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कम बारिश ने रोकी कोहरे की राह

Fri, 18 Jan 2019 12:36 AM IST
ajay Kumar अमर उजाला/गाोरख्ापुर
अमर उजाला/गाोरख्ापुर Published by: ajay Kumar Updated Fri, 18 Jan 2019 12:36 AM IST
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कम बारिश ने रोकी कोहरे की राह
गोरखपुर। भले ही पहाड़ों में जमकर बर्फबारी हुई, लेकिन गोरखपुर समेत पूर्वांचल के इलाकों में इस बार एक भी दिन कड़ाके की ठंड नहीं पड़ी। करीब आधा दिसंबर बीतने को है, सिर्फ एक दिन घना कोहरा हुआ है और न्यूनतम तापमान भी सामान्य से ज्यादा रहा है।
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कम बारिश ने कोहरे की राह रोक दी है। सितंबर में जहां सामान्य तौर पर 228 मिलीमीटर बारिश होती है, 2018 में मात्र 83 मिलीमीटर बारिश हुई। वहीं अक्टूबर में सामान्य 43 मिलीमीटर बारिश की तुलना में शून्य बारिश हुई। इसवजह से वातावरण में काफी कम नमी रही। इससे वातावरण में कोहरा भी कम बना। मौसम विशेषज्ञ कैलाश पांडेय ने बताया कि अब तक वातावरण में नमी की मात्रा 40 से 50 प्रतिशत के आसपास रही है।
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ठंड के इस सीजन में अब तक सिर्फ एक दिन नमी बढ़ी थी। इसकी वजह से कोहरा हुआ था। आने वाले समय में भी कोहरा घना होने की संभावना बहुत ही कम है। उन्होंने बताया कि वातावरण में 75 प्रतिशत तक नमी रहने पर कोहरा होता है। वहीं नमी बढ़कर 90 प्रतिशत से ज्यादा हुई तो कोहरा घना हो जाता है। गोरखपुर के मौसम में काफी अनिश्चितता रही है। 2016, 2017 और 2018 में बहुत ही कम बारिश हुई है। मानसून में सामान्य तौर पर प्रतिदिन जहां 11.5 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए, वहां इस बार अत्यधिक या अल्प बारिश हुई है।
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बीते सालों में इतने रहे कोहरे वाले दिन

2010 - 20

2011- 31
2012- 28
2013- 35
2014- 44
2015- 37
2016- 72
2017- 33
2018- 54
2019- 01

गेहूं और आलू की फसल को होगा नुकसान

गोरखपुर। 117 साल के दौरान 2018 छठां सबसे गर्म साल रहा। न सिर्फ बारिश कम हुई है बल्कि कोहरा भी काफी कम पड़ा। इसका सीधा असर फसलों पर पड़ने वाला है। सबसे ज्यादा नुकसान गेहूं और आलू की फसल को होगा।

कृषि विशेषज्ञ डॉ. अजय सिंह ने बताया कि गेहूं की फसल के लिए शुरुआती दिनों में वातावरण में नमी के साथ हल्की बारिश की भी जरूरत पड़ती है, लेकिन इस बार दिन का तापमान सामान्य से ज्यादा रहा है। साथ ही कोहरा न पड़ने से हवा में नमी काफी कम रही है। इन दोनों की कमी से जमीन में नमी की मात्रा काफी कम होगी, जिससे गेहूं की बालियां कमजोर होंगी और उत्पादन पर असर पड़ेगा। हालांकि दलहन और तिलहन की फसल पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ेगा।

 
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