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चार दिन में 57 बच्चों की मौत
Updated Tue, 03 Oct 2017 12:40 AM IST
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गोरखपुर।
गुजरे चार दिनों में बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 57 बच्चों की मौत हो गई। इसमें 32 नवजात थे। पिछले दिनों इन्हें बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बालरोग विभाग में भर्ती कराया गया था।
सर्वाधिक मौतें नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (एनआईसीयू) में हुईं। इनमें अधिकांश मौतों की वजह प्रीमेच्योर डिलेवरी और संक्रमण रही। बता दें कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज में पूर्वांचल के विभिन्न जिलों के ही नहीं बल्कि नेपाल और बिहार के मरीज भी इलाज के लिए आते हैं। दूरदराज से आने वाले नवजातों की स्थिति बीआरडी मेडिकल कॉलेज आते-आते काफी खराब हो जाती है। ऐसे में इन्हें बचाना बीआरडी के डॉक्टरों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होता है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 28 सितंबर को एनआईसीयू (नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट) में 9 व पीआईसीयू (पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट) में 6, 29 सितंबर को एनआईसीयू में 8 व पीआईसीयू में 7 और 30 सितंबर को एनआईसीयू में 8 व पीआईसीयू में 6 बच्चों की मौत हुई। एक अक्टूबर को एनआईसीयू में 7 और पीआईसीयू में छह बच्चों की मौत हो गई।
गुजरे चार दिनों में बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 57 बच्चों की मौत हो गई। इसमें 32 नवजात थे। पिछले दिनों इन्हें बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बालरोग विभाग में भर्ती कराया गया था।
सर्वाधिक मौतें नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (एनआईसीयू) में हुईं। इनमें अधिकांश मौतों की वजह प्रीमेच्योर डिलेवरी और संक्रमण रही। बता दें कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज में पूर्वांचल के विभिन्न जिलों के ही नहीं बल्कि नेपाल और बिहार के मरीज भी इलाज के लिए आते हैं। दूरदराज से आने वाले नवजातों की स्थिति बीआरडी मेडिकल कॉलेज आते-आते काफी खराब हो जाती है। ऐसे में इन्हें बचाना बीआरडी के डॉक्टरों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होता है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 28 सितंबर को एनआईसीयू (नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट) में 9 व पीआईसीयू (पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट) में 6, 29 सितंबर को एनआईसीयू में 8 व पीआईसीयू में 7 और 30 सितंबर को एनआईसीयू में 8 व पीआईसीयू में 6 बच्चों की मौत हुई। एक अक्टूबर को एनआईसीयू में 7 और पीआईसीयू में छह बच्चों की मौत हो गई।
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