्न हुई है। बैंकों ने ही लोगों को सिक्के दिए थे। अब यही सिक्के सिर दर्द बन गए हैं। जब सिक्के बैंक नहीं लेंगे तो व्यापारी इसका क्या करेंगे।
भारतीय स्टेट बैंक पडरौना की मुख्य शाखा के प्रबंधक राजेश कुमार पांडेय का कहना है कि हम किसी ग्राहक के सिक्के लेने से इनकार नहीं कर रहे हैं। ग्राहकों से सिर्फ इतनी गुजारिश है कि वे एक, दो, पांच या दस रुपये के सिक्के अलग-अलग पैकेट में गिनकर दें। ताकि बैंक कर्मचारियों को रुपये गिनने में कोई असुविधा न हो और व्यर्थ का समय भी खर्च न हो।
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आरओ प्लांट के संचालक सूर्य प्रकाश शर्मा का कहना है कि प्रतिदिन उनके पास हजार रुपये के सिक्के आते हैं। इन सिक्कों को जब बैंक में लेकर जाते हैं तो बैंक कर्मी लेने से इनकार कर देते हैं। उनका कहना है कि जब बैंकों ने ही सिक्के दिए थे तो फिर लेने से मना क्यों कर रहे हैं। शादी कार्ड विक्रेता सुशीला गुप्ता कहती हैं कि ग्राहकों से सिक्के लेने से मना नहीं कर सकते हैं, लेकिन जब यही सिक्के बैंक में जमा करने जाते हैं तो बैंक कर्मी कहते हैं कि सिक्कों की गिनती करने के लिए उनके पास समय नहीं है। स्टेशनरी कारोबारी धर्मेंद्र शुक्ल का कहना है कि व्यवसाय के लिए ग्राहक सिक्के दें या फिर नोट, हम ग्राहकों को नहीं लौटा सकते हैं, लेकिन बैंक कर्मियों के अड़ियल रवैए के चलते बैंक से वापस लौटना पड़ता है। आखिर इन सिक्कों का क्या करें। किसी तरह इसे ग्राहकों को देकर खपा रहे हैं। किराना व्यापारी सुरेंद्र जायसवाल का कहना है कि नोटबंदी के बाद यह समस्या उत्पन्न हुई है। बैंकों ने ही लोगों को सिक्के दिए थे। अब यही सिक्के सिर दर्द बन गए हैं। जब सिक्के बैंक नहीं लेंगे तो व्यापारी इसका क्या करेंगे।
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भारतीय स्टेट बैंक पडरौना की मुख्य शाखा के प्रबंधक राजेश कुमार पांडेय का कहना है कि हम किसी ग्राहक के सिक्के लेने से इनकार नहीं कर रहे हैं। ग्राहकों से सिर्फ इतनी गुजारिश है कि वे एक, दो, पांच या दस रुपये के सिक्के अलग-अलग पैकेट में गिनकर दें। ताकि बैंक कर्मचारियों को रुपये गिनने में कोई असुविधा न हो और व्यर्थ का समय भी खर्च न हो।
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